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भारत की मेजबानी में क्वाड विदेश मंत्रियों का महामंथन मंगलवार को, पश्चिम एशिया संकट पर होगी चर्चा

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को कहा कि अमेरिका चाहता है कि क्वाड एक ऐसा मंच बने जहां चारों सदस्य देश समुद्री सुरक्षा को उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला कर सकें

Last Updated- May 25, 2026 | 10:45 PM IST
S Jaishankar
विदेश मंत्री एस. जयशंकर | फाइल फोटो

क्वाड के विदेश मंत्रियों की मंगलवार को होने वाली बैठक में अहम खनिजों, यूक्रेन और पश्चिम एशिया संघर्ष, खासतौर पर उससे उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों, होर्मुज अवरोध के कारण व्याप्त ऊर्जा संकट के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने पर चर्चा होगी। यह क्षेत्र व्यापार और ऊर्जा के आवागमन के लिए अहम है।

एक निजी टेलीविजन नेटवर्क को दिए साक्षात्कार में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को कहा कि अमेरिका चाहता है कि क्वाड एक ऐसा मंच बने जहां चारों सदस्य देश समुद्री सुरक्षा को उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला कर सकें और अहम खनिज तथा आपूर्ति शृंखला के मामले में सहयोग कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इसे एक अर्द्धवार्षिक बैठक वाला मंच बनकर नहीं रह जाना चाहिए। रुबियो ने कहा कि चारों विदेश मंत्री कुछ खास सहमतियां बनाने की कोशिश करेंगे ताकि मिलने पर चारों देशों के नेता उनकी घोषणा कर सकें। रुबियो ने कहा कि क्वाड समिट इस वर्ष हो सकती है।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे जिसमें अमेरिका के मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल होंगे। वोंग, मोतेगी और जयशंकर अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। भारत इस बैठक की मेजबानी क्वाड गठबंधन के वर्तमान अध्यक्ष की हैसियत से कर रहा है। यह बैठक लगभग एक वर्ष बाद हो रही है।

इससे पहले क्वाड विदेश मंत्री वॉशिंगटन डीसी में मिले थे। इस बैठक में हिंद-प्रशांत को स्वतंत्र और खुला बनाए रखने की क्वाड की दृष्टि मुख्य विषय होगी। 2024 में अमेरिका के विलमिंगटन में हुई पिछली क्वाड शिखर बैठक में समूह के शीर्ष नेताओं ने हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा सहयोग को विस्तार देने के बड़े कदमों की घोषणा की थी। मंगलवार की बैठक से इस वर्ष भारत में होने वाले संभावित क्वाड शिखर सम्मेलन का व्यापक एजेंडा तय होने की संभावना है।

रविवार को जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद रुबियो ने कहा कि क्वाड चार देशों के बीच एक ऐसा मंच है जो केवल कुछ प्रमुख मुद्दों पर रणनीतिक रूप से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि चारों देशों में वैश्विक घटनाओं को प्रभावित करने की क्षमता भी है। रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन क्वाड के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि क्वाड वास्तव में अपने वर्तमान रूप में राष्ट्रपति ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान शुरू हुआ था और तब यह आगे बढ़ा। यह आगे बढ़ता रहा है।’

क्वाड की प्रासंगिकता पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने सुझाव दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में, और भारत का अमेरिका महाद्वीप के अन्य देशों के साथ बढ़ता व्यापार देखते हुए, ‘मैं वहां और अधिक विकास, अधिक व्यापार, और अधिक समुद्री गतिविधि देख सकता हूं।’

उन्होंने  कहा, ‘मेरे लिए क्वाड पर काम चलता रहता है। और मुझे लगता है कि दो दिन बाद आप हमें मंच पर क्वाड के बारे में बात करते देखेंगे। और मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि हमारे पास बताने के लिए एक अच्छी, मजबूत कहानी होगी।’ ब्रीफिंग में जयशंकर ने कहा कि क्वाड सदस्य ‘एक-दूसरे के साथ बहुत काम कर रहे हैं क्योंकि हम समुद्री शक्तियां हैं’, लोकतांत्रिक शक्तियां हैं जिनका काम करने का एक विशेष तरीका, विश्वास प्रणाली और प्रथाएं हैं।

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First Published - May 25, 2026 | 10:45 PM IST

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