भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच व्यापार समझौता होने के करीब है। इस बीच यूरोप के वाहन निर्माताओं के समूह ने चेतावनी दी है कि कोटा और लाइसेंस इस समझौते में बड़े व्यवधान बन सकते हैं और इससे समझौते के लाभ तक पहुंचने का लक्ष्य बाधित हो सकता है।
वहीं यूरोपियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीईए) ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि इसके अलावा इस समझौते में वाहनों के कल पुर्जे पर शुल्क हटाने से उल्लेखनीय लाभ हो सकता है और इससे भारत और यूरोप के विनिर्माण क्षेत्र को लाभ होगा।
एसोसिएशन ने यह भी कहा, ‘लेकिन यूरोपीय संघ (ईयू) को किसी भी कीमत पर समझौता करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वार्ताओं की वर्तमान स्थिति में एक वास्तविक जोखिम समझौते को कोटा, बाजार विभाजन नियमों, अवशिष्ट शुल्कों, लाइसेंसिंग प्रणालियों और विभिन्न अन्य तंत्रों द्वारा प्रतिबंधित करने को लेकर भी है। ये किसी भी समझौते के लाभों को प्राप्त करना मुश्किल बना देंगे। दोनों पक्षों को प्रतिबंधों में कटौती करने और सार्थक कोटा देने के मामले महत्वाकांक्षी होने की आवश्यकता है। खासकर विशेष रूप से दीर्घकालिक बाजार के आकार को ध्यान में रखते हुए और पूरी तरह से शुल्क हटाने के मामले में दोनों पक्षों को ध्यान देने की जरूरत है।’
दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में भारत-ईयू सम्मेलन के दौरान 27 जनवरी को व्यापार समझौता पूरा होने की घोषणा करने का लक्ष्य रखा है, जिसे देखते हुए यह बयान महत्त्वपूर्ण है। सभी व्यापार वार्ताओं में ऑटोमोबाइल सेक्टर लंबे समय से भारत के लिए संवेदनशील रहा है, क्योंकि इससे भारत में रोजगार पर असर पड़ सकता है। यह लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते में सबसे कठिन मुद्दों में से एक रहा है। भारत ने पहली बार ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते में ऑटोमोबाइल पर शुल्क घटाने और बाजार तक पहुंच की अनुमति देने का फैसला किया था, लेकिन यह चरणबद्ध तरीके से किया जाना है। इसमें छोटी कारों का बचाव किया गया है, जबकि प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बड़ी कारों के लिए बाजा खोला गया है।
इसी तरह के कोटा और चरणबद्ध तरीके से कर कम करने के तरीके को यूपोपीय संघ के मामले में भी भारत अपनाए जाने की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, पहुंच का पैमाना बड़ा होने की उम्मीद है, क्योंकि ब्रिटेन से भारत को कार निर्यात सीमित है, जबकि यूरोपीय संघ (ईयू) एक बहुत बड़ा वाहन निर्यातक ब्लॉक है।
एसोसिएशन ने कहा, ‘समझौता केवल वाहन निर्यात के बारे में भी नहीं है। यूरोपीय ऑटोमोटिव निर्माता पहले से ही भारत में वाहनों के निर्माण में भारी निवेश कर रहे हैं और एफटीए होने से यह नहीं बदलेगा। दसअसल वाहनों के कल पुर्जों पर शुल्क को पूरी तरह से हटाने लाभ मिल सकता है। इससे भारत के साथ यूरोप के विनिर्माण संबंधी हितों को बढ़ावा मिलेगा।’
एसोसिएशन में बीएमडब्ल्यू ग्रुप, डेमलर ट्रक, फेरारी, फोर्ड ऑफ यूरोप, होंडा मोटर यूरोप, ह्युंडै मोटर यूरोप, जेएलआर, मर्सिडीज-बेंज, निसान, रेनो ग्रुप, टोयोटा मोटर यूरोप सहित यूरोप के 17 कार, वैन, ट्रक और बस निर्माता शामिल हैं।
एसीईए मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी किए जाने के समर्थन में है, लेकिन उसका कहना है कि वाहन बाजार को गहरी और सार्थक पहुंच प्रदान करने की जरूरत है।
एसीईए इंटरनैशनल ट्रेड डायरेक्टर जोनाथन ओ रिओर्डन ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि अगले कुछ दिनों में समझौता राजनीतिक अनिवार्यता है। हम अंतिम समझौते में जल्दबाजी से महत्त्वपूर्ण विवरणों का अनदेखा की संभावना को लेकर चिंतित हैं।’