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राजमार्ग भूमि मुआवजे में कमियां, NH अधिनियम ढांचे पर फिर से विचार करे केंद्र सरकार

अदालत ने कहा कि इस कानून के अंतर्गत आने वाले भूस्वामियों को उन लोगों की तुलना में स्पष्ट रूप से नुकसान होता है जिनकी भूमि अन्य अधिग्रहण कानूनों के तहत ली जाती है

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- January 20, 2026 | 10:42 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने नैशनल हाइवे ऐक्ट, 1956 के तहत अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे के निर्धारण तंत्र में खामियों की ओर इशारा करते हुए अ​धिक पारद​र्शिता अपनाए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि इस कानून के अंतर्गत आने वाले भूस्वामियों को उन लोगों की तुलना में स्पष्ट रूप से नुकसान होता है जिनकी भूमि अन्य अधिग्रहण कानूनों के तहत ली जाती है।

न्यायालय ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 या भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के तहत अधिग्रहण के विपरीत, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत मुआवजे पर विवादों का निर्णय न्यायालयों द्वारा नहीं किया जाता है। इसके बजाय, उन्हें कानूनी रूप से मध्यस्थता के लिए भेजा जाता है। ये बैठकें केंद्र द्वारा मध्यस्थ के रूप में तय किए गए जिला कलेक्टर या आयुक्त जैसे सरकारी अधिकारियों द्वारा आयोजित की जाती हैं।

न्यायालय के अनुसार ये अधिकारी आमतौर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों से दबे होते हैं और उनके पास भूमि मूल्यांकन और कानूनी लाभ से संबंधित जटिल मुद्दों का निर्णय करने के लिए आवश्यक न्यायिक प्रशिक्षण नहीं होता है। न्यायालय ने कहा कि इस ढांचे के तहत पारित फैसले को केवल मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 और 37 के दायरे में चुनौती दी जा सकती है, जिससे न्यायिक जांच का दायरा बहुत अधिक सीमित है।

मेनका की टिप्पणियां पर नाराजगी

उच्चतम न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियों के संबंध में नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अदालत की अवमानना ​​की है।

मेनका की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, ‘आपने कहा कि अदालत को अपनी टिप्पणी में सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन क्या आपने अपनी मुवक्किल से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उन्होंने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ तरह-तरह की बातें कही हैं। क्या आपने उनका हाव-भाव देखा है? वह क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं। आपके मुवक्किल ने अवमानना ​​की है। अदालत की उदारता के कारण हम इस मामले का संज्ञान नहीं ले रहे हैं।’

First Published : January 20, 2026 | 10:36 PM IST