नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा गठित समिति के जांच रिपोर्ट सौंपने के करीब 20 दिन बाद इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दिसंबर में विमानन कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर उड़ानों को रद्द करने के मामले में यह कार्रवाई अपर्याप्त नजर आती है। नियामक को भारतीय हवाई अड्डों पर गत माह फैली अव्यवस्थाओं की ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
केवल जुर्माना लगाने के बजाय (फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने इसे बहुत कम बताया है) डीजीसीए को बिना किसी देरी के सुचारु ढंग से उड़ान संचालन सुनिश्चित करना चाहिए था और व्यवधान के कारणों की व्यापक जांच करनी चाहिए थी। आश्चर्यजनक रूप से, जांच समिति के विस्तृत निष्कर्ष रिपोर्ट जमा होने के हफ्तों बाद भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हजारों यात्री, जो उड़ान रद्द होने से प्रभावित हुए, वे व्यवधान के कारण को जानने के हकदार हैं। रिपोर्ट का खुलासा विमानन उद्योग, नियामक और सरकार को यह संदेश भी देगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति को कैसे रोका जा सकता है।
डीजीसीए के मुताबिक संचालन के अत्यधिक इस्तेमाल, अपर्याप्त नियामक तैयारी और सिस्टम सॉफ्टवेयर सपोर्ट में कमियां व्यवधानों के प्रमुख कारणों में शामिल थीं। इस पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। हालांकि इंडिगो ने अब नियामक को बताया है कि वह 10 फरवरी के बाद कोई उड़ान रद्द नहीं करेगी, जो कि उड़ान सेवा समयसीमा (एफडीटीएल) मानकों के पूरे सेट को लागू करने की संशोधित तिथि है। डीजीसीए की जिम्मेदारी है कि नए ढांचे में बदलाव को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाया जाए। यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता सर्वोपरि है और इसे संयोग पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
दिसंबर की शुरुआत में जब व्यवधान चरम पर था, रद्द की गई उड़ानों की संख्या 2,507 और विलंबित उड़ानों की संख्या 1,852 रही, जिससे देशभर में तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। हालांकि डीजीसीए का जुर्माना 5 दिसंबर, 2025 से 10 फरवरी, 2026 तक मानकों के अनुपालन न करने के लिए लगाया गया है। इस अवधि के दौरान जुर्माने की राशि लगभग 30 लाख रुपये रोजाना तय की गई है।
देश में विमानन क्षेत्र में हुई अव्यवस्था को लेकर इंडिगो और नियामक दोनों ही जांच के दायरे में हैं। वहीं जुर्माने की राशि के अंतिम उपयोग पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उदाहरण दिए जा रहे हैं कि अमेरिकी परिवहन विभाग ने कुछ वर्ष पहले उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के उल्लंघन पर एक अमेरिकी एयरलाइन पर लगाए गए जुर्माने को उन यात्रियों में बांटा था जो व्यवधान से प्रभावित हुए थे।
डीजीसीए भी वैसा कर सकता है। सरकार ने उड़ान व्यवधानों और बड़े पैमाने पर यात्री शिकायतों के तुरंत बाद सख्त कार्रवाई का वादा किया था। कार्रवाई के तौर पर अब तक केवल परिचालन नियंत्रण केंद्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष को हटाया गया है। इसके अलावा डीजीसीए ने इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी पीटर एल्बर्स तथा मुख्य परिचालन अधिकारी इसिद्रे प्रोकेरस को चेतावनी दी है।
यह सही है कि डीजीसीए की कार्रवाई अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है, लेकिन इस मामले पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। सीसीआई को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विमानन बाजार में अहम हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी इंडिगो ने प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों का उल्लंघन किया या नहीं। नियामक ने हवाई अड्डों पर फैली अव्यवस्था के बाद इंडिगो को एफडीटीएल नियमों से 10 फरवरी तक छूट दी थी। सीसीआई की जांच को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इंडिगो का पायलटों की कमी का दावा, जिसके कारण रोस्टर कुप्रबंधन हुआ, वास्तव में सही था या नहीं।