बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की सेंसेक्स कंपनियों के लिए मौजूदा कमाई सत्र 5 साल में सबसे कमजोर रहा। बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स की प्रति शेयर आय (ईपीएस) पिछले 12 महीने में अभी तक महज 1.3 फीसदी बढ़ी है जो अप्रैल 2021 के बाद सबसे कम है। उस समय कोविड लॉकडाउन के कारण सालाना आधार पर प्रति शेयर आय में काफी कमी आई थी।
बेंचमार्क सूचकांक की पिछले12 महीने की प्रति शेयर आय थोड़ी बढ़कर मंगलवार को 3,637.9 रुपये रही जो फरवरी 2025 के अंत में 3,591.7 रुपये थी। हालांकि मौजूदा ईपीएस नवंबर 2025 में सूचकांक के ईपीएस 3,665.8 रुपये से करीब 0.8 फीसदी कम है। यह सूचकांक कंपनियों की कमाई में एक साल पहले तक दो अंक में वृद्धि की तुलना में तेजी से बदलाव का संकेत देता है।
फरवरी 2025 में सूचकांक की ईपीएस इससे पिछले साल की तुलना में 22.6 फीसदी बढ़ी थी और पिछले पांच साल में यह औसतन 16.1 फीसदी बढ़ी है। सूचकांक की ईपीएस सूचकांक में शामिल भारत की शीर्ष 30 कंपनियों के पिछले 12 महीनों के कुल शुद्ध मुनाफे पर आधारित होती है। सूचकांक की 30 में से 8 कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं और कुल मिलाकर आंकड़े कमजोर हैं।
सूचकांक की इन 8 कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 0.4 फीसदी कम हुआ है।
चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में इन कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा पिछले 12 महीनों में 7.7 फीसदी बढ़ा है। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज को छोड़ दें तो शेष 7 कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा इस दौराल 3.6 फीसदी बढ़ा है। रिलायंस को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एशियन पेंट्स में हिस्सा बेचने से एकबारगी लाभ हुआ था।
विश्लेषकों के अनुसार इससे सूचकांक की आय, उसके मूल्यांकन और सूचकांक के मूवमेंट के बीच अंतर पैदा हो गया है। पिछले एक साल में सूचकांक का मूल्य और मूल्यांकन अनुपात बढ़ा है जबकि आय में कमी आई है।
सूचकांक मंगलवार को 22.59 के प्राइस टु अर्निंग्स मल्टीपल (पीई गुणक) पर बंद हुआ, जो पिछले चार महीने में सबसे कम है। लेकिन फरवरी 2025 के आखिर में 20.58 पीई मल्टीपल से करीब 11 फीसदी अधिक है।
इसी तरह सूचकांक का पीई बुक वैल्यू अनुपात पिछले फरवरी 2025 के 3.76 से 12 महीनों में लगभग 17 फीसदी बढ़कर मंगलवार को 4.41 हो गया है। जिससे शेयर बाजार और भी महंगा हो गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि कमजोर आय वृद्धि और काफी ज्यादा मूल्यांकन होने की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बिकवाली कर रहे हैं, जिससे शेयर भाव में गिरावट आ रही है। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी में शोध एवं इक्विटी स्ट्रैटजी के सह-प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और उसके चलते बाजार में गिरावट को सीधे तौर पर कमजोर आय वृद्धि से जोड़कर देखा जा सकता है। इसके अलावा भारत का शेयर बाजार दुनिया भर में सबसे महंगे बाजारों में से एक बना हुआ है।’
विदेशी निवेशकों ने भारत के बाजार से जनवरी में अभी तक करीब 3 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। साल 2025 में उन्होंने शुद्ध 18.8 अरब डॉलर की बिकवाली की थी।