Investment Performance 2025: साल 2025 निवेश की दुनिया में एक यादगार साल बनकर उभरा। कहीं रिकॉर्ड बने, तो कहीं निराशा हाथ लगी। एचडीएफसी म्युचुअल फंड की ताजा रिपोर्ट बताती है कि इस साल निवेशकों का भरोसा सबसे ज्यादा अगर किसी एसेट ने जीता, तो वह था सोना। वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक दबाव के बीच सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश बनकर चमका, जबकि कई दूसरे एसेट्स पीछे छूट गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सोने ने शानदार रिटर्न दिया और ग्लोबल एसेट क्लासेज में टॉप पर रहा। उभरते बाजारों, यूरोप के शेयर बाजार और अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के ग्रुप मैग्निफिसेंट-7 ने भी निवेशकों को राहत दी। पिछले पांच सालों की तस्वीर देखें तो साफ है कि सोना, बिटकॉइन और मैग्निफिसेंट-7 लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले एसेट्स रहे हैं।
| एसेट | 2025 का प्रदर्शन |
|---|---|
| सोना | सबसे मजबूत रिटर्न |
| उभरते बाजार (EM) | बेहतर प्रदर्शन |
| यूरोप | मजबूती |
| मैग्निफिसेंट-7 | ऊंचा रिटर्न |
| तेल | कमजोर |
| अमेरिकी डॉलर | दबाव में |
| बिटकॉइन | कमजोर प्रदर्शन |
जहां सोने ने चमक बिखेरी, वहीं तेल, अमेरिकी डॉलर और बिटकॉइन ने निवेशकों को निराश किया। एचडीएफसी म्युचुअल फंड की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में ये तीनों एसेट्स सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। खासकर बिटकॉइन, जिससे पहले बड़ी उम्मीदें थीं, इस साल निवेशकों की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका।
2025 में ग्लोबल शेयर बाजारों की दौड़ में दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स सबसे आगे निकल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों ने कोरियाई बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। दूसरी ओर, भारत का शेयर बाजार इस रफ्तार में पिछड़ता नजर आया। निफ्टी 50 पिछले करीब 15 महीनों से करेक्शन के दौर में रहा, जिससे भारत का प्रदर्शन कई बड़े वैश्विक बाजारों से कमजोर रहा।
| बाजार | प्रदर्शन |
|---|---|
| दक्षिण कोरिया (KOSPI) | सबसे बेहतर |
| अमेरिका (Nasdaq) | मजबूत |
| यूरोप | स्थिर |
| भारत (NIFTY 50) | कमजोर |
| उभरते बाजार औसत | भारत से बेहतर |
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 2025 में भारतीय शेयर बाजार ने उभरते बाजारों के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत कमजोर प्रदर्शन किया। यह पिछले 30 सालों में भारत का सबसे खराब तुलनात्मक प्रदर्शन माना गया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी कहती है कि अब भारत की वैल्यूएशन उभरते बाजारों के मुकाबले अपने लंबे समय के औसत के करीब पहुंच गई है, जो भविष्य के लिए कुछ उम्मीद जरूर जगाती है।
| साल | भारत का प्रदर्शन (EM के मुकाबले) |
|---|---|
| 1990–2024 | ज़्यादातर बेहतर |
| 2025 | करीब 25% कमजोर |
| स्थिति | 30 साल में सबसे खराब |
एचडीएफसी म्युचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए कंसोलिडेशन यानी ठहराव का साल रहा। निफ्टी 100 टीआरआई ने लगातार 10वें साल पॉजिटिव रिटर्न दिया और मार्च 2025 की गिरावट के बाद बाजार संभलता नजर आया। लेकिन इस रिकवरी की कहानी हर शेयर की नहीं थी। स्मॉल कैप और मिड कैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा और बाजार की पूरी रफ्तार कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों पर ही टिकी रही।
| इंडेक्स | 2025 रिटर्न |
|---|---|
| NIFTY 100 TRI | 10.2% |
| NIFTY Midcap 150 TRI | 6.0% |
| NIFTY Smallcap 250 TRI | -5.5% |
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में बाजार के कुल रिटर्न का बड़ा हिस्सा केवल टॉप 10 प्रतिशत शेयरों से आया। इसका मतलब साफ है कि ज्यादातर निवेशकों को पूरे बाजार की तेजी का फायदा नहीं मिला।
| साल | NIFTY 100 | Midcap | Smallcap |
|---|---|---|---|
| 2023 | 44% | 36% | 42% |
| 2024 | 70% | 62% | 56% |
| 2025 | 85% | 145% | 221% |
| सेक्टर (निफ्टी इंडेक्स) | 2025 रिटर्न (%) |
|---|---|
| ऑटो | 24.6 |
| कमोडिटी | 18.4 |
| बैंक | 18.1 |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 14.6 |
| निफ्टी 50 | 11.9 |
| FMCG | -0.4 |
| फार्मा | -2.2 |
| IT | -10.4 |
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारतीय शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन एक-जैसा नहीं रहा। कुछ सेक्टरों ने शानदार रिटर्न दिया, तो कुछ निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। ऑटो, मेटल्स और बैंकिंग सेक्टर इस साल बाजार की अगुवाई करते नजर आए, जबकि आईटी और फार्मा सेक्टर पिछड़ गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने 2025 में करीब 24 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी कमोडिटी और बैंक इंडेक्स ने भी दोहरे अंक का मुनाफा कराया। इसके उलट, आईटी और फार्मा सेक्टर में कमजोरी दिखी और फार्मा इंडेक्स साल के अंत में करीब 10 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ। रिपोर्ट का कहना है कि आईटी और फार्मा सेक्टर में पिछले दो साल की तेजी के बाद अब थकावट नजर आ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टरों की वैल्यूएशन तस्वीर भी काफी अलग-अलग है। प्राइवेट बैंक अभी अपने लंबे समय के औसत के मुकाबले डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं, यानी इनमें वैल्यूएशन के लिहाज से सस्तापन दिख रहा है। वहीं, कंज्यूमर स्टेपल्स और टेक सेक्टर की वैल्यूएशन अपने लंबे समय के औसत के आसपास बनी हुई है।
इसके उलट, यूटिलिटीज, मेटल्स, इंडस्ट्रियल्स और ऑटोमोबाइल जैसे कई सेक्टर अब भी अपने ऐतिहासिक औसत के मुकाबले प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाजार की हालिया तेजी के बावजूद हर सेक्टर में निवेश के मौके एक जैसे नहीं हैं।