भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियां तेजी से गिरकर चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गईं। निजी सर्वे ने शुक्रवार को बताया कि इसका कारण बिक्री व उत्पादन में कम वृद्धि के अलावा पश्चिम एशिया के नए सिरे के तनाव से महंगाई का बढ़ता दबाव है।
एचएसबीसी के भारत के कंपोजिट पर्चेजिंग मैनेजर्स आउटपुट इंडेक्स (पीएमआई) जून के अंतिम आंकड़े 57.1 से गिरकर 54.3 पर आ गया। एसऐंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित इस आंकड़े के अनुसार जुलाई का आंकड़ा मार्च 2022 के बाद सबसे कम था। दरअसल, यह मार्च 2022 में भी 54.3 था। हालांकि सूचकांक 50 से अधिक रहा और यह लगातार 60वें महीने ऊपर रहा। दरअसल, सूचकांक में 50 का आंकड़ा वृद्धि व संकुचन को अलग करता है।
एसऐंडपी ग्लोबल ने विज्ञप्ति में कहा, ‘बाजार के मुश्किल हालात, प्रतिस्पर्धा का दबाव, ऑर्डर निरस्त होना, क्लाइंट की पूछताछ में कमी और जरूरी कच्चे माल की कमी के कारण वृद्धि पर असर पड़ा।’ फ्लैश पीएमआई महीने के फाइनल विनिर्माण, सर्विस और कंपोजिट पीएमआई डेटा का शुरुआती संकेत होता है और इसे आमतौर पर फाइनल पीएमआई आंकड़े से एक हफ्ते पहले जारी किया जाता है। यह आमतौर पर हर महीने मिलने वाले कुल पीएमआई सर्वे रिस्पॉन्स के लगभग 90 प्रतिशत पर आधारित होता है और सभी रिस्पॉन्स को फाइनल रिलीज में शामिल किया जाता है।
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया विनिर्माण पीएमआई जून की 54.2 की फाइनल रीडिंग से गिरकर जुलाई में 53.9 हो गया। फ्लैश इंडिया सर्विसेज पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक भी जून में 57.4 की फाइनल रीडिंग से गिरकर 17 महीने के निचले स्तर 53.1 पर आ गया।
एचएसबीसी की इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के कारण कंपनियों को सप्लाई-साइड शॉक के लंबे समय तक चलने से जुड़ी अनिश्चितताओं को संभालने के लिए बफर बनाने पड़ रहे हैं।’
सर्वे के अनुसार नए ऑर्डर में बढ़ोतरी लगभग साढ़े चार साल में सबसे कम रही और ऐतिहासिक मानकों के हिसाब से यह औसत रही। नए ऑर्डर और आउटपुट में बढ़ोतरी धीमी हुई। इसकी मुख्य वजह सेवा गतिविधियों में तेजी से कमी थी, यह 53 महीनों में सबसे धीमी रफ्तार पर आ गई। हालांकि, विनिर्माण क्षेत्र ने अपनी खोई हुई रफ्तार कुछ हद तक वापस हासिल की।