मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के तहत लोन बुक में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए, जीरोधा (Zerodha) के फाउंडर नितिन कामथ ने स्टॉक ब्रोकिंग फर्मों के रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बाजार में तेज गिरावट आती है, तो इससे “सिंक्रोनाइज़्ड लिक्विडेशन” यानी एक साथ बड़े पैमाने पर सौदों की बिक्री हो सकती है।
19 जनवरी तक MTF का बकाया मूल्य रिकॉर्ड 1.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा सालाना आधार पर करीब 50 फीसदी बढ़ा है और पिछले चार वर्षों में चार गुना से ज्यादा हो चुका है। MTF लोन बुक ने सितंबर 2025 में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया था।
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मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) निवेशकों को अपने ब्रोकर से उधार लेकर शेयर खरीदने की सुविधा देता है। इसमें निवेशक को सौदे की कुल राशि का केवल एक हिस्सा पहले जमा करना होता है, जबकि बाकी रकम ब्रोकर ब्याज पर फाइनेंस करता है।
रेगुलेटरी सख्ती और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम पर लगाई गई पाबंदियों के बाद, हाल के वर्षों में कई डिस्काउंट ब्रोकर्स ने अतिरिक्त कमाई के स्रोत के तौर पर MTF को ज्यादा बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।
नितिन कामथ का कहना है कि MTF में रिस्क मैनेजमेंट, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) की तुलना में काफी ज्यादा जटिल है। इसकी वजह यह है कि ग्राहक लेवरेज लेकर महीनों तक पोजिशन होल्ड कर सकते हैं और MTF 1,300 से ज्यादा शेयरों में उपलब्ध है, जिनमें कई कम लिक्विड (कम कारोबार वाले) शेयर भी शामिल हैं।
कामथ ने सोशल मीडिया पर लिखा, “स्ट्रक्चरल समस्या यह है कि भारतीय शेयरों में बाजार चढ़ते समय लिक्विडिटी ठीक रहती है, लेकिन गिरावट के दौरान यह लगभग खत्म हो जाती है। शॉर्ट-सेलिंग (SLB) की सीमित मौजूदगी के कारण बाजार पलटते समय कोई प्राकृतिक खरीदार नहीं होता। ऐसे में जबरन लिक्विडेशन खुद को और मजबूत करता जाता है, खासकर नॉन-F&O शेयरों में।”
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उन्होंने लेयर्ड लेवरेज के जोखिम की ओर भी इशारा किया। इसमें गिरवी रखे गए शेयरों के आधार पर निवेशक अपने एक्सपोजर को कई गुना बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, करीब 1 लाख रुपये के शेयरों को गिरवी रखकर निवेशक 5 लाख रुपये तक की MTF पोजिशन बना सकता है।
ऐसी स्थिति में, जब बाजार में गिरावट आती है, तो नुकसान भी कई गुना बढ़ जाता है, जिससे निवेशकों पर जोखिम और दबाव दोनों बढ़ जाते हैं।
हालांकि सेबी ने MTF एक्सपोजर को ब्रोकर की नेटवर्थ और उधार के 50 फीसदी तक सीमित कर रखा है ताकि सिस्टमेटिक रिस्क को काबू में रखा जा सके, लेकिन कामथ का कहना है कि ये सुरक्षा उपाय ज्यादातर सिस्टम को ब्रोकर फेल होने से बचाते हैं, न कि ब्रोकर को ग्राहकों के डिफॉल्ट से।
उन्होंने आगे कहा, “MTF के बड़े पैमाने पर बढ़ने के बाद से हमने 2008, 2015 या कोविड जैसे बड़े झटके नहीं देखे हैं। जब ऐसा कोई बड़ा इवेंट आएगा, तो अराजक स्थिति पैदा होगी। इसलिए नहीं कि कोई ब्रोकर फेल होगा, बल्कि इसलिए कि कम लिक्विड बाजार में जबरन बिकवाली एक के बाद एक बढ़ती चली जाएगी।”