विदेश में रहने वाले भारतीय अपने माता-पिता की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। भारत में सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस के विकल्प पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करने की सुविधा और उम्रदराज आवेदकों के लिए लचीली अंडरराइटिंग ने एनआरआई परिवारों के लिए पॉलिसी खरीदना आसान बना दिया है।
कागजों पर यह व्यवस्था मजबूत दिखती है, लेकिन जब अचानक अस्पताल में भर्ती की नौबत आती है, तब असली परीक्षा शुरू होती है। पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर बैठकर क्लेम की पूरी प्रक्रिया संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
बीमा नियामक संस्था Insurance Regulatory and Development Authority of India के हालिया आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा कंपनियों ने तीन करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दावों का निपटारा किया। कई कंपनियों का क्लेम सेटलमेंट रेशियो 95 प्रतिशत से ऊपर रहा।
ये आंकड़े सिस्टम की मजबूती का संकेत देते हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती के दौरान परिवार जो तनाव और समन्वय की चुनौतियां झेलते हैं, वे इन प्रतिशत आंकड़ों में दिखाई नहीं देतीं।
एनआरआई परिवारों के सामने मुख्य दिक्कत बीमा उपलब्धता की नहीं, बल्कि क्लेम के समय समन्वय की होती है। जब बुजुर्ग माता-पिता अचानक अस्पताल में भर्ती होते हैं, तब विदेश में बैठे बेटे या बेटी को कई मोर्चों पर एक साथ सक्रिय होना पड़ता है।
उन्हें अस्पताल के इंश्योरेंस डेस्क से लगातार संपर्क में रहना होता है, प्री ऑथराइजेशन की स्वीकृति का इंतजार करना पड़ता है, मेडिकल हिस्ट्री से जुड़े सवालों का जवाब देना होता है और डिस्चार्ज के समय बिलिंग दस्तावेजों की जांच करनी पड़ती है। यदि कैशलेस सुविधा उपलब्ध नहीं है तो रिइम्बर्समेंट की प्रक्रिया अलग से शुरू होती है। यह सब अलग समय क्षेत्र और सीमित जानकारी के बीच करना पड़ता है।
सीनियर परिवारों के साथ काम करने वाले और आईआरडीए लाइसेंस प्राप्त कॉरपोरेट एजेंट कंपनी Anvayaa के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक प्रशांत रेड्डी के अनुसार अधिकतर एनआरआई परिवार बीमा लेते समय सम इंश्योर्ड और पहले से मौजूद बीमारियों के कवरेज पर ध्यान देते हैं।
आम तौर पर पांच से दस लाख रुपये की बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप अप प्लान लिया जाता है, ताकि प्रीमियम संतुलित रहे और बड़े खर्च की स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके। जिन माता-पिता को पुरानी बीमारियां हैं, उनके लिए कुछ परिवार ज्यादा कवर वाली व्यापक पॉलिसी चुनते हैं।
लेकिन अक्सर जिस पहलू की अनदेखी होती है, वह है क्लेम की तैयारी। नामित व्यक्ति की स्पष्ट जानकारी, रजिस्टर्ड मोबाइल और ईमेल की उपलब्धता, नेटवर्क अस्पतालों की सूची और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर से समन्वय जैसी बातें पहले से तय नहीं की जातीं।
मान लीजिए अमेरिका में रहने वाला एक बेटा अपने पिता के लिए बीस लाख रुपये की पॉलिसी लेता है। पिता को डायबिटीज है। पॉलिसी तो पर्याप्त है, लेकिन परिवार ने पहले से नेटवर्क अस्पतालों की जानकारी नहीं ली। अचानक आपात स्थिति में पास का अस्पताल नेटवर्क में नहीं होता। ऐसे में क्लेम कैशलेस की जगह रिइम्बर्समेंट में बदल जाता है, जिससे कागजी प्रक्रिया और तनाव दोनों बढ़ जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकतर समस्याएं अंडरराइटिंग के समय नहीं, बल्कि अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच तालमेल में आती हैं।
प्री ऑथराइजेशन में देरी, दस्तावेजों में असंगति और मेडिकल हिस्ट्री को लेकर अतिरिक्त स्पष्टीकरण की मांग आम बाधाएं हैं। समय क्षेत्र का अंतर स्थिति को और जटिल बना देता है।
उदाहरण के तौर पर हैदराबाद में निमोनिया के कारण भर्ती एक बुजुर्ग मां के मामले में बीमा कंपनी ने पुरानी श्वसन बीमारी का विवरण मांगा। कैलिफोर्निया में रहने वाला बेटा कई घंटों बाद जवाब दे पाया। इस देरी से स्वीकृति प्रक्रिया धीमी हुई और अस्पताल के बिलिंग काउंटर पर चिंता बढ़ी। अंततः क्लेम स्वीकृत हो गया, लेकिन उस दौरान परिवार को भारी मानसिक दबाव झेलना पड़ा।
प्रशांत रेड्डी के मुताबिक क्लेम सेटलमेंट रेशियो कुल मिलाकर भुगतान की स्थिति दर्शाता है, लेकिन यह नहीं बताता कि प्रक्रिया कितनी सुगम रही।
कई बार दावा मंजूर तो हो जाता है, लेकिन कमरे के किराए की सीमा या गैर भुगतान योग्य सामान को लेकर आंशिक कटौती हो जाती है। परिवार को बार-बार स्पष्टीकरण देना पड़ता है या शिकायत दर्ज करानी पड़ती है।
इस तरह आंकड़ों में सफलता दिखती है, लेकिन अस्पताल में भर्ती के दौरान वास्तविक अनुभव तनावपूर्ण हो सकता है।
अब कुछ सेवा प्रदाता पारंपरिक पॉलिसी से आगे बढ़कर समन्वय सेवाएं भी दे रहे हैं। इन मॉडलों में केयर कोऑर्डिनेटर अस्पताल, टीपीए और बीमा कंपनी के बीच सेतु का काम करते हैं।
वे नेटवर्क स्थिति की पुष्टि करते हैं, प्री ऑथराइजेशन की प्रगति पर नजर रखते हैं, दस्तावेज तैयार करवाते हैं और विदेश में बैठे परिवार को समय पर जानकारी देते हैं। इस तरह का ढांचा उत्पाद में नहीं, बल्कि सेवा स्तर पर बदलाव लाता है।
यदि आप विदेश में रहते हैं और भारत में माता-पिता के लिए हेल्थ कवर लेने की योजना बना रहे हैं, तो केवल कवर राशि देखना पर्याप्त नहीं है।
पॉलिसी खरीदने या नवीनीकरण से पहले यह सुनिश्चित करें कि
पहले से नेटवर्क अस्पतालों की पहचान हो
स्थानीय स्तर पर कोई विश्वसनीय संपर्क व्यक्ति उपलब्ध हो
रजिस्टर्ड मोबाइल और ईमेल सक्रिय हों
माता-पिता को बुनियादी क्लेम प्रक्रिया की जानकारी हो