facebookmetapixel
Advertisement
केसरिया जर्सी पर विवाद, भारतीय हॉकी की नीली पहचान पर बहसट्रंप का दावा: युद्ध खत्म करने के समझौते की रूपरेखा तैयार, फिलहाल हमले टलेयुवाओं पर पीएम मोदी का फोकस, नशा-मुक्त भारत अभियान के तहत लाखों युवाओं को दिलाई नशा विरोधी शपथअमेरिका में दवा बनाने की जल्दी नहीं, टैरिफ के खतरे के बावजूद भारत में ही रहेगा कंपनियों का विनिर्माणउदारीकरण के 35 साल: 1991 में सेंसेक्स में थीं जो 30 कंपनियां, उनमें अब 7 ही बचीं; बेंचमार्क सूचकांक में आया बड़ा बदलावबिज़नेस स्टैंडर्ड सर्वेक्षण: रीपो दर में बदलाव के नहीं आसार, अगली बैठक में हो सकता है बड़ा फैसलानिवेश में जोरदार उछाल या आंकड़ों का भ्रम? 4 परमाणु परियोजनाओं ने बदल दी पूरी तस्वीर45% घटा हाईवे निर्माण, पश्चिम एशिया संकट और बिटुमन की कमी बनी बड़ी वजहनई ईपीएफ योजना में बदला कायदा क्या है नुकसान और क्या है फायदा?IT Funds: जुलाई की रिकॉर्ड तेजी के बीच निवेशकों ने निकाला पैसा, मुनाफावसूली या रणनीति में बदलाव

Cabinet Decision: SIDBI को ₹5,000 करोड़ का इक्विटी सपोर्ट, MSME को मिलेगा सस्ता कर्ज

Advertisement

Cabinet Decision: तीन चरणों में होगा पूंजी निवेश, 25.74 लाख नए MSME लाभार्थी जुड़ने की उम्मीद

Last Updated- January 21, 2026 | 3:15 PM IST
cabinet meeting
Representational Image

Cabinet Decision: केंद्रीय कैबिनेट ने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मिलने वाले कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी और उन्हें कम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (21 जनवरी) को हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई। सरकार की ओर से यह इक्विटी कैपिटल वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए SIDBI में डाली जाएगी। यह निवेश तीन चरणों में किया जाएगा।

तीन चरणों में होगा निवेश

कैबिनेट फैसले के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3,000 करोड़ की इक्विटी, जो 31 मार्च 2025 को तय बुक वैल्यू ₹568.65 प्रति शेयर के आधार पर होगी। वित्त वर्ष 2026-27 में ₹1,000 करोड़ की इक्विटी, संबंधित वर्ष की बुक वैल्यू पर और वित्त वर्ष 2027-28 में ₹1,000 करोड़ की इक्विटी, उस समय की बुक वैल्यू पर होगी।

MSME को क्या होगा फायदा?

सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस पूंजी निवेश के बाद SIDBI की फाइनैंशल क्षमता बढ़ेगी और वह ज्यादा MSMEs को कर्ज दे सकेगा। इसके अंतर्गत MSMEs को FY25 के अंत तक 76.26 लाख वित्तीय सहायता मिलेगी। FY28 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 102 लाख MSMEs हो जाएगी। यानी, करीब 25.74 लाख नए MSME लाभार्थी जुड़ेंगे।

MSME मंत्रालय के आंकड़ों (30 सितंबर 2025 तक) के अनुसार, देश में 6.90 करोड़ MSMEs करीब 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं। औसतन एक MSME से 4.37 लोगों को रोजगार मिलता है। इस आधार पर, 25.74 लाख नए MSMEs जुड़ने से करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है।

SIDBI को क्यों पड़ी पूंजी की जरूरत?

सरकार ने बताया कि आने वाले वर्षों में SIDBI का फोकस डायरेक्टेड क्रेडिट, डिजिटल और बिना गारंटी वाले लोन, और स्टार्टअप्स के लिए वेंचर डेट जैसे उत्पादों पर बढ़ेगा। इन सभी गतिविधियों से SIDBI की रिस्क-वेटेड एसेट्स (RWA) में तेजी से बढ़ोतरी होगी। ऐसे में बैंक को अपने कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी।

CRAR और क्रेडिट रेटिंग पर असर

SIDBI की क्रेडिट रेटिंग के लिए एक मजबूत CRAR बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार का कहना है कि इस इक्विटी निवेश से हाई स्ट्रेस (High Stress Scenario) में भी CRAR 10.50% से ऊपर रहेगा। इससे SIDBI को बाजार से कम ब्याज दर पर संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी और MSMEs को भी सस्ते और प्रतिस्पर्धी दरों पर कर्ज मिल सकेगा।

सरकार का मानना है कि यह फैसला MSME सेक्टर को मजबूती देगा, जॉब जेनेरेशन को बढ़ावा मिलेगा, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को पूंजी की कमी से उबारेगा, और समग्र आर्थिक ग्रोथ को रफ्तार देगा।

Advertisement
First Published - January 21, 2026 | 3:05 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement