भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि बैंक, अनुपालन को तिमाही के अंत की गतिविधि के रूप में नहीं ले सकते और उन्हें पूरे साल तक मजबूत परिचालन अनुशासन और डेटा गवर्नेंस बनाए रखने की जरूरत है।
डिप्टी गवर्नर ने शुक्रवार को ‘कॉलेज ऑफ सुपरवाइजर’ के तीसरे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन में ‘डिजिटल युग में बैंकिंग निगरानी के मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर कहा कि दशकों से निगरानी करने वालों को बही-खाते पढ़ने और प्रक्रियाओं का निरीक्षण करने के लिए प्रशिक्षित किया गया और आज भी यह उसी तरह किया जा रहा है। यह भाषण सोमवार को रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर डाला गया।
स्वामीनाथन ने कहा, ‘तेजी से बदलते माहौल में पीछे की तरफ देखने वाले अनुपालन जांच जरूरी हैं, लेकिन काफी नहीं हैं। हमें कमजोर संकेतों को जल्दी पहचानने, घटनाएं होने से पहले लचीलेपन का परीक्षण करने और कोई बड़ी घटना होने के पहले कमजोंरियों को पकड़कर दखल देने में सक्षम होना होगा।’ उन्होंने कहा कि एक बार जब किसी गड़बड़ी का पता चल जाता है, तो उसे जल्दी समझना और ठीक करना नियंत्रण की परिपक्वता का पैमाना बन जाता है।
उन्होंने कहा कि थर्ड पार्टी प्रबंधन को जोखिम प्रबंधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थाओं को साझेदारों की बेहतर निगरानी करने, घटनाओं की साफ जवाबदेही तय करने और ऐसे कांट्रैक्ट की जरूरत होगी जो ऑडिट, पहुंच और लचीलेपन में मदद करें। उन्होंने कहा, ‘ नियमन के दायरे में आने वाली इकाई जिम्मेदारियों को आउटसोर्स नहीं कर सकती।’
उन्होंने कहा कि डिजिटल वातावरण में, एक कमजोर शिकायत प्रणाली केवल एक मामूली असुविधा नहीं है, बल्कि यह अक्सर एक शुरुआती चेतावनी होती है।
स्वामीनाथन ने कहा, ‘निगरानी के लिहाज से हमें न केवल यह देखना होगा कि बैंक के पास शिकायत निवारण ढांचा है या नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि वह कैसा प्रदर्शन करता है। क्या शिकायतों का समय पर समाधान हो रहा है? क्या संस्थान मूल कारणों की पहचान कर उन्हें दूर कर रहे हैं, या वे केवल कागजों पर शिकायतों को बंद कर रहे हैं? क्या बोर्ड शिकायत के रुझान, बार-बार होने वाली विफलताओं और ग्राहकों की समस्याओं का स्पष्ट विवरण देख पा रहे हैं? और क्या वहां सक्रिय और तेजी से सुधार की व्यवस्था है।’
उन्होंने कहा कि आज एक बैंक कागजों पर बिल्कुल स्वस्थ दिख सकता है और फिर भी वह किसी एक घटना के कारण गंभीर संकट की कगार पर पहुंच सकता है।
डिप्टी गवर्नर ने कहा, ‘इसका कारण यह है कि महत्त्व का केंद्र अब शाखा और उत्पाद से हटकर तकनीकी बुनियादी ढांचे और कोड की ओर जा रहा है।’ स्वामीनाथन ने कहा कि दूसरे शब्दों में, स्थिरता अब परिचालन मजबूती, डेटा की अखंडता और बाहरी पक्षों पर निर्भरता पर उतनी ही आधारित है, जितनी की पूंजी और नकदी पर।
उन्होंने कहा कि निगरानी को समय-समय पर मिलने वाली जानकारियों से हटकर लगातार जागरूकता की ओर बढ़ना चाहिए। साथ ही, इसे किसी एक संस्थान से आगे बढ़कर उसके पूरे परिवेश पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।