आम बजट से रियल एस्टेट उद्योग को भी काफी उम्मीदें हैं। इस उद्योग ने बजट में रियल उद्योग को राहत देने की मांग की है। उद्योग होम लोन, आयकर, रेंटल हाउसिंग आदि मुद्दों पर राहत चाहता है। उद्योग ने बजट से पहले मांग की है कि पहली बार घर खरीदने वालों को लाभ देने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना को फिर से शुरू करने का ऐलान भी बजट में होना चाहिए।
रियल एस्टेट उद्योग के प्रमुख संगठनों में से एक नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) ने वित्त मंत्रालय से कई सिफारिशें की हैं। नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन ब्याज कटौती की सीमा कई सालों से 2 लाख रुपये बनी हुई है, जबकि इस दौरान मकान के दाम काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में यह सीमा बढ़कर कम से कम 5 लाख रुपये करने का प्रावधान बजट में होना चाहिए। सरकार ने किफायती आवास को तो उद्योग का दर्जा दिया है। अब पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिलना चाहिए। जिससे कि उद्योग को सस्ती जमीन और खरीदारों को सस्ते घर मिलने में मदद मिलेगी।
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नारेडको ने आयकर संबंधी रियायत देने की भी मांग की है। नारेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी आयकर अधिनियम 2025 की धारा 22 के तहत ब्याज भुगतान पर उपलब्ध कटौती को उसी वर्ष से लागू किया जाए, जिस वर्ष पूंजी उधार ली गई हो जैसा कि धारा 80 सी के तहत मूलधन के लिए होता है। आयकर सेटलमेंट कमीशन की फिर से बहाली होनी चाहिए। इसके तहत आयकरदाताओं को आयकर विभाग के साथ एकमुश्त समझौता और निपटान का अवसर मिलता था। यह कमीशन 5 साल पहले बंद हो चुका है।
कॉलियर्स इंडिया ने बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग की सीमा में संशोधन करने की मांग की है। वर्तमान में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए 45 लाख रुपये की सीमा अधिकांश शहरी बाजारों में जमीनी कीमतों की वास्तविकता को नहीं दर्शाती। अफोर्डेबल हाउसिंग की एक मानक और व्यापक परिभाषा की तत्काल जरूरत है, जिसमें घर के आकार और कीमत दोनों को शामिल किया जाए। स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग (SWAMIH)’ के तहत आवंटन को और बढ़ाया जाए। एनारॉक समूह के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग मार्केट की हिस्सेदारी 2019 में 38 फीसदी से घटकर 2025 में 18 फीसदी रह गई है। यह एक संरचनात्मक संकट है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और अफोर्डेबल हाउसिंग के डेवलपर के लिए धारा 80-आईबीए के तहत 100 फीसदी टैक्स हॉलिडे को फिर से लागू करना चाहिए।
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नाइट फ्रैंक इंडिया के मुताबिक निवेश के तौर पर खरीदे गए 50 लाख रुपये से कम कीमत के कई मकान कम किराए की वजह से खाली पड़े हैं। नाइट फ्रैंक ने इस कीमत के मकानों के लिए 3 लाख रुपये तक के किराए की आय पर 100 फीसदी कर छूट देने का प्रस्ताव बजट में रखने की मांग की है। रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार के अधीन शहरी भूमि जैसे रेलवे और रक्षा विभाग की भूमि का उपयोग रेंटल हाउसिंग के लिए करने की सिफारिश भी की है। जैन ने कहा कि सरकार को रेंटल हाउसिंग परियोजनाओं के लिए बिल्डरों को ब्याज सब्सिडी देकर प्रोत्साहित करना चाहिए।