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FPIs का बिकवाली दौर जारी, जनवरी में निकाले ₹22,530 करोड़

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जनवरी में FPIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹22,530 करोड़ निकाले, विदेशी बिकवाली और कमजोर रुपया जारी।

Last Updated- January 18, 2026 | 12:12 PM IST
FPI
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) जनवरी महीने में भी भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकालते रहे। जनवरी के पहले 16 दिन में उन्होंने कुल ₹22,530 करोड़ ($2.5 बिलियन) की निकासी की, जो पिछले साल के बिकवाली के सिलसिले को जारी रखती है।

2025 में FPIs ने भारतीय बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ ($18.9 बिलियन) की निकासी की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल की बिकवाली में वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के कारक शामिल हैं।

सचिन जसुजा, हेड ऑफ इक्विटीज और फाउंडिंग पार्टनर, Centricity WealthTech, बताते हैं कि “यूएस बॉन्ड रिटर्न बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से विकसित बाजारों में निवेश अधिक आकर्षक हो गया है। इस वजह से निवेशक उभरते बाजारों से पैसा हटा रहे हैं।”

Morningstar Investment Research India के हेमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती ने अमेरिकी निवेश विकल्पों को और आकर्षक बना दिया है। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक अस्थिरता ने भी उभरते बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को कम किया है।

V K विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट, Geojit Investments, ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता भी निवेशकों के मनोबल पर असर डाल रही है। वहीं, घरेलू स्तर पर कुछ सेक्टरों में ऊंची वैल्यूएशन और मिश्रित एर्निंग रिपोर्ट ने विदेशी निवेशकों को लाभ निकालने और पोर्टफोलियो संतुलित करने के लिए प्रेरित किया।

रुपए का लगातार कमजोर होना भी FPIs की बिकवाली को बढ़ावा दे रहा है। 2025 में रुपया लगभग 5% कमजोर हुआ और हाल ही में यह डॉलर के मुकाबले करीब 90.44 पर पहुंच गया। रुपया कमजोर होने से डॉलर में रिटर्न घट रहा है, जिससे निवेशकों का दबाव और बढ़ गया है।

विजयकुमार का कहना है कि जब तक बाजार में सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, FPIs की बिकवाली जारी रह सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2025 में एआई आधारित ट्रेडिंग का प्रभाव 2026 की शुरुआत में भी दिख रहा है, हालांकि साल के आगे के महीनों में रुझान बदल सकता है।

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First Published - January 18, 2026 | 12:12 PM IST

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