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Budget 2026: बीमा उद्योग ने कर लाभ और प्रीमियम सीमा बढ़ाने की मांग की, सुरक्षा और स्वास्थ्य पॉलिसियों पर फोकस

बीमाकर्ताओं ने यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) के लिए कर मुक्त मेच्योरिटी की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की भी मांग की है

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आतिरा वारियर   
Last Updated- January 20, 2026 | 11:21 PM IST

बीमा प्रीमियम पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तर्कसंगत बनाए जाने के बाद बीमा उद्योग की नजर अब सुरक्षा और स्वास्थ्य पॉलिसियों पर आयकर लाभ दिए जाने पर है। बीमा उद्योग ने महंगी बीमा पॉलिसियों की मेच्योरिटी से होने वाली आमदनी पर कर लगाने की प्रीमियम सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की है। बीमाकर्ताओं ने यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) के लिए कर मुक्त मेच्योरिटी की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की भी मांग की है।

बंधन लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ सतीश्वर बी ने कहा, ‘जीएसटी छूट की वजह से जीवन बीमा अधिक किफायती और सुलभ बन गया है। हमें उम्मीद है कि इस साल के बजट में उस गति को जारी रखा जाएगा। दोनों कर व्यवस्थाओं के तहत सुरक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं के लिए बेहतर कर लाभ अधिक परिवारों को कवर करने में मदद कर सकते हैं। हम पेंशन उत्पादों के लिए मजबूत समर्थन और पारंपरिक योजनाओं के समान यूलिप के लिए प्रीमियम सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की भी उम्मीद करते हैं। सरल, समावेशी सुधार भारत के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने और ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ की दिशा में प्रगति को तेज करने में बहुत आगे जा सकते हैं।’

बीमाकर्ता महंगी बीमा पॉलिसियों की मेच्योरिटी पर कर छूट की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की भी मांग कर रहे हैं। फरवरी 2023 से सरकार ने यूलिप को छोड़कर 5 लाख रुपये से अधिक सालाना प्रीमियम वाली परंपरागत जीवन बीमा पॉलिसियों से होने वाली आमदनी को कर के दायरे में ला दिया है।

बहरहाल सामान्य और स्वास्थ्य बीमाकर्ता धारा 80डी के तहत आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। इस समय छूट की सीमा 60 साल से कम उम्र के लोगों की व्यक्तिगत बीमा पर 25,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा 50,000 रुपये निर्धारित किया है।

इसके अलावा उद्योग जलवायु संबंधी जोखिम बीमा को मजबूत करने के उपायों की भी तलाश कर रहा है। इफ्को-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ सुब्रत मंडल ने कहा, ‘ये सीमाएं कई साल पहले निर्धारित की गई थीं और अब इलाज के बढ़ते खर्च और उच्च स्वास्थ्य कवर को देखते हुए यह सीमा सही नहीं लगती है। कर छूट को दोगुना करने से परिवारों को न्यूनतम कवरेज के बजाय पर्याप्त सुरक्षा का विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।’

First Published : January 20, 2026 | 11:17 PM IST