भारत दुनिया के सबसे बड़े गेमिंग बाजारों में से एक है, जहां लगभग 59 करोड़ गेम खेलने वाले लोग हैं। हालांकि, इन खिलाड़ियों को भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं (पेड यूजर) में बदलना अब भी एक चुनौती है। हालांकि ऐसा पहली बार हो रहा है जब पहली बार किसी गेमिंग कंपनी ने भारत में पेड यूजर की संख्या सार्वजनिक की है।
दक्षिण कोरिया की गेमिंग कंपनी क्राफ्टन ने बताया कि बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया (बीजीएमआई) के पेड यूजर में वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 17 फीसदी की वृद्धि हुई। इस वृद्धि ने कंपनी को वैश्विक स्तर पर 93 करोड़ डॉलर का रिकॉर्ड तिमाही राजस्व और 38 करोड़ डॉलर का परिचालन मुनाफा हासिल करने में मदद की। पीयूबीजी फ्रैंचाइजी ने भी पहली बार तिमाही राजस्व में करीब 68 करोड़ डॉलर का आंकड़ा पार किया, जिसमें बीजीएमआई सहित पीसी और मोबाइल दोनों मंच पर वृद्धि का योगदान है।
भारत के गेमिंग उद्योग में कंपनियां आमतौर पर पेड यूजर के आचरण के बारे में जानकारी साझा नहीं करती थीं, लेकिन जारी किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय गेमर्स अब इन गेम में कैसे खर्च कर रहे हैं।
बीजीएमआई के मार्केटिंग निदेशक श्रृंजय दास ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि उन्होंने विभिन्न खर्च श्रेणियों में वृद्धि देखी है। नए यूजर रॉयल पास जैसी सब्सक्रिप्शन खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत लगभग 70 रुपये है वहीं अधिक खर्च करने वाले यूजर प्रीमियम कॉस्मेटिक आइटम जैसे बीजीएमआई का ‘एक्ससुइट’ खरीद रहे हैं, जिनमें सालाना आधार पर 26 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
दास ने कहा, ‘अब वृद्धि केवल लेनदेन के आकार पर निर्भर नहीं करता। हमने नए पेड यूजर में वृद्धि देखी है और वहीं अधिक खर्च करने वालों की संख्या भी अलग-अलग उत्पाद में बढ़ी है।’ उन्होंने यह भी बताया कि पेड यूजर के बने रहने की रफ्तार मजबूत हो रही है और पहली बार खरीद करने वाले यूजर भी अब दोबारा इन-गेम पर खर्च कर रहे हैं।
गेम में अधिकतर खर्च अब कॉस्मेटिक्स, क्रिएटर को जोड़े जाने और डिजिटल पहचान से जुड़ा है, न कि पारंपरिक ‘पे-टू-विन’ प्रक्रिया से। उन्होंने खर्च बढ़ने का कारण एनीमे फ्रैंचाइजी, आईपीएल टीमों और भारतीय गेमिंग क्रिएटर्स के साथ सहयोग बताया। बीजीएमआई ने पहले जुजुत्सु कैसेन और ड्रैगन बॉल जेड जैसे एनीमे टाइटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ करार किया है।
गेम में स्ट्रीमर्स के लिए क्रिएटर की आवाज के पैक भी पेश किए गए हैं, जैसे जोनाथन और नॉट योर टाइप। दास ने कहा, ‘एक वैश्विक गेम का भारतीय एनीमे क्रिएटर या 2डी एनीमेशन क्रिएटर के साथ ऐसा सहयोग करना शानदार था और हमने वॉइस पैक से रिकॉर्ड कमाई देखी।’ उनका कहना है, ‘गेमिंग अब स्थायी रूप से मनोरंजन का रूप बन चुका है। पहले इसे सिर्फ एक शौक माना जाता था।’
उन्होंने इसे भारत में ओटीटी सब्सक्रिप्शन की तरह तुलना की जहां शुरुआत में लोग केवल बड़े रिलीज पर सब्सक्राइब करते थे लेकिन अब नियमित भुगतान आम हो गया है। कंपनी ने यह भी देखा कि खरीदारी का यह रुझान महानगरों से इतर शहरों के बाहर भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘महानगरों में औसत खर्च अधिक है लेकिन यह बदल रहा है। अब मझोले शहरों में भी खर्च और जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है।’
उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि गेमिंग में बदलाव अब सिर्फ प्रकाशक तक सीमित नहीं रहा बल्कि ईस्पोर्ट्स इवेंट और गेमिंग मर्केंडाइज में भी दिखाई दे रहा है। नॉडविन गेमिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष निशांत पटेल ने कहा, ‘भारत को लेकर जो धारणा थी कि यहां के बाजार में लोग ज्यादा जुड़ते हैं लेकिन कमाई कम होती है, यह सब अब अतीत की बात बनती जा रही है।’
पटेल ने बताया कि प्रीमियम स्किन्स, इमोट्स और डिजिटल कलेक्टिबल्स में खर्च बढ़ रहा है, साथ ही गेमिंग मर्केंडाइज और ईस्पोर्ट्स के साथ पॉप कल्चर इवेंट जैसे कॉमिक कॉन इंडिया में प्रीमियम टिकट की मांग भी बढ़ रही है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय यूपीआई-आधारित लेन-देन और वर्चुअल सामान पर खर्च करने में बढ़ती सहजता को दिया।
भारत का गेमिंग बाजार वित्त वर्ष 2024 में लगभग 3.8 अरब डॉलर का राजस्व हासिल कर चुका है और यह आंकड़ा लुमिकाई और गूगल की संयुक्त रिपोर्ट में सामने आया। फिर भी, भारत अब भी प्रमुख गेमिंग बाजारों के मुकाबले भुगतान करने वाले यूजर और प्रति यूजर औसत राजस्व में पीछे है।