दैनिक उपभोक्ता वस्तु (एफएमसीजी) उद्योग के लिए चुनौती भरे दो साल के बावजूद आईटीसी का मानना है कि वह बाजार के मुकाबले ज्यादा तेजी से वृद्धि कर सकती है। वीडियो इंटरव्यू में आईटीसी के कार्यकारी निदेशक तथा खाद्य और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों के कारोबार के प्रभारी हेमंत मलिक ने ईशिता आयान दत्त को बताया कि यह वृद्धि कई वजहों से होगी जिनमें चुनिंदा अधिग्रहण से लेकर प्रीमियमाइजेशन शामिल है। इस वृद्धि को कर कटौती के बाद दिखी बहाली से मदद मिलेगी। संपादित अंश …
पिछले दो साल में काफी अधिग्रहण हुए हैं – प्रमुख ऑर्गेनिक आहार से लेकर फ्रोजन और खाने के लिए तैयार वाली श्रेणी तक में। आईटीसी फूड्स की वृद्धि की रणनीति में विलय और अधिग्रहण कितना अहम है?
कंपनी के तौर पर पहले हम अधिग्रहण को लेकर झिझकते थे। हमारा मुख्य ध्यान शुरू से ही ब्रांड बनाने पर था। हालांकि चेयरमैन (संजीव पुरी) की आईटीसी नेक्स्ट रणनीति के साथ हम अधिग्रहण के मौकों का सक्रियता से आकलन करते रहे हैं। अधिग्रहणों के प्रति हमारा दृष्टिकोण तीन रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है – भविष्य के लिए तैयार पोर्टफोलियो का निर्माण, उभरते उपभोक्ता रुझानों के अनुरूप अधिक वृद्धि वाली श्रेणियों पर ध्यान केंद्रित करना और रणनीतिक क्षमताओं का अधिग्रहण करना।
खान-पान कारोबार के मामले में अधिग्रहण वृद्धि के हमारे कार्यक्रम का अहम हिस्सा होगा, लेकिन अकेला यही नहीं होगा। हम आज के और आगे के लिए आंतरिक संसाधनों और विलय- अधिग्रहण दोनों ही तरीकों से भविष्य का पोर्टफोलिया बना रहे हैं।
लेकिन आप बड़े अधिग्रहणों से दूर रहे हैं …
हमने जो अधिग्रहण किए हैं, उन्हें कालांतर में बढ़ाया जाएगा। हमने देखा है कि खान-पान उद्योग में किस तरह कुछ सौदे काफी ज्यादा मूल्यांकन पर हुए हैं। हम किसी भी कीमत पर खरीद नहीं करना चाहेंगे। हम केवल उन्हीं मूल्यांकनों पर निवेश करेंगे जो हमें सही लगेंगे, क्योंकि आखिर में इसी से शेयर धारकों के लिए मूल्य लृजित होता है। हमारा ध्यान हमेशा वैल्यू बढ़ाने वाले अधिग्रहणों पर रहा है।
हालांकि अधिग्रहणों ने आपका पोर्टफोलियो बढ़ाया है, लेकिन क्या खान-पान कारोबार में आईटीसी की वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई है?
पिछले दो साल एफएमसीजी उद्योग के लिए चुनौती भरे रहे हैं और वॉल्यूम 3 से 5 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। हम बाजार दर या उससे ज्यादा दर से बढ़े हैं और वृद्धि की रफ्तार निश्चित रूप से धीमी नहीं पड़ी है। हम देश की प्रमुख पैकेज्ड फूड कंपनियों में से एक हैं। तथापि हमारी महत्त्वाकांक्षाएं ऊंची हैं। हमारा मकसद साफ है। हमारा लक्ष्य उद्योग की तुलना में तेजी से बढ़ना है।
क्या आप उपभोग में बढ़ोतरी देख रहे हैं?
हम तीसरी तिमाही से उपभोग में बढ़ोतरी देख रहे हैं। कई श्रेणियों जीएसटी दरें 18 से घटाकर 5 प्रतिशत की जा चुकी हैं। खान-पान श्रेणी में ज्यादातर कटौती मौजूदा 12 से घटकर 5 प्रतिशत तक हुई है। यह लाभ कीमतों में कमी के जरिये उपभोक्ताओं को दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं के कुल खर्च में कमी आई है।
शहरी उपभोग कुछ समय से चिंता का विषय रहा है। अभी क्या हाल है?
मेरा मानना है कि सिंडिकेटेड सर्वे के आंकड़े अहम तथा सबसे तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स चैनल को नहीं पकड़ पाते हैं, जिससे सही बात सामने नहीं आती और वृद्धि के कम आंकड़े दिखते हैं। हम तीसरी तिमाही से हर श्रेणी में शहरी उपभोग में सुधार के संकेत देख रहे हैं।
कंपनी के लिए प्रीमियमाइजेशन ध्यान दिए जाने वाला प्रमुख क्षेत्र रहा है। क्या इस श्रेणी के बढ़ने की संभावना है?
प्रीमियमाइजेशन जारी रहेगा। उद्योग की भाषा में औसत से लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा कीमत वाले उत्पादों को प्रीमियम माना जाता है। लेकिन सुपर प्रीमियम श्रेणी भी उभर रही है, जिसकी कीमत लगभग 50 प्रतिशत ज्यादा होती है। यह सुपर प्रीमियम क्षेत्र आईटीसी में हमारे लिए ध्यान दिए जाने वाला प्रमुख क्षेत्र बनता जा रहा है, खास तौर पर क्विक कॉमर्स की वृद्धि के साथ जो पहुंच की क्षमता को बढ़ा रहा है।