केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन बड़े केमिकल पार्कों की स्थापना के लिए शुक्रवार को 3,030 करोड़ रुपये की नई योजना की घोषणा की। इसके जरिए भारत को रसायन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ (भव्य-रसायन) को मंजूरी दी गई। सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित इस योजना की कुल लागत 3,030 करोड़ रुपये है। इसमें से 3,000 करोड़ रुपये साझा अवसंरचना एवं बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे जबकि 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित हैं। यह योजना वर्तमान वित्त वर्ष से शुरू होकर 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा कि कम-से-कम 2,000 एकड़ क्षेत्र में स्थापित होने वाले एक केमिकल पार्क में 20,000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये तक का निवेश हो सकता है। यह योजना निवेश जुटाने में गुणक का काम करेगी। कुल निवेश योजना के लिए निर्धारित राशि से कहीं अधिक होगा, क्योंकि 3,030 करोड़ रुपये केवल बुनियादी ढांचे के लिए केंद्रीय मदद है।
इन पार्कों का विकास राज्यों के साथ ‘चैलेंज रूट’ के तहत किया जाएगा और हरेक पार्क के लिए न्यूनतम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) निर्बाध भूमि की उपलब्धता जरूरी होगी। ये पार्क ग्रीनफील्ड (नई) या ब्राउनफील्ड (पुरानी) दोनों तरह के हो सकते हैं, जिसका चयन राज्य सरकारें करेंगी। वैष्णव ने कहा कि रसायन क्षेत्र अर्थव्यवस्था का ‘आधारभूत’ क्षेत्र है, जो कई उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराता है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक केंद्र सरकार इस योजना के तहत स्थापित होने वाले प्रत्येक पार्क के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान देगी। हालांकि संबंधित राज्य सरकार के लिए कम-से-कम 500 करोड़ रुपये का योगदान करना जरूरी होगा। सरकार ने कहा कि इस योजना से रसायन उद्योग की समूची मूल्य शृंखला का विकास होगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी।
यह योजना घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित करेगी, उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इन पार्कों में सीईटीपी, टीएसडीएफ, जल आपूर्ति प्रणाली, सॉल्वेंट रिकवरी, स्टीम नेटवर्क, पाइपलाइन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार ने कहा, ‘इन पार्कों की स्थापना से रसायन उद्योग का टिकाऊ विकास होगा और इसके प्रभाव से कृषि, वस्त्र, दवा, वाहन एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विकास को बढ़ावा मिलेगा।’
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने शुक्रवार को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बेल्लारी-गुंटकल रेल खंड पर तीसरी एवं चौथी लाइन बिछाने की 1,264 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी। यह परियोजना रेलवे की क्षमता बढ़ाने, माल व यात्री आवागमन को बेहतर बनाने और दोनों राज्यों के बीच संपर्क सुविधा मजबूत करने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के तहत लाई गई है।
यह परियोजना एकीकृत नियोजन एवं हितधारकों से परामर्श के जरिए बहु-स्तरीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाने पर केंद्रित है। इससे लोगों, माल और सेवाओं के आवागमन में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। दोनों राज्यों के तीन जिलों में फैली इस परियोजना से भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी। सरकार ने कहा, ‘कई ट्रैक वाली इस परियोजना से करीब 99 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिनकी कुल आबादी लगभग सात लाख है। इससे बेल्लारी किला और श्री कुमारस्वामी मंदिर जैसे पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा।’
यह मार्ग लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, इस्पात, कोयला, उर्वरक और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्त्वपूर्ण है। परियोजना से सालाना 1.62 करोड़ टन अतिरिक्त माल की ढुलाई क्षमता विकसित होगी। इस परियोजना से लॉजिस्टिक लागत घटेगी, तेल आयात में 1.32 करोड़ लीटर की कमी आएगी और 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन घटेगा, जो लगभग 0.27 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।