लेख

IMF का अलर्ट: AI बना ग्लोबल ग्रोथ का नया इंजन, लेकिन ‘डॉट-कॉम’ जैसे बुलबुले का खतरा भी

2026 के लिए वैश्विक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 3.3 फीसदी कर दिया गया है और यह मोटे तौर पर तकनीकी विकास और एआई से जुड़े निवेश की वजह से है

Published by
बीएस संपादकीय   
Last Updated- January 21, 2026 | 10:24 PM IST

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के जनवरी 2026 के विश्व आर्थिक पूर्वानुमान इस सप्ताह जारी किए गए जो बताते हैं कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस वैश्विक वृद्धि के एक अहम इंजन के रूप में उभरा है। 2026 के लिए वैश्विक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 3.3 फीसदी कर दिया गया है और यह मोटे तौर पर तकनीकी विकास और एआई से जुड़े निवेश की वजह से है। ऐसे निवेश प्रमुख रूप से अमेरिका में हो रहे हैं। आईएमएफ का अनुमान है कि 2025 की पहली तीन तिमाहियों में अमेरिका में तकनीकी क्षेत्र में निवेश ने औसत वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि में करीब 30 आधार अंकों का योगदान किया। इससे वहां के लिए 2026 का वृद्धि अनुमान बढ़कर 2.4 फीसदी हो गया।

2026 की शुरुआत में कॉरपोरेट आय और निवेश घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि एआई अधोसंरचना पर होने वाला व्यय जिसमें उन्नत सेमीकंडक्टर से लेकर डेटा सेंटर और क्लाउड क्षमता आदि शामिल हैं, व्यापक पूंजीगत व्यय से तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह आईएमएफ के इस आकलन को मजबूत करता है कि प्रौद्योगिकी वैश्विक व्यापार की नाजुक स्थिति के बावजूद वृद्धि को सहारा दे रही है। एआई को व्यापक रूप से अपनाने से उत्पादकता और मध्यम अवधि की वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है, जबकि व्यापारिक तनावों में लगातार कमी नीति की पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को बढ़ा सकती है और निवेश की गति को पुनर्जीवित कर सकती है।

आईएमएफ ने यह चेतावनी भी दी है कि एआई आधारित वृद्धि का आधार बहुत संकीर्ण है। एआई में निवेश की तेजी एक ऐसा बुलबुला साबित हो सकती है जो 2000 के दशक के आरंभ के डॉट कॉम बुलबुले की तरह ही फट सकता है। यदि अपेक्षाएं वास्तविक उत्पादकता लाभ से कहीं अधिक तेजी से बढ़ती हैं, तो अत्यधिक निवेश अचानक रुक सकता है। शेयर बाजार मूल्यांकन में तीव्र गिरावट पूंजीगत व्यय को कम करके और भरोसे को कमजोर करके वृद्धि को जल्दी धीमा कर सकता है, भले ही यह पूर्ण वित्तीय संकट को जन्म न दे।

कुछ बड़ी अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों का छोटा समूह इक्विटी बाजार को चला रहा है, जिससे एआई-संबंधित मूल्यांकन व्यापक बाजार से कहीं अधिक ऊपर पहुंच गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026 रिपोर्ट भी यह बताती है कि एआई निवेश अत्यधिक केंद्रित बना हुआ है। 2024 में वैश्विक कॉरपोरेट एआई खर्च का 72.5 फीसदी हिस्सा अमेरिका के हिस्से में आया, जो यह रेखांकित करता है कि अधिकांश देश अभी कितने पीछे हैं।

बहरहाल, विश्व आर्थिक मंच के शोध बताते हैं कि एआई व्यवस्थाएं अकेले अमेरिका में 4.5 लाख करोड़ डॉलर मूल्य के काम कर रही हैं। ऐसे में जहां अलग-अलग कामों के लिए एआई को व्यापक तौर पर अपनाने से उत्पादकता में सुधार हुआ होगा, वहीं निवेश का स्तर और उसका केंद्रीकरण चिंता का विषय है। ऊर्जा की तीव्रता, डेटा के केंद्रीकरण और श्रम विस्थापन को लेकर भी चिंताएं हैं। कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए पूंजी, कौशल और डेटा तक सीमित पहुंच मौजूदा आय और उत्पादकता की खाई को और चौड़ा करने का खतरा पैदा करती है।

भारत की विकास गाथा वैश्विक चुनौतियों और घरेलू संभावनाओं के मेल पर आधारित है। आईएमएफ ने सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की पुष्टि की है और 2025-26 के लिए इसका वृद्धि पूर्वानुमान संशो​धित कर 7.3 फीसदी तक कर दिया है। 2026-27 में वृद्धि के 6.4 फीसदी तक रहने की उम्मीद है। वर्तमान वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि अपेक्षा से अधिक रही, और नीति-निर्माताओं के लिए चुनौती यह होगी कि अगले वित्त वर्ष में इस गति को कैसे बनाए रखें।

एआई निवेशों के संदर्भ में, भारत को बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा डेटा केंद्रों में निवेश आकर्षित करने से भी लाभ हुआ है। हालांकि, उसे एआई निवेश में संभावित मंदी या उलटफेर के प्रभाव के लिए तैयार रहना पड़ सकता है, जिससे अमेरिका और अन्य शेयर बाजारों में तीव्र गिरावट आ सकती है। किसी भी स्थिति में, विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं, और यदि वैश्विक बाजार धारणा में उल्लेखनीय कमजोरी आती है तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इस प्रकार, वैश्विक व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के अलावा, एआई संबंधित लेनदेन के समाप्त होने की आशंका से भी वृद्धि के लिए जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

First Published : January 21, 2026 | 10:17 PM IST