गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने कोड रिपॉजिटरी प्लेटफॉर्म गिटहब को निर्देश दिया है कि वह बिटचैट नामक पीयर-टु-पीयर मेसेजिंग प्लेटफॉर्म के सोर्स कोड को हटाए और उस तक पहुंच को निष्क्रिय करे।
गुरुवार देर रात जारी आदेश में आई4सी ने कहा कि बिटचैट ऐसा संचार माध्यम उपलब्ध कराता है जिसमें अनिवार्य यूजर पंजीकरण, मोबाइल नंबर सत्यापन या संचार का केंद्रीकृत रिकॉर्ड नहीं होता। एजेंसी के अनुसार, इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए संदेशों की वैध निगरानी, भेजने वाले की पहचान और जांच करना कठिन हो जाता है।
आदेश में कहा गया है कि यह प्लेटफॉर्म ब्लूटूथ आधारित विकेंद्रीकृत मेश नेटवर्क के माध्यम से आसपास मौजूद उपकरणों के बीच सीधे संचार की सुविधा देता है। ऐसे में दंगे, सार्वजनिक अशांति, आतंकवाद, संगठित अपराध या इंटरनेट सेवाएं बंद होने जैसी परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर गोपनीय समन्वय, वैध निगरानी से बचने और प्रशासनिक प्रतिबंधों को दरकिनार करने की आशंका बनी रहती है।
बिटचैट एक ऐसा मैसेजिंग सिस्टम है जो इंटरनेट के बिना कार्य करता है। इसमें ब्लूटूथ चालू होने पर मोबाइल फोन एक-दूसरे से जुड़ते हैं और संदेश 30 से 100 मीटर की दूरी पर मौजूद अन्य उपकरणों के माध्यम से क्रमशः आगे बढ़ते हुए प्राप्तकर्ता तक पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहते हैं, जिससे प्रेषक और प्राप्तकर्ता के अलावा कोई अन्य उपकरण संदेश नहीं पढ़ सकता।
एक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डोर्सी द्वारा विकसित इस ऐप पर भारत सरकार की नजर उस समय गई जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
सरकारी आदेश को सार्वजनिक करते हुए जैक डोर्सी ने एक्स पर लिखा कि भारत सरकार ‘बिटचैट जैसी तकनीकों को पसंद नहीं करती और उसे हटाना चाहती है।’
वहीं, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने सरकार के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश में यह तो कहा गया है कि रिपॉजिटरी में ऐसा कंटेंट है जो किसी कानून के तहत प्रतिबंधित है लेकिन यह नहीं बताया गया कि वह कौन-सी सामग्री है। संगठन का कहना है कि किसी तकनीक के संभावित दुरुपयोग की आशंका मात्र उसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का वैध आधार नहीं हो सकती। आईएफएफ ने टिप्पणी की कि यदि यही तर्क स्वीकार किया जाए, तो ‘टेलीफोन एक्सचेंज को भी सील किया जा सकता है।’
डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठन एसएफएलसीडॉटइन ने भी इस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की। संगठन के अनुसार, इस प्रकार की कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव है जो सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना तक पहुंच अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम 2009 में निर्धारित जवाबदेही और अभिलेख संधारण संबंधी प्रावधानों के विपरीत है।