Investment Portfolio Allocation: शेयर बाजार में निवेश करते समय सबसे बड़ा डर उतार चढ़ाव का होता है। कभी बाजार ऊपर जाता है, कभी अचानक गिर जाता है। इसी डर की वजह से कई निवेशक गलत समय पर पैसा निकाल लेते हैं और नुकसान उठा बैठते हैं। HDFC म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट बताती है कि बाजार का यह डर अस्थायी होता है, लेकिन धैर्य रखने वालों को लंबे समय में फायदा मिलता है।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई निवेशक सिर्फ इक्विटी यानी शेयरों में पैसा लगाता है, तो वहां उतार चढ़ाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। इक्विटी में रिटर्न की संभावना जरूर ज्यादा होती है, लेकिन जोखिम भी बाकी विकल्पों के मुकाबले कहीं ज्यादा रहता है। इसके मुकाबले डेट और गोल्ड में उतार चढ़ाव कम देखा गया है।
| निवेश का तरीका | उतार-चढ़ाव | जोखिम स्तर |
|---|---|---|
| सिर्फ इक्विटी | बहुत ज्यादा | बहुत ऊंचा |
| इक्विटी + डेट | मध्यम | संतुलित |
| इक्विटी + डेट + गोल्ड | कम | नियंत्रित |
| डेट | कम | कम |
| गोल्ड | मध्यम | सुरक्षा वाला |
HDFC म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट में बताया गया है कि जब निवेश को इक्विटी, डेट और गोल्ड में बांट दिया जाता है, तो पूरे पोर्टफोलियो का जोखिम कम हो जाता है। ऐसे हाइब्रिड निवेश में रिटर्न संतुलित रहता है और बाजार की तेज गिरावट का असर भी सीमित हो जाता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हर वित्तीय वर्ष में अलग अलग मार्केट कैप और सेक्टर आगे रहते हैं। कभी बड़े शेयर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो कभी मिडकैप या स्मॉलकैप आगे निकल जाते हैं। इसी तरह अलग अलग सेक्टर और निवेश की शैली जैसे वैल्यू और ग्रोथ भी अलग अलग समय पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं। इसलिए पूरे पैसे को एक ही जगह लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
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| निवेश की अवधि | नुकसान की संभावना | रिपोर्ट का संकेत |
|---|---|---|
| 1 साल | ज्यादा | बाजार का डर सबसे बड़ा |
| 3 साल | मध्यम | धैर्य रखने से राहत |
| 5 साल | कम | निवेश स्थिर होने लगता है |
| 10 साल | बहुत कम | डर लगभग खत्म |
| 15 साल से ज्यादा | लगभग शून्य | लंबे समय में जीत |
HDFC म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट बताती है कि जैसे जैसे निवेश की अवधि बढ़ती है, नुकसान की संभावना तेजी से घटती है। एक साल के निवेश में नुकसान का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन पांच साल में यह खतरा काफी कम हो जाता है। 10 साल और उससे ज्यादा समय तक निवेश करने पर नुकसान की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जो निवेशक बाजार से बाहर रहते हैं या अच्छे दिनों को मिस कर देते हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अगर निवेशक कुछ चुनिंदा अच्छे दिन बाजार में नहीं रहता, तो उसका कुल रिटर्न काफी घट जाता है। इसका मतलब यह है कि बाजार में बने रहना बहुत जरूरी है।
HDFC म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट में SIP को भावनाओं को काबू में रखने का सबसे असरदार तरीका बताया गया है। SIP के जरिए निवेशक हर महीने तय रकम निवेश करता है, जिससे बाजार के उतार चढ़ाव का असर औसत हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार HDFC के स्मॉल कैप और मिड कैप फंड में SIP करने वाले निवेशकों को लंबे समय में करीब 20 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिला है।
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि स्मॉल कैप और मिड कैप फंड ने लंबे समय में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। इन फंड्स का रिस्क स्तर बहुत ऊंचा बताया गया है, इसलिए यह हर निवेशक के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते।
रिपोर्ट में फंड मैनेजर द्वारा संचालित अन्य फंड्स के प्रदर्शन का भी जिक्र है। इनमें फ्लेक्सी कैप और चिल्ड्रन फंड जैसे स्कीम शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय में स्थिर रिटर्न दिया है। हालांकि यह भी साफ किया गया है कि अलग अलग फंड्स की रणनीति और जोखिम अलग होते हैं।