facebookmetapixel
Advertisement
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी में 265 अंकों की बढ़तपश्चिम एशिया में हवाई हमलों से कच्चा तेल 7% उछला, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के करीब पहुंचाRBI के दखल और शेयर बाजार की तेजी से रुपया मजबूत, 13 जुलाई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर बंदSEBI के नए टोटल एक्सपेंस रेश्यो नियम लागू, फिर भी AMC ने बचाया मार्जिन, मुनाफा भी बढ़ाटाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की Q1 में दमदार शुरुआत, ब्रांडेड कारोबार और ग्रोथ पोर्टफोलियो से बिक्री में दोहरे अंक की बढ़तIRDAI ने प्रो टेक जनरल इंश्योरेंस को लाइसेंस दिया, पतंजलि-डीएस ग्रुप के मैग्मा जनरल इंश्योरेंस अधिग्रहण को भी मंजूरीसाइबर हमलों के बढ़ते खतरे से बैंक सतर्क, 5 साल में साइबर बीमा कवर दोगुना कर 10 करोड़ डॉलर तक पहुंचायायूपी में उद्योगों को बड़ी राहत, ₹1 के शुल्क पर शुरू होगा निर्माण; नया भवन विनियम जल्द होगा लागूSBI ने AT-1 बॉन्ड से जुटाए ₹4,691 करोड़, चालू वित्त वर्ष का पहला परपेचुअल बॉन्ड इश्यूडिग्री के बाद भी नौकरी की चुनौती, कंपनियों को नहीं मिल रहे तैयार उम्मीदवार

दो साल में खत्म हो सकता है रिफाइंड कॉपर का आयात : सतीश पई

Advertisement

यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने तांबे के बढ़ते आयात पर चिंता जताई थी

Last Updated- May 25, 2026 | 10:38 PM IST
Copper

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक सतीश पई का कहना है कि भारत अगले दो साल में आयातित रिफाइंड कॉपर पर अपनी निर्भरता खत्म कर सकता है, क्योंकि इस दौरान नई स्मेल्टिंग और रीसाइक्लिंग क्षमताएं चालू हो जाएंगी। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति की बिगड़ती स्थिति के बीच इस धातु के लिए आक्रामक विस्तार, एकीकरण और संसाधन-सुरक्षा रणनीति की रूपरेखा बताई।

कंपनी के वित्त वर्ष 2026 के नतीजों की घोषणा के बाद सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान पई ने कहा, ‘अगले दो साल के भीतर भारत आयातित तांबे पर निर्भर नहीं रहेगा।’

यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने तांबे के बढ़ते आयात पर चिंता जताई थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने 18 मई को रिपोर्ट दी थी कि भारत का तांबे का आयात बिल वित्त वर्ष 2017 के 22,856 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (फरवरी तक) में 1.03 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो एक दशक से भी कम समय में 350 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है।

पई ने कहा कि अदाणी का गुजरात कॉपर प्लांट, हिंडाल्को की अपनी विस्तार परियोजनाएं और एक नई कॉपर रीसाइक्लिंग इकाई शुरू होने से घरेलू आपूर्ति में कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।
हिंडाल्को 50-किलोटन का एक कॉपर रीसाइक्लिंग प्लांट लगा रही है और अपने कॉपर-5 प्रोजेक्ट के जरिये स्मेल्टिंग परिचालन का विस्तार कर रही है। यह गुजरात में कॉपर कैथोड के उत्पादन की एक नई विस्तार परियोजना है, जिसके लिए कंपनी ने हाल में सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की है।

पई ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मिंजारी कॉपर ब्लॉक में हिंडाल्को के घरेलू कॉपर खोज के प्रयासों को लेकर उत्साहजनक संकेत मिले हैं। यह कंपनी के इस इरादे का अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि वह भारत में ही लंबे समय तक कॉपर अयस्क की आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है। कंपनी ने 2023 में नीलामी के जरिये यह ब्लॉक हासिल किया था। हिंडाल्को देश के भीतर कॉपर अयस्क ब्लॉकों के लिए अतिरिक्त खोज लाइसेंस की नीलामी में भी हिस्सा ले रही है।

हालांकि भारत रिफाइंड कॉपर के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है, लेकिन पई ने माना कि अल्पावधि में देश को आयातित कॉपर कंसंट्रेट पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। फिर भी, हिंडाल्को का लक्ष्य है कि वह अगले पांच वर्षों में अपनी जरूरत का 20-25 प्रतिशत घरेलू अयस्क से ही पूरा करे। अभी यह हिस्सा हिंदुस्तान कॉपर की खदानों से मिलने वाले लगभग 10 फीसदी अयस्क से पूरा होता है।

Advertisement
First Published - May 25, 2026 | 10:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement