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Budget 2026: PSU के भरोसे कैपेक्स को रफ्तार देने की तैयारी, अच्छी कमाई के लिए ब्रोकरेज की पसंद बने ये 6 सेक्टर

FY26 में टैक्स वसूली कमजोर रह सकती है, जिससे सरकारी खर्च पर दबाव बढ़ेगा, जबकि FY27 में PSU कैपेक्स और चुनिंदा सेक्टरों के सहारे ग्रोथ को सपोर्ट देने की तैयारी है

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- January 21, 2026 | 10:10 AM IST

Budget 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था एक नाजुक दौर से गुजर रही है। गिरावट थमती हुई जरूर दिख रही है, लेकिन तेजी अभी भी नदारद है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अब मजबूत नीतिगत समर्थन नहीं मिला, तो यह सुधार टिक नहीं पाएगा। पिछले एक साल में खपत कमजोर पड़ी है, निवेश की रफ्तार धीमी है और निर्यात भी सुस्त बना हुआ है। टैक्स कटौती से कुछ हिस्सों में राहत जरूर मिली, लेकिन पूरी अर्थव्यवस्था में जान नहीं आ सकी। ऐसे में सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है।

FY26: टैक्स कटौती का दबाव, खर्च पर लग सकती है लगाम

नुवामा का कहना है कि FY26 में टैक्स वसूली उम्मीद से काफी कम रह सकती है। अर्थव्यवस्था की धीमी चाल और कमजोर कैपिटल गेंस के चलते करीब तीन लाख करोड़ रुपये का झटका लग सकता है। राजकोषीय घाटे को 4.4 फीसदी पर बनाए रखने के लिए सरकार को खर्च घटाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर पूंजीगत खर्च और विकास से जुड़े खर्च पर पड़ेगा। यानी FY26 में सरकारी खर्च से ग्रोथ को बड़ा सहारा मिलना मुश्किल है।

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Budget 2026: क्या FY27 में खत्म होगा वित्तीय दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक FY27 में सरकार आगे और सख्ती करने से बच सकती है। राजकोषीय घाटा 4.4 फीसदी पर ही रखा जा सकता है। इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ा दबाव कम होगा। अगर जीएसटी सेस हटाया गया, तो इससे अर्थव्यवस्था को जीडीपी के करीब 0.2 फीसदी के बराबर राहत मिल सकती है। टैक्स कलेक्शन में भी सुधार की उम्मीद है, जिससे सरकार के पास खर्च बढ़ाने की थोड़ी गुंजाइश बनेगी।

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निवेश बढ़ाने के लिए बड़े कदम संभव

नुवामा का मानना है कि सरकार बजट के बाहर भी निवेश को बढ़ावा दे सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को ज्यादा कैपेक्स करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, क्योंकि इनका निवेश कई सालों से सुस्त है। कम आय वाले लोगों को सहारा देने के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना लाई जा सकती है। FY26 में जहां सरकार ने खपत बढ़ाने पर जोर दिया, वहीं FY27 में फोकस निवेश पर हो सकता है। नियमों में ढील और कारोबार को आसान बनाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। सेमीकंडक्टर, एआई, रोबोटिक्स और निर्यात जैसे सेक्टर सरकार की प्राथमिकता में रह सकते हैं।

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बाजार को राहत सीमित, सतर्कता जरूरी

शेयर बाजार के लिहाज से FY27 का बजट उम्मीद तो जगाएगा, लेकिन बड़ी राहत देने में नाकाम रह सकता है। नुवामा के अनुसार कंपनियों की कमाई पर दबाव बना रहेगा और मुनाफे के मार्जिन घट सकते हैं। इसी वजह से निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल डिफेंसिव रणनीति अपनाना बेहतर माना जा रहा है।

पसंदीदा सेक्टर: टेलीकॉम, इंटरनेट, आईटी, कंज्यूमर, सीमेंट, केमिकल्स

कम पसंद: बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, इंडस्ट्रियल्स, ऑटो, पावर

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : January 21, 2026 | 9:49 AM IST