सोमवार को निफ्टी में दिन के निचले स्तर से करीब 350 अंकों की जोरदार तेजी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद डेरिवेटिव्स बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी रही। NSE के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) डेटा के मुताबिक, FIIs लगातार चौथे कारोबारी दिन डेरिवेटिव सेगमेंट में नेट सेलर बने रहे।
सोमवार को निफ्टी पहले गिरकर 25,473 तक आ गया था। इसके बाद भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के बयान से बाजार को सहारा मिला। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत मंगलवार, 13 जनवरी से शुरू हो सकती है। इस खबर के बाद निफ्टी में जोरदार रिकवरी हुई और यह 25,813 के हाई तक पहुंच गया। अंत में निफ्टी 107 अंकों की बढ़त के साथ 25,790 पर बंद हुआ।
हालांकि, बाजार की इस तेजी के बावजूद F&O डेटा कुछ और ही कहानी बता रहा है। NSE के आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने सोमवार को ₹1,227.84 करोड़ के इंडेक्स फ्यूचर्स बेचे। पिछले चार कारोबारी सत्रों में अब तक FIIs कुल मिलाकर ₹11,157.92 करोड़ के इंडेक्स फ्यूचर्स बेच चुके हैं।
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डेटा से यह भी पता चलता है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में निफ्टी फ्यूचर्स में FIIs का ओपन इंटरेस्ट 38.5% बढ़ा है। इन तीन दिनों में FIIs ने 49,624 निफ्टी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे, जबकि इस दौरान निफ्टी करीब 1.3% फिसला। इसका साफ मतलब है कि FIIs हाल के दिनों में निफ्टी फ्यूचर्स में शॉर्ट पोजिशन बना रहे हैं।
NSE डेटा के मुताबिक, फिलहाल FIIs का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो सिर्फ 0.08 है। इसका मतलब यह है कि FIIs के करीब 92% पोजिशन शॉर्ट साइड पर हैं। यानी वे बाजार में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतना कम लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो कई बार बाजार के निचले स्तर पर सहारा भी बन सकता है।
FIIs के उलट, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और रिटेल निवेशक बाजार में ज्यादा लॉन्ग पोजिशन लिए हुए हैं। DIIs का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो 2.0 और रिटेल निवेशकों का 2.8 है, यानी हर एक शॉर्ट के मुकाबले करीब तीन लॉन्ग पोजिशन। वहीं, प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो 1.6 के आसपास है।
बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि US टैरिफ से जुड़ी चर्चाओं और Q3 नतीजों के चलते आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। Angel One के टेक्निकल एनालिस्ट ओशो कृष्णन के मुताबिक, निफ्टी को ऊपर की ओर 25,900 के आसपास रुकावट मिल सकती है और इसके बाद 26,000 एक मजबूत रेजिस्टेंस रहेगा। उनका कहना है कि इन स्तरों के ऊपर मजबूती से निकलने पर ही बाजार में फिर से तेजी का माहौल बनेगा।
नीचे की तरफ, 25,680–25,650 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके अलावा 25,500–25,470 का जोन मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम कर सकता है।
SAMCO Securities के डेरिवेटिव एनालिस्ट धुपेश धामेजा का भी मानना है कि जब तक निफ्टी 26,000 के नीचे है, तब तक ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। उनके अनुसार, फिलहाल निफ्टी 25,500 से 26,000 के दायरे में फंसा हुआ है और इसी रेंज के बाहर निकलने से अगली बड़ी चाल तय होगी।