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Budget 2026: क्यों टैक्स एक्सपर्ट न्यू टैक्स रिजीम में अभी और सुधार की मांग कर रहे हैं?

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एक्सपर्ट ने बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन और सीमित कटौतियों पर राहत बढ़ाए जाने के सुझाव दिए हैं जिससे मिडिल क्लास और सीनियर सिटीजन को फायदा मिले

Last Updated- January 19, 2026 | 9:31 PM IST
tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

न्यू टैक्स रिजीम धीरे-धीरे कई टैक्सपेयर्स की पसंदीदा बन गई है, क्योंकि यह आसान है और टैक्स की दरें भी कम हैं। लेकिन जैसे-जैसे कमाई बढ़ती है और स्वास्थ्य, घर और बच्चों की पढ़ाई जैसे खर्चे बढ़ते जाते हैं, तो 12 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई वालों को इस व्यवस्था में ज्यादा राहत नहीं मिलती। मिडिल क्लास को इससे खास फायदा नहीं होता। 

अब बजट 2026 आने वाला है, तो एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सरकार इस व्यवस्था को कुछ टारगेटेड राहत देकर और आकर्षक बना सकती है। 

स्टैंडर्ड डिडक्शन: छोटा बदलाव, बड़ा मनोवैज्ञानिक असर

10 लाख से 15 लाख रुपये कमाने वाले सैलरीड लोगों को न्यू टैक्स रिजीम में अभी 12 लाख रुपये तक अच्छी राहत मिलती है। हालांकि, सेक्शन 87A की बढ़ी हुई छूट और 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन से भी कुछ लाभ मिलता है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट और 1 Finance में पर्सनल टैक्स की हेड नियति शाह कहती हैं, “वित्तवर्ष 26 के लिए न्यू टैक्स रिजीम ने 12 लाख रुपये तक साफ-साफ राहत दी है।” 

लेकिन वे कहती हैं कि जैसे ही कमाई 12 लाख रुपये से ऊपर जाती है, फायदा तेजी से कम हो जाता है। उदाहरण देते हुए शाह बताती हैं कि 15 लाख रुपये कमाई वाले सैलरीड लोगों का टैक्सेबल इनकम स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद करीब 14.25 लाख रुपये रह जाता है, जिस पर टैक्स लगभग 97,500 रुपये बनता है।

वे कहती हैं, “अगर बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1.25 लाख रुपये कर दिया जाए, तो करीब 7,800 रुपये तुरंत बचत होगी ।” रकम ज्यादा बड़ी नहीं लगती, लेकिन शाह के मुताबिक यह सीधे सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम या स्कूल के खर्चों को कवर कर सकती है और घर की नकदी बेहतर तरीके से चल सकती है।

ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, चेन्नई के सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर विश्वनाथन अय्यर कहते हैं “15 लाख रुपये कमाई वाले के लिए अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन 1 लाख रुपये कर दिया जाए या हेल्थ इंश्योरेंस पर सीमित डिडक्शन मिले, तो टैक्स में करीब 4,000 रुपये की कमी आ सकती है।”

वे मानते हैं कि छोटे-छोटे लेकिन सही जगह पर दिए गए डिडक्शन 13 से 20 लाख रुपये की कमाई वाले लोगों के लिए टैक्स को काफी कम कर सकते हैं, जहां अभी यह व्यवस्था कम फायदेमंद लगती है।

Also Read: राहत अब काफी नहीं! एक्सपर्ट की मांग: बजट में प्री-फंडेड क्लाइमेट इंश्योरेंस पॉलिसी पर सोचे सरकार

असली खर्चों के लिए सीमित डिडक्शन फिर से लाएं

एक्सपर्ट्स की राय है कि अगर डिडक्शन वापस लाए जाएं, तो वे सीमित, कैप्ड और सिर्फ जरूरी खर्चों पर होने चाहिए, टैक्स बचाने की प्लानिंग के लिए नहीं।

शाह तीन मुख्य से बताती हैं: स्वास्थ्य, घर और रिटायरमेंट। वे हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक की कैप्ड डिडक्शन की सलाह देती हैं, क्योंकि मेडिकल महंगाई हर साल 12-14 फीसदी के आसपास रहती है।

वे कहती हैं, “हेल्थ इंश्योरेंस पर कैप्ड डिडक्शन से लोग ज्यादा कवरेज लेंगे और अचानक आने वाले बड़े खर्चों से घर की सुरक्षा होगी।” 

शहरी परिवारों के लिए घर का खर्च भी बहुत बड़ा है। शाह सुझाव देती हैं कि HRA या होम लोन के ब्याज से जुड़ी एक साधारण फ्लैट डिडक्शन दी जा सकती है। वो आगे कहती हैं, “रिटायरमेंट बचत के लिए एक ही कैप्ड डिडक्शन लाने से लंबे समय की बचत को बढ़ावा मिलेगा, बिना ओल्ड सेक्शन 80C को पूरी तरह वापस लाए।” 

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी के ट्रेजरर किंजल भुटा भी सीमित डिडक्शन के पक्ष में हैं, जैसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, PPF में निवेश और सेविंग्स बैंक के ब्याज पर। वे कहते हैं कि ये सब जरूरी जिंदगी की चीजें हैं और न्यू रिजीम की आसानी को खराब नहीं करेंगी।

सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर और टैक्सेशन हेड SR पाटणीक भी ऐसे ही कदमों का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं कि सरकार “बढ़ी हुई साधारण डिडक्शन” ला सकती है, जैसे सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज पर ज्यादा डिडक्शन, और 15 लाख रुपये से ऊपर 30 फीसदी टैक्स स्लैब की सीमा को बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है।

सीनियर सिटीजन के लिए उम्र के हिसाब से राहत जरूरी

न्यू टैक्स रिजीम सीनियर सिटीजन के लिए कम आकर्षक है, क्योंकि इसमें उनकी कमाई के पैटर्न को ध्यान नहीं दिया गया। रिटायर्ड लोग ज्यादातर ब्याज और पेंशन से चलते हैं, लेकिन इस व्यवस्था में इन पर कोई खास राहत नहीं है।

अय्यर कहते हैं, “बढ़ी हुई बेसिक छूट और ब्याज पर राहत न होने से रिटायर्ड लोगों के लिए यह व्यवस्था सख्त पड़ती है।” 

सिंघानिया एंड कंपनी की पार्टनर रितिका नैयर कहती हैं कि इस रिजीम में “ब्याज और स्वास्थ्य की सुरक्षा” खत्म हो गई है, जो रिटायर्ड लोगों के लिए बहुत जरूरी होती है। वे सुझाव देती हैं कि “सोशल सिक्योरिटी डिडक्शन” या उम्र के आधार पर बेसिक छूट दी जाए, खासकर 75 साल से ऊपर वालों के लिए। पाटणीक कहते हैं कि सेक्शन 80TTB को न्यू रिजीम में शामिल किया जाए और इसकी सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये या 1 लाख रुपये कर दी जाए, जो बड़ा फर्क डाल सकता है।

लंबी अवधि की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए प्रोत्साहन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट 2026 में प्रोडक्ट-बेस्ड डिडक्शन की बजाय रिजल्ट-बेस्ड इंसेंटिव्स पर फोकस होना चाहिए। भुटा कहते हैं कि एक कैप्ड रिटायरमेंट डिडक्शन से लोग अनुशासित बचत करेंगे।

शाह कहती हैं कि “रिटायरमेंट, स्वास्थ्य और पहली बार घर खरीदने के लिए टारगेटेड इंसेंटिव्स” जिम्मेदार फाइनेंशियल व्यवहार को बढ़ावा देंगे, बिना नियमों को मुश्किल किए।

प्रोफेसर अय्यर जोर देते हैं कि ऐसे इंसेंटिव्स को सैलरी या बैंक रिपोर्टिंग में ही शामिल कर दिया जाए, ताकि लोग धीरे-धीरे अच्छी आदतें बना लें और आखिरी समय पर टैक्स बचाने की कोशिश न करें।

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First Published - January 19, 2026 | 9:28 PM IST

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