भारत में सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध पांच रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान सामूहिक रूप से 4.25 लाख से अधिक यूनिटधारकों को 2,566 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए। वित्त वर्ष 2026 के लिए इन रीट्स द्वारा कुल वितरण 8,900 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। पांच सूचीबद्ध रीट्स हैं- ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट, एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट, नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट (केआरटी), माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट और नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट। वित्त वर्ष 2025 में, चार रीट्स ने 2.64 लाख यूनिटधारकों को 6,070 करोड़ रुपये वितरित किए।
ब्लैकस्टोन और सत्व के समर्थन वाले केआरटी ने 716.6 करोड़ रुपये के साथ तिमाही वितरण के मामले में चार्ट में शीर्ष स्थान हासिल किया। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भी केआरटी भारत का सबसे बड़ा सूचीबद्ध रीट है। यह अगस्त 2025 में लिस्ट हुआ था, जिससे कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई।
केआरटी के बाद एम्बेसी और ब्रुकफील्ड का नंबर आया, जिन्होंने क्रमशः 616 करोड़ रुपये और 456.4 करोड़ रुपये का वितरण किया। एम्बेसी के वितरण में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि ब्रुकफील्ड का वितरण सालाना आधार पर 43.02 प्रतिशत बढ़ गया।
माइंडस्पेस का वितरण 430.5 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 9.7 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं नेक्सस ने 346.3 करोड़ रुपये के वितरण की घोषणा की, जो एक साल पहले के मुकाबले 14.29 प्रतिशत अधिक है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक, भारतीय रीट बाजार का कुल सकल परिसंपत्ति मूल्य (जीएवी) 2.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। 22 मई, 2026 तक, रीट क्षेत्र का संयुक्त बाजार पूंजीकरण 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।
ये पांचों रीट्स मिलकर पूरे भारत में 18.7 करोड़ वर्ग फुट से ज्यादा के ग्रेड ए ऑफिस और रिटेल रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का प्रबंधन करते हैं। अपनी शुरुआत से अब तक, इन्होंने यूनिटधारकों को कुल मिलाकर 31,700 करोड़ रुपये से ज्यादा बांटे हैं, जो भारत के पूंजी बाजार तंत्र में इनके बढ़ते महत्त्व को दिखाता है।
ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ और इंडियन रीट्स एसोसिएशन के चेयरमैन आलोक अग्रवाल ने कहा, ‘भारतीय रीट इंडस्ट्री के लिए यह एक और मील का पत्थर साबित होने वाला साल रहा है, जिसमें वितरण में जबरदस्त बढ़ोतरी, हाई-क्वालिटी रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का विस्तार और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी देखने को मिली है।’