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Editorial: करीब ढाई साल की सुस्ती के बाद भारतीय आईटी उद्योग में सुधार के शुरुआती संकेत

तीसरी तिमाही आमतौर पर पश्चिमी देशों में अवकाश के कारण नर्म तिमाही होती है और इस लिहाज से नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं

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बीएस संपादकीय   
Last Updated- January 19, 2026 | 10:52 PM IST

बाजार की गतिविधियों, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजों और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबद्ध अनुमान से पता चलता है कि यह उद्योग शुरुआती सुधार की दिशा में है। यह अभी शुरुआत है। हालांकि, भू-राजनीतिक अशांति, मुद्रा अस्थिरता, अमेरिका की वीजा प्रक्रियाओं में प्रमुख बदलाव और व्यापक रूप से डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन का अलग-थलग रहना, आदि मिलजुलकर इसे बेपटरी कर सकते हैं। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2025 में 12.5 फीसदी गिरा। यह एक महत्त्वपूर्ण गिरावट थी क्योंकि इसी अवधि में मुख्य सूचकांक निफ्टी 10.5 फीसदी ऊपर था। हालांकि, पिछले तीन महीनों (अक्टूबर–दिसंबर) में आईटी इंडेक्स में 12 फीसदी का सुधार आया है।

तीसरी तिमाही आमतौर पर पश्चिमी देशों में अवकाश के कारण नर्म तिमाही होती है और इस लिहाज से नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं। अब तक आए आंकड़े या तो अनुमान के मुताबिक रहे हैं या उससे बेहतर। प्रमुख कंपनियों के प्रबंधन के अनुमान आशावादी हैं। यह पिछली 10 तिमाहियों से बेहतर हैं क्योंकि उस दौरान अनुमान सतर्कता वाला था।

इन्फोसिस और एचसीएल टेक दोनों ने अपने अनुमान में सुधार किया है। टीसीएस ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 26 में उसका अंतरराष्ट्रीय राजस्व वित्त वर्ष 25 से बेहतर होगा। उसने यह अनुमान मांग में सुधार के आधार पर जताया है। विप्रो अभी भी वृद्धि हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। अगली श्रेणी में टेक महिंद्रा ने भी अनुमान से बेहतर परिणाम दिए हैं और कंपनी प्रबंधन उत्साहित है।

टीसीएस के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुधार आर्टिफिशल इंटेलिजेंस या एआई से संबंधित अल्पकालिक परियोजनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से एआई को अपनाए जाने के कारण हो सकता है। विवेकाधीन खर्च में सुधार हो सकता है जो आगे चलकर कमजोर राजस्व की भरपाई कर सकता है।

इन्फोसिस को वेंडर्स का समेकित होना एक सकारात्मक पहलू लगता है और उसका कहना है कि ग्राहकों की अपेक्षाएं एआई-आधारित उत्पादकता लाभ की ओर बढ़ रही हैं। टेक महिंद्रा का कहना है कि संचार क्षेत्र में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं और विनिर्माण में एरोस्पेस और उद्योग से बढ़ती मांग देखी जा रही है, हालांकि वाहन क्षेत्र कमजोर है और हाई-टेक अस्थिर है।

अंतरराष्ट्रीय शोध समूह आईएसजी का कहना है कि 2025 में बिजनेस आउटसोर्सिंग और इंजीनियरिंग शोध एवं विकास दोनों में वृद्धि देखी गई, जबकि प्रबंधित सेवाओं की वृद्धि सपाट रही और बड़े सौदों की कमी से बाधित रही। क्लाउड माइग्रेशन, एआई को अपनाना, साइबर सुरक्षा निवेश और प्लेटफॉर्म आधारित उपभोग जैसी प्रवृत्तियां लगातार दिखाई देती हैं।

इससे संकेत मिलता है कि भारतीय आईटी कंपनियों के लिए कारोबारी सेवा बाजार अभी भी दबा हुआ है, लेकिन बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सुधार हो रहा है और अधोसंरचना में निरंतर गति बनी हुई है। कई भारतीय कंपनियां रणनीतिक रूप से इतनी अच्छी स्थिति में हैं कि इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐज ए सर्विस (आईएएएस) और सॉफ्टवेयर ऐज ए सर्विस (एसएएएस) यानी क्लाउड कंप्यूटिंग मॉडल और क्लाउड डिलिवरी मॉडल के रूप में बढ़त का लाभ उठा सकें, विशेषकर हाइपरस्केलर निवेश और जनरेटिव एआई की गति को देखते हुए। अधिकांश शीर्ष और द्वितीय-स्तरीय भारतीय आईटी कंपनियों की बैलेंस शीट अच्छी है। वे इन संसाधनों का कुछ हिस्सा अधिग्रहणों में लगाने की सोच रही हैं ताकि कौशल की कमी को पूरा किया जा सके और भौगोलिक उपस्थिति को विविध बनाया जा सके।

टीसीएस ने दिसंबर 2025 में लिस्टएंगेज और कोस्टल क्लाउड का अधिग्रहण किया है, जिससे उसकी सेल्सफोर्स कंसल्टिंग क्षमता बढ़ी है, एआई-आधारित बदलाव क्षमताएं मजबूत हुई हैं और अमेरिका के मझोले बाजार में उपस्थिति का विस्तार हुआ है। विप्रो ने इंजीनियरिंग शोध एवं विकास क्षेत्र की कंपनी हर्मन डीटीएस का अधिग्रहण किया है, जिससे डिवाइस इंजीनियरिंग में क्षमताएं बढ़ी हैं, साथ ही सैमसंग इकोसिस्टम और दक्षिण कोरिया के बाजार के रूप में पहुंच मिली है। यद्यपि जोखिम भी मौजूद हैं और यह प्रारंभिक सुधार क्षणिक भी हो सकता है, लेकिन लगभग 30 महीनों तक कठिन समय से गुजरने के बाद, उद्योग में माहौल सकारात्मक दिखाई देता है। श्रम संहिता को अपनाने के कारण भी एक झटका लगा है, लेकिन यह संभवतः एक बार का समायोजन होगा।

First Published : January 19, 2026 | 10:20 PM IST