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जो शेयर दौड़ रहा है, वही बनेगा हीरो! क्यों काम कर रहा बाजार का यह फॉर्मूला

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किस्मत के भरोसे निवेश का दौर खत्म, मोमेंटम, क्वालिटी और वैल्यू जैसे फैक्टर तय कर रहे हैं शेयर बाजार का नया खेल

Last Updated- January 20, 2026 | 9:14 AM IST
Stock Market Outlook

Factor Investing: शेयर बाजार में अब सिर्फ किस्मत के भरोसे निवेश करने का दौर पीछे छूटता जा रहा है। उतार-चढ़ाव, गिरावट और अनिश्चितता के इस दौर में निवेशक अब एक नए और समझदार रास्ते की ओर बढ़ रहे हैं। इस रास्ते का नाम है फैक्टर इन्वेस्टिंग। Edelweiss Mutual Fund की ताजा रिपोर्ट बताती है कि निवेशक अब ऐसे शेयर चुन रहे हैं जिनमें ताकत हो, भरोसा हो और मुश्किल समय में टिकने की क्षमता हो। यही वजह है कि यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बाजार में अपनी जगह मजबूत कर रहा है

Factor Investing: क्रिकेट की तरह चुने जा रहे हैं शेयर

रिपोर्ट में Factor Investing को क्रिकेट टीम से समझाया गया है। जैसे एक अच्छी टीम में फॉर्म में चल रहा बल्लेबाज, भरोसेमंद खिलाड़ी और संकट में टिकने वाला खिलाड़ी जरूरी होता है, वैसे ही शेयर बाजार में भी हर शेयर एक जैसा नहीं होता। कुछ शेयर तेजी से ऊपर जाते हैं, कुछ मजबूत होते हैं और कुछ कम गिरते हैं। इन्हीं खूबियों को मोमेंटम, क्वालिटी, ग्रोथ, वैल्यू और लो वोलैटिलिटी कहा जाता है। निवेशक अब इन्हीं खूबियों को देखकर पैसा लगा रहे हैं

कोविड के बाद बदली निवेशकों की सोच

साल फैक्टर इन्वेस्टिंग में निवेश (AUM)
दिसंबर 2020 ₹482 करोड़
दिसंबर 2022 ₹6,863 करोड़
दिसंबर 2024 ₹38,919 करोड़
दिसंबर 2025 ₹50,132 करोड़

कोविड के बाद निवेशकों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में जहां फैक्टर इन्वेस्टिंग में बहुत कम पैसा लगा था, वहीं 2025 के अंत तक इसमें निवेश बढ़कर करीब 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि लोग अब बिना सोचे-समझे नहीं, बल्कि नियम और रणनीति के साथ निवेश करना चाहते हैं

मोमेंटम बना बाजार का राजा

फैक्टर 10 साल का औसत सालाना रिटर्न
मोमेंटम (Momentum) 25%
वैल्यू (Value) 21%
क्वालिटी (Quality) 17%
ग्रोथ (Growth) 17%
लो वोलैटिलिटी (Low Volatility) 16%

पिछले 10 सालों के आंकड़े बताते हैं कि मोमेंटम फैक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। यानी जो शेयर पहले से दौड़ रहे होते हैं, वही आगे भी दौड़ते हैं। हालांकि रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि हर साल एक ही फैक्टर आगे नहीं रहता। कभी वैल्यू चमकती है, कभी क्वालिटी, तो कभी ग्रोथ। यही वजह है कि समझदार निवेशक एक से ज्यादा फैक्टर को साथ लेकर चलते हैं

गिरावट में ढाल, तेजी में रफ्तार

बाजार की स्थिति कौन सा फैक्टर बेहतर
तेजी वाला बाजार मोमेंटम, ग्रोथ
गिरावट का समय लो वोलैटिलिटी, क्वालिटी
रिकवरी का दौर वैल्यू, मोमेंटम
ज्यादा उतार-चढ़ाव मल्टी-फैक्टर रणनीति

रिपोर्ट बताती है कि फैक्टर इन्वेस्टिंग सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि नुकसान से बचाने के लिए भी काम आती है। जब बाजार गिरता है, तब लो वोलैटिलिटी और क्वालिटी जैसे फैक्टर नुकसान को थाम लेते हैं। वहीं जब बाजार में तेजी आती है, तो मोमेंटम और ग्रोथ निवेशकों को रफ्तार देते हैं। यही संतुलन इसे खास बनाता है

2026 में और मजबूत हो सकता है Factor Investing का यह खेल

Edelweiss की रिपोर्ट का मानना है कि साल 2026 फैक्टर इन्वेस्टिंग के लिए और बेहतर हो सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी, कंपनियों की कमाई में सुधार और मजबूत आर्थिक माहौल से बाजार को सहारा मिल सकता है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि एक ही फैक्टर पर दांव लगाने के बजाय कई फैक्टर को मिलाकर निवेश करना ज्यादा सुरक्षित रास्ता हो सकता है।

फैक्टर इन्वेस्टिंग क्या है? ये कैसे काम करती है?

फैक्टर इन्वेस्टिंग शेयर बाजार में निवेश करने का एक स्मार्ट तरीका है। इसमें शेयर किस्मत से नहीं चुने जाते, बल्कि कुछ तय गुणों के आधार पर चुने जाते हैं। इन गुणों को ही ‘फैक्टर’ कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो निवेशक ऐसे शेयर चुनते हैं जो मजबूत हों, तेजी दिखा रहे हों या मुश्किल समय में कम गिरते हों।

फैक्टर इन्वेस्टिंग में सबसे पहले बाजार के शेयरों को अलग-अलग गुणों के हिसाब से देखा जाता है। कुछ शेयर ऐसे होते हैं जो लगातार ऊपर जा रहे होते हैं, इन्हें मोमेंटम कहा जाता है। कुछ कंपनियां मजबूत होती हैं, जिन पर कर्ज कम होता है और कमाई स्थिर रहती है, इन्हें क्वालिटी फैक्टर में रखा जाता है। जो कंपनियां तेजी से बढ़ रही होती हैं, वे ग्रोथ फैक्टर में आती हैं। जिन शेयरों के दाम अभी सस्ते होते हैं, उन्हें वैल्यू फैक्टर कहा जाता है। वहीं जो शेयर बाजार गिरने पर भी ज्यादा नहीं टूटते, वे लो वोलैटिलिटी फैक्टर में आते हैं।

इसके बाद निवेशक या फंड मैनेजर इन फैक्टरों के हिसाब से शेयर चुनते हैं और पोर्टफोलियो बनाते हैं। जब बाजार में तेजी होती है, तब मोमेंटम और ग्रोथ फैक्टर ज्यादा फायदा देते हैं। जब बाजार गिरता है, तब क्वालिटी और लो वोलैटिलिटी फैक्टर नुकसान को कम करते हैं। कई बार एक ही फैक्टर पर भरोसा करने के बजाय कई फैक्टरों को मिलाकर निवेश किया जाता है, ताकि जोखिम कम रहे और रिटर्न बेहतर हो सके।

सरल भाषा में कहें तो फैक्टर इन्वेस्टिंग निवेश का ऐसा तरीका है, जिसमें दिमाग से, नियमों के साथ और सोच-समझकर शेयर चुने जाते हैं, ताकि लंबे समय में मुनाफा कमाया जा सके।

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First Published - January 20, 2026 | 8:53 AM IST

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