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विश्व आर्थिक मंच की 56वीं वार्षिक बैठक में चमकेगी भारत की विकास गाथा, दुनिया देखेगी ग्रोथ इंजन का दम

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भारत के प्रतिनिधिमंडल में एन चंद्रशेखरन, मुकेश अंबानी, सुनील भारती मित्तल, सज्जन जिंदल, सलिल पारेख, संजीव बजाज और रिशद प्रेमजी जैसे प्रमुख कारोबारी शामिल हो सकते हैं

Last Updated- January 18, 2026 | 10:33 PM IST
World Economic Forum (WEF)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की 56वीं वार्षिक बैठक 19 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में शुरू हो रही है। इस वर्ष इस सालाना आयोजन में भारत के रंग खूब बिखरेंगे क्योंकि देश के मंत्रियों, उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ-साथ कई राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी वहां जा रहे हैं।

डब्ल्यूईएफ के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा भूराजनीतिक हालात इस शिखर सम्मेलन को ऐतिहासिक बना देंगे। यहां वैश्विक अर्थव्यवस्था में परस्पर विरोधी माहौल, एआई के विकास और बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच आशावाद और चिंता का मिलाजुला माहौल दिखेगा। इस परिप्रेक्ष्य में भारत को विकास के प्रमुख वाहक के रूप में देखा जा रहा है। 

ईवाई अफ्रीका-भारत क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंध साझेदार और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि संदेश एकदम स्पष्ट है- भारत व्यापार के लिए खुला है, साझेदारी के लिए तैयार है और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है। 

दावोस में सीआईआई के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मेमानी ने कहा कि मजबूत वृद्धि आधार, भूराजनीति को लेकर समझ और विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, तकनीक, हरित ऊर्जा आदि में कारोबार और निवेश बढ़ाने संबंधी सुधारों पर ध्यान भारत के आत्मविश्वास की प्रमुख वजह है।

मौजूदा हालात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर भी सबकी नजर रहेगी। हाल ही में डब्ल्यूईएफ के एक सर्वेक्षण में 1,300 वैश्विक नेताओं और विशेषज्ञों ने पाया कि 2026 में दुनिया के सामने सबसे बड़े दो जोखिम भूराजनीतिक टकराव और राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष माने जा रहे हैं। 

डब्ल्यूईएफ की ‘ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट 2026’ ने भारत के लिए साइबर असुरक्षा, धन और आय असमानता, अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक मंदी को शीर्ष जोखिमों में सूचीबद्ध किया है। रिपोर्ट ने राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष  जैसे छद्म युद्ध, गृहयुद्ध, तख्तापलट और आतंकवाद को भारत के लिए पांचवां सबसे बड़ा जोखिम बताया है। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में डब्ल्यूईएफ की इवेंट एडिटोरियल टीम के प्रमुख शेख तंजीब इस्लाम ने कहा कि लचीलापन शिखर सम्मेलन का  प्रमुख विषय होगा।

उन्होंने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था का लचीलापन साबित हो चुका है। पिछले साल इसका संकेत मिला।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है, तो इस्लाम ने कहा कि भारत को अधिकतर विकास को गति देने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।

दावोस में भारत की प्रमुख थीम के बारे में पूछे जाने पर अपोलो टायर्स के वाइस-चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नीरज कंवर ने कहा, ‘डब्ल्यूईएफ में भारत की कथा संभावना  से प्रदर्शन की ओर स्थानांतरित हो गई है।’

 भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कंवर ने कहा कि अधिक ध्यान इस बात पर होगा कि मौजूदा पैमाने, स्थिरता और वैश्विक विखंडन के बीच भारत दीर्घकालिक पूंजी आकर्षित करने में किस तरह कामयाब रहता है।  

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही ‘रीन्यू’ के संस्थापक, चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमंत सिन्हा ने कहा कि दावोस में सुनने, संवाद करने और सबसे बढ़कर वैश्विक नेताओं को सुनने का अवसर मिलेगा जिससे हम अधिक भरोसे के साथ विश्व व्यवस्था का सामना करने के लिए आगे बढ़ सकेंगे।

उद्योग जगत की ओर से सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजित बनर्जी ने कहा कि भारत का उद्योग जगत दावोस सम्मेलन और आम बजट के पहले उत्साहित और आशान्वित है क्योंकि उसे देश की वृद्धि क्षमताओं पर पूरा भरोसा है।

भारत के प्रतिनिधिमंडल में एन चंद्रशेखरन, मुकेश अंबानी, सुनील भारती मित्तल, सज्जन जिंदल, सलिल पारेख, संजीव बजाज, के  कृ​त्तिवासन, सुदर्शन वेणु और रिशद प्रेमजी जैसे कारोबारी शामिल हो सकते हैं।

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First Published - January 18, 2026 | 10:32 PM IST

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