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निर्यातकों की बजट में शुल्क ढांचे को ठीक करने की मांग

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 27 के लिए केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करेंगी।

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श्रेया नंदी   
Last Updated- January 23, 2026 | 9:00 AM IST

निर्यातकों ने सरकार से वित्त वर्ष 27 के आगामी बजट में इंवर्टिड शुल्क ढांचे की समस्या को तत्काल हल करने की मांग की है। निर्यातकों ने सभी गैर-कॉर्पोरेट विनिर्माण एमएसएमई के लिए आयकर कम करने, भारतीय वैश्विक स्तर के शिपिंग लाइनों के विकास के लिए लक्षित नीति और वित्तीय सहायता देने का आग्रह किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 27 के लिए केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करेंगी।

निर्यातकों के शीर्ष निकाय फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने निर्यात-उन्मुख उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इनपुट पर आयात शुल्क को तर्कसंगत व कम करने की सिफारिश की है। इससे इनपुट लागत को तैयार उत्पाद शुल्क के साथ जोड़ा जा सकेगा।

फियो ने गुरुवार को कहा, ‘जैसे तैयार कपड़ों व परिधानों की तुलना में सिंथेटिक धागों व रेशों पर अधिक सीमा शुल्क लगता है। इससे वस्त्र व परिधान मूल्य श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी तरह आयातित इलेक्ट्रानिक उत्पादों की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट पर अधिक शुल्क लगता है। इससे घरेलू स्तर पर मूल्य वर्धन को हतोत्साहित किया जाता है… लिहाजा कच्चे माल पर शुल्क घटाकर या नए सिरे से तय करने पर उत्पादन की लागत घटेगी। इससे कार्यशील पूंजी पर कम दबाव पड़ेगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा मजूबत होगी।’

भारत की इंजीनियरिंग निर्यात संवर्द्धन परिषद (ईईपीसी) ने सभी गैर कॉरपोरेट विनिर्माण एमएसएमई के लिए आयकर घटाकर 25 प्रतिशत तक करने और 90 प्रतिशत जीएसटी रिफंड तत्काल जारी करने की सिफारिश की है। अभी गैर कॉरपोरेट विनिर्माण एमएसएमई करीब 33 प्रतिशत कर अदा करती हैं। इससे कॉरपोरेट की तुलना में 8-9 प्रतिशत का नुकसान होता है।

First Published : January 23, 2026 | 9:00 AM IST