facebookmetapixel
Advertisement
Bharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमण

यूरिया उत्पादन में 22% बढ़ोतरी की उम्मीद, LNG आपूर्ति बढ़ने से फर्टिलाइजर सेक्टर को राहत

Advertisement

सूत्रों के मुताबिक आपूर्ति बढ़ाने के लिए, उर्वरक इकाइयों ने 18 मार्च से 31 मार्च की अवधि के लिए हाजिर बाजारों से 8.65एमएमएससीएमडी अतिरिक्त गैस की मांग रखी थी।

Last Updated- March 18, 2026 | 10:41 PM IST
fertilizers

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के बीच उर्वरक क्षेत्र में व्याप्त निराशा के बीच अच्छी खबर यह है कि मार्च के अंत तक भारत का दैनिक यूरिया उत्पादन मौजूदा करीब 55,000 टन से 22 फीसदी बढ़कर 66,500 टन तक पहुंच सकता है। कारोबारियों और बाजार सूत्रों के मुताबिक ऐसा इसलिए हो सकता है कि वैश्विक हाजिर बाजारों से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की उपलब्धता 23 फीसदी बढ़ गई है।

सूत्रों का कहना है कि इससे उर्वरक इकाइयों को कुल एलएनजी आपूर्ति में वृद्धि होने की उम्मीद है। ऐसे में यह उनकी औसत गैस आवश्यकता के लगभग 76 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जबकि पहले 70 प्रतिशत का वादा किया गया था। इस एलएनजी को आक्रामक बोली प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त किया गया, हालांकि इसकी कीमत लगभग 18-20 डॉलर प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) रही, जबकि संकट से पहले इसकी दरें करीब 10-12 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू थीं।

सूत्रों ने कहा कि सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण के कारण हाजिर गैस बाजारों से भारत ने 18 मार्च से लेकर महीने के अंत तक उर्वरक इकाइयों के लिए लगभग 393.1 करोड़ मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (एमएमएससीएमडी) गैस की आपूर्ति की व्यवस्था कर ली है, जबकि पहले दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत 32 एमएमएससीएमडी का वादा किया गया था। अब यह लगभग 76 प्रतिशत एलएनजी की जरूरत पूरी कर रहा है, जो यूरिया उत्पादन के लिए लगभग 52 एमएमएससीएमडी आंकी गई है। 52 एमएमएससीएमडी एलएनजी की जरूरत पिछले छह महीनों (सितंबर 2025–फरवरी 2026) में यूरिया बनाने वाली इकाइयों द्वारा औसत प्राकृतिक गैस खपत पर आधारित है।

सरकार द्वारा एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से उर्वरक इकाइयों को एलएनजी गैस आपूर्ति को युक्तिसंगत बनाए जाने के बाद, उर्वरक इकाइयों को कुल गैस आपूर्ति घटकर 32 एमएमएससीएमडी गई थी।

सूत्रों के मुताबिक आपूर्ति बढ़ाने के लिए, उर्वरक इकाइयों ने 18 मार्च से 31 मार्च की अवधि के लिए हाजिर बाजारों से 8.65एमएमएससीएमडी अतिरिक्त गैस की मांग रखी थी, जिसमें से सरकार ने अब 7.31 एमएमएससीएमडी की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है, जबकि शेष की व्यवस्था भी की जा रही है। भारत ने हाजिर बाजारों से उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति तुरंत बढ़ाने के लिए 600 करोड़ रुपये का कोष तैयार किया है। सूत्रों ने कहा कि उर्वरक संयंत्रों के लिए एलएनजी गैस की अधिक हाजिर खरीद की आवश्यकता इसलिए उत्पन्न हुई है कि सरकार का मानना है कि यदि ईरान संकट अपेक्षा से अधिक लंबा खिंचता है तो गैस की वास्तविक उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

भारत में आमतौर पर खरीफ मौसम ( मई के मध्य से अक्टूबर तक) में लगभग 3.2-3.3 करोड़ टन उर्वरक का उपयोग होता है। इसकी बिक्री आमतौर पर दक्षिण भारत से शुरू होती है। घरेलू बाजार में लगभग 37 यूरिया निर्माण इकाइयों में से अधिकांश एलएनजी पर निर्भर हैं, जो उनके कच्चे माल की लागत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाती है। खरीफ के मौसम में यूरिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है क्योंकि धान और मक्के की खेती में इसका खूब प्रयोग किया जाता है।

Advertisement
First Published - March 18, 2026 | 10:38 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement