पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के बीच उर्वरक क्षेत्र में व्याप्त निराशा के बीच अच्छी खबर यह है कि मार्च के अंत तक भारत का दैनिक यूरिया उत्पादन मौजूदा करीब 55,000 टन से 22 फीसदी बढ़कर 66,500 टन तक पहुंच सकता है। कारोबारियों और बाजार सूत्रों के मुताबिक ऐसा इसलिए हो सकता है कि वैश्विक हाजिर बाजारों से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की उपलब्धता 23 फीसदी बढ़ गई है।
सूत्रों का कहना है कि इससे उर्वरक इकाइयों को कुल एलएनजी आपूर्ति में वृद्धि होने की उम्मीद है। ऐसे में यह उनकी औसत गैस आवश्यकता के लगभग 76 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जबकि पहले 70 प्रतिशत का वादा किया गया था। इस एलएनजी को आक्रामक बोली प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त किया गया, हालांकि इसकी कीमत लगभग 18-20 डॉलर प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) रही, जबकि संकट से पहले इसकी दरें करीब 10-12 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू थीं।
सूत्रों ने कहा कि सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण के कारण हाजिर गैस बाजारों से भारत ने 18 मार्च से लेकर महीने के अंत तक उर्वरक इकाइयों के लिए लगभग 393.1 करोड़ मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (एमएमएससीएमडी) गैस की आपूर्ति की व्यवस्था कर ली है, जबकि पहले दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत 32 एमएमएससीएमडी का वादा किया गया था। अब यह लगभग 76 प्रतिशत एलएनजी की जरूरत पूरी कर रहा है, जो यूरिया उत्पादन के लिए लगभग 52 एमएमएससीएमडी आंकी गई है। 52 एमएमएससीएमडी एलएनजी की जरूरत पिछले छह महीनों (सितंबर 2025–फरवरी 2026) में यूरिया बनाने वाली इकाइयों द्वारा औसत प्राकृतिक गैस खपत पर आधारित है।
सरकार द्वारा एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से उर्वरक इकाइयों को एलएनजी गैस आपूर्ति को युक्तिसंगत बनाए जाने के बाद, उर्वरक इकाइयों को कुल गैस आपूर्ति घटकर 32 एमएमएससीएमडी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक आपूर्ति बढ़ाने के लिए, उर्वरक इकाइयों ने 18 मार्च से 31 मार्च की अवधि के लिए हाजिर बाजारों से 8.65एमएमएससीएमडी अतिरिक्त गैस की मांग रखी थी, जिसमें से सरकार ने अब 7.31 एमएमएससीएमडी की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है, जबकि शेष की व्यवस्था भी की जा रही है। भारत ने हाजिर बाजारों से उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति तुरंत बढ़ाने के लिए 600 करोड़ रुपये का कोष तैयार किया है। सूत्रों ने कहा कि उर्वरक संयंत्रों के लिए एलएनजी गैस की अधिक हाजिर खरीद की आवश्यकता इसलिए उत्पन्न हुई है कि सरकार का मानना है कि यदि ईरान संकट अपेक्षा से अधिक लंबा खिंचता है तो गैस की वास्तविक उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
भारत में आमतौर पर खरीफ मौसम ( मई के मध्य से अक्टूबर तक) में लगभग 3.2-3.3 करोड़ टन उर्वरक का उपयोग होता है। इसकी बिक्री आमतौर पर दक्षिण भारत से शुरू होती है। घरेलू बाजार में लगभग 37 यूरिया निर्माण इकाइयों में से अधिकांश एलएनजी पर निर्भर हैं, जो उनके कच्चे माल की लागत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाती है। खरीफ के मौसम में यूरिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है क्योंकि धान और मक्के की खेती में इसका खूब प्रयोग किया जाता है।