आईबीएम रिसर्च के तीन भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित न्यूयॉर्क की अग्रणी एजेंटिक एआई कंपनी इमर्जेंस भारत की पहली समर्पित एआई अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) प्रयोगशाला इमर्जेंस इंडिया लैब्स (ईआईएल) शुरू कर रही है। ईआईएल ऑटोनॉमस एआई एजेंटों पर केंद्रित होगी।
कंपनी ने कहा कि यह लैब देश में बनने वाली अगली पीढ़ी की ऑटोनॉमस प्रणालियों के विकास को तेजी करेगी। ये प्रणालियां बेहद जरूरी डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे को चलाने में सक्षम होंगी। इससे देश अपने पारंपरिक आईटी सेवा प्रारूप से आगे बढ़कर आधुनिक विनिर्माण, लॉजिस्टिक और औद्योगिक ऑटोमेशन की दिशा में जा पाएगा।
आरऐंडडी के शुरुआती निवेश के तौर पर उसे करोड़ों डॉलर की मदद मिली है और भविष्य में उसकी बड़े विस्तार की योजना है। उम्मीद है कि कंपनी अगले तीन से चार वर्षों में विश्व-स्तरीय 500 शोध वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को जोड़ेगी।
बेंगलूरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) के पास रणनीतिक रूप से स्थित ईआईएल उसके तंत्र के साथ मिलकर काम करेगी। संयुक्त अनुसंधान, आदान-प्रदान, हैकाथॉन और ग्रीष्मकालीन स्कूलों के जरिये ऐसा किया जाएगा ताकि स्वचालन वाली प्रणालियों के क्षेत्र में अगली पीढ़ी के कौशल की दमदार पौध तैयार की जा सके। आईआईएससी के प्रोफेसर सिद्धार्थ गाडगिल मुख्य वैज्ञानिक के तौर पर जुड़ रहे हैं और साथ ही वे अपनी शैक्षणिक भूमिका भी निभाते रहेंगे।
इमर्जेंस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी सत्य निट्टा ने कहा, ‘हमारा मानना है कि सबसे तुरंत अवसर ऐसी ऑटोनॉमस एआई प्रणाली बनाने में है, जो दुनिया के सबसे अहम डिजिटल बुनियादी ढांचे को संचालित करने में सक्षम हों यानी वित्तीय नेटवर्क और दूरसंचार प्लेटफॉर्म से लेकर क्लाउड और डिजिटल सार्वजनिक प्रणाली तक।’
उन्होंने कहा, ‘डिजिटल क्षेत्र में ऑटोनॉमी (स्वचालन) में महारत हासिल करके हम रोबोटिक्स, आधुनिक विनिर्माण और अगली पीढ़ी के औद्योगिक बुनियादी ढांचा क्षेत्र में विस्तार की नींव रख रहे हैं।’