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Cabinet Decision: केंद्रीय कैबिनेट ने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मिलने वाले कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी और उन्हें कम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (21 जनवरी) को हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई। सरकार की ओर से यह इक्विटी कैपिटल वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए SIDBI में डाली जाएगी। यह निवेश तीन चरणों में किया जाएगा।
कैबिनेट फैसले के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3,000 करोड़ की इक्विटी, जो 31 मार्च 2025 को तय बुक वैल्यू ₹568.65 प्रति शेयर के आधार पर होगी। वित्त वर्ष 2026-27 में ₹1,000 करोड़ की इक्विटी, संबंधित वर्ष की बुक वैल्यू पर और वित्त वर्ष 2027-28 में ₹1,000 करोड़ की इक्विटी, उस समय की बुक वैल्यू पर होगी।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस पूंजी निवेश के बाद SIDBI की फाइनैंशल क्षमता बढ़ेगी और वह ज्यादा MSMEs को कर्ज दे सकेगा। इसके अंतर्गत MSMEs को FY25 के अंत तक 76.26 लाख वित्तीय सहायता मिलेगी। FY28 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 102 लाख MSMEs हो जाएगी। यानी, करीब 25.74 लाख नए MSME लाभार्थी जुड़ेंगे।
MSME मंत्रालय के आंकड़ों (30 सितंबर 2025 तक) के अनुसार, देश में 6.90 करोड़ MSMEs करीब 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं। औसतन एक MSME से 4.37 लोगों को रोजगार मिलता है। इस आधार पर, 25.74 लाख नए MSMEs जुड़ने से करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
सरकार ने बताया कि आने वाले वर्षों में SIDBI का फोकस डायरेक्टेड क्रेडिट, डिजिटल और बिना गारंटी वाले लोन, और स्टार्टअप्स के लिए वेंचर डेट जैसे उत्पादों पर बढ़ेगा। इन सभी गतिविधियों से SIDBI की रिस्क-वेटेड एसेट्स (RWA) में तेजी से बढ़ोतरी होगी। ऐसे में बैंक को अपने कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी।
SIDBI की क्रेडिट रेटिंग के लिए एक मजबूत CRAR बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार का कहना है कि इस इक्विटी निवेश से हाई स्ट्रेस (High Stress Scenario) में भी CRAR 10.50% से ऊपर रहेगा। इससे SIDBI को बाजार से कम ब्याज दर पर संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी और MSMEs को भी सस्ते और प्रतिस्पर्धी दरों पर कर्ज मिल सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह फैसला MSME सेक्टर को मजबूती देगा, जॉब जेनेरेशन को बढ़ावा मिलेगा, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को पूंजी की कमी से उबारेगा, और समग्र आर्थिक ग्रोथ को रफ्तार देगा।