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ताइवान को लेकर अमेरिका-चीन में बढ़ सकता है युद्ध, परमाणु खतरे की चेतावनी

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चीन तेजी से बढ़ा रहा परमाणु ताकत, 2030 तक 1000 परमाणु हथियारों की तैयारी

Last Updated- May 28, 2026 | 3:04 PM IST
US China Conflict over Taiwan

US China Conflict over Taiwan: अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर दोनों देशों के बीच ताइवान को लेकर युद्ध हुआ, तो मामला परमाणु युद्ध तक पहुंच सकता है। लंदन के रक्षा शोध संस्थान IISS की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान को लेकर लड़ाई शुरू हुई तो अमेरिका और चीन एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, कम्युनिकेशन सिस्टम और खुफिया नेटवर्क पर बड़े हमले कर सकते हैं। ऐसे में हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं और युद्ध खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया अब एक नई परमाणु हथियारों की होड़ की तरफ बढ़ रही है और इसका सबसे बड़ा केंद्र एशिया-प्रशांत क्षेत्र बनता जा रहा है।

आखिर Taiwan को लेकर US China के बीच इतना विवाद क्यों?

ताइवान लंबे समय से चीन और अमेरिका के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और कई बार कह चुका है कि जरूरत पड़ी तो वह ताकत का इस्तेमाल करके भी उस पर कब्जा कर सकता है। हालांकि चीन यह भी कहता है कि वह ‘शांतिपूर्ण तरीके ‘ से ताइवान को अपने साथ जोड़ना चाहता है।

वहीं Taiwan खुद को अलग और लोकतांत्रिक सरकार वाला देश मानता है। अमेरिका भी लंबे समय से ताइवान को समर्थन देता रहा है और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद करने की बात कहता रहा है।

हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बीजिंग में मुलाकात हुई थी। इसके बाद ताइवान में चिंता बढ़ गई कि कहीं अमेरिका भविष्य में उसका साथ छोड़ तो नहीं देगा। इसी बीच चीन ने ताइवान के आसपास अपने लड़ाकू विमान और सैन्य गतिविधियां भी बढ़ा दी हैं, जिससे तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

यह भी पढ़ें: US-Iran War: हॉर्मुज में फिर गरमाया टकराव, ईरान के ड्रोन खतरे के बाद अमेरिका की बड़ी जवाबी स्ट्राइक

परमाणु युद्ध का खतरा क्यों बताया गया?

रिपोर्ट कहती है कि ताइवान चीन के लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि बहुत बड़ा रणनीतिक और राजनीतिक मुद्दा है। इसलिए अगर अमेरिका और चीन आमने-सामने आए, तो दोनों देश तेजी से सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोनों देशों के बीच अभी ऐसे साफ नियम या समझौते नहीं हैं, जो युद्ध के दौरान हालात को कंट्रोल में रख सकें। यानी कौन-सी सैन्य या कम्युनिकेशन सिस्टम पर हमला नहीं किया जाएगा, इसे लेकर कोई स्पष्ट ‘गार्ड रेल ‘ मौजूद नहीं है। ऐसे में अगर युद्ध बढ़ा, तो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है।

चीन तेजी से बढ़ा रहा परमाणु ताकत

हालांकि अभी भी अमेरिका और रूस के पास दुनिया के सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं, लेकिन चीन भी तेजी से अपनी परमाणु ताकत बढ़ा रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन 2030 तक करीब 1,000 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुसार, इस समय रूस के पास करीब 4,400 सक्रिय परमाणु हथियार हैं। अमेरिका के पास लगभग 3,700 और चीन के पास करीब 620 परमाणु हथियार मौजूद हैं।

Taiwan Conflict: एक्सपर्ट्स क्यों चिंतित हैं?

IISS के विशेषज्ञ डेनियल सालिसबरी का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बातचीत बहुत कमजोर है। उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हथियार नियंत्रण और जोखिम कम करने को लेकर लगातार बातचीत होती रहती थी। लेकिन चीन के साथ ऐसी मजबूत बातचीत अभी नहीं हो रही। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अपने परमाणु हथियारों की जानकारी काफी हद तक गुप्त रखता है, जिससे भरोसे की कमी बनी रहती है।

यह भी पढ़ें: नई दिल्ली में जुटे क्वाड देशों के विदेश मंत्री, हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और समुद्री निगरानी बढ़ाने पर बनी सहमति

एशिया में बढ़ रही हथियारों की दौड़

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देश अब तेजी से अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं। कई देश लंबी दूरी तक हमला करने वाली मिसाइलों और नए हथियारों पर भी काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले समय में एशिया दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य तनाव वाला क्षेत्र बन सकता है। सिंगापुर में होने वाली बड़ी रक्षा मीटिंग ‘शांगरी-ला डायलॉग’ में भी इस बार ताइवान, चीन-अमेरिका तनाव और ईरान जैसे मुद्दों पर सबसे ज्यादा चर्चा होने की उम्मीद है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - May 28, 2026 | 3:04 PM IST

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