भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ‘फ्रंट रनिंग’ ट्रेड के आरोपों पर शुक्रवार को ऐक्सिस म्युचुअल फंड के पूर्व चीफ डीलर वीरेश जोशी पर सात साल के लिए प्रतिभूति बाजार में पाबंदी लगा दी। उन पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अपने अंतिम आदेश में सेबी ने इस मामले से जुड़े 20 अन्य लोगों पर भी 3 से 7 साल तक का प्रतिबंध और 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया है। बाजार नियामक ने फरवरी 2023 में इस मामले में एक अंतरिम आदेश और कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सेबी ने अनुमान लगाया था कि 1 सितंबर, 2021 और 31 मार्च, 2022 के बीच फ्रंट-रनिंग के जरिये कुल अवैध कमाई लगभग 30.55 करोड़ रुपये थी, जिसे अंतरिम आदेश के बाद ज़ब्त कर लिया गया था। आदेश में कहा गया है कि अंतरिम आदेश के बाद से प्रतिबंध की जो अवधि बीत चुकी है, उसे अंतिम आदेश में दिए गए प्रतिबंध के निर्देशों के तहत कम किया जाएगा।
आदेश में कहा गया है कि जोशी ने अपने पद का फायदा उठाते हुए ऐक्सिस एमएफ के सौदों से जुड़ी ऐसी जानकारी (जो सार्वजनिक नहीं थी) अपने कुछ बाहरी लोगों को दी। इन लोगों ने दुबई से फ्रंट-रनिंग ट्रेड किए और ऐसी ऑफशोर कंपनियां बनाईं, जिनमें गैर-कानूनी तरीके से कमाया गया पैसा जमा किया गया।
ऐक्सिस एमएफ से आने वाले संभावित ऑर्डरों की जानकारी मिलने के बाद दुबई से ऑर्डर देने के लिए मारफतिया स्टॉक ब्रोकिंग और वुडस्टॉक ब्रोकिंग द्वारा उपलब्ध कराए गए ओपन डीलर इंटीग्रेटेड नेटवर्क (ओडीआईएन) टर्मिनल का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, शेयरों में ट्रेड करने के लिए दूसरों के नाम पर खोले गए खातों का इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान मिले सबूतों, जिनमें व्हाट्सऐप चैट भी शामिल हैं, से पता चला कि आरोपियों के बीच आपस में तालमेल के साथ बातचीत होती थी और वे जादूगर और एएसडीएफजी जैसे कोड नामों का इस्तेमाल करते थे। दिलचस्प यह है कि इस मामले में शामिल ऐसे कई अन्य लोगों के बारे में भी पता चला जो जोशी से जुड़ी कंपनियों के अलावा दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी हेरफेर की गतिविधियों में शामिल पाए गए।
सेबी के अंतिम आदेश में कहा गया है, म्युचुअल फंडों का प्रबंधन यूनिटधारकों के फायदे के लिए किया जाता है। स्कीम से जुड़ी गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल इस व्यवस्था को कमज़ोर करता है क्योंकि इसमें फंड के काम की गुणवत्ता और निवेशकों के हितों के बजाय निजी फायदे को प्राथमिकता मिलती है।
फ्रंट-रनिंग का मतलब है किसी बड़े लेनदेन, जिससे शेयर की कीमत पर असर पड़ सकता है, से पहले ही अपनी व्यक्तिगत ट्रेड पोजीशन लेना। यह तेजी से मुनाफा कमाने का तरीका है। चूंकि यह जानकारी सार्वजनिक नहीं होती और इससे म्युचुअल फंडों के यूनिटधारकों का भरोसा कमजोर होता है, इसलिए ऐसी गतिविधियों को धोखाधड़ी माना जाता है।
नियामक ने कहा कि 2023 के अंतरिम आदेश के निर्देशों के तहत जब्त पैसे को अवैध रूप से कमाए गए मुनाफे की वापसी की राशि माना जाएगा और इसे निवेशक सुरक्षा व शिक्षा कोष (आईपीईएफ) में हस्तांतरित कर दिया जाएगा।