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भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मची धूम, पर क्या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की धीमी रफ्तार से बढ़ रही टेंशन?

करीब डेढ़ साल पहले जब दिलीप यादव ने इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) खरीदी थी, तब चार्जिंग की कोई समस्या नहीं थी क्योंकि गुरुग्राम की उनकी पुरानी हाउसिंग सोसाइटी में कॉमन चार्जिंग स्टेशन लगे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने उसी इलाके के…

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Last Updated: मई 9, 2026 | 8:07 PM IST

करीब डेढ़ साल पहले जब दिलीप यादव ने इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) खरीदी थी, तब चार्जिंग की कोई समस्या नहीं थी क्योंकि गुरुग्राम की उनकी पुरानी हाउसिंग सोसाइटी में कॉमन चार्जिंग स्टेशन लगे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने उसी इलाके के एक दूसरे कॉम्प्लेक्स में घर बदला, हकीकत बदल गई।

यादव बताते हैं, “नए अपार्टमेंट में रेजिडेंट्स को बेसमेंट में अपना पर्सनल चार्जर लगाने की इजाजत नहीं थी और वहां कोई पब्लिक चार्जिंग पॉइंट भी नहीं था।”

घर पर चार्जिंग की सुविधा न होने की वजह से यादव को अपने ऑफिस के चार्जर पर निर्भर रहना पड़ा, जहां लंबी वेटिंग की वजह से उनका पूरा रूटीन बिगड़ने लगा। आखिर में, रोज की सुविधा के लिए उन्हें मोबाइल EV चार्जिंग वैन (चलते-फिरते चार्जर) का सहारा लेना पड़ा।

दिलीप यादव का यह अनुभव भारत के ‘EV ट्रांजेक्शन’ के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती को दिखाता है: भले ही लोग अब इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने को तैयार हैं, लेकिन चार्जिंग की सुविधा अभी भी अधूरी, बिखरी हुई और भरोसे के लायक नहीं है।

बिक्री बढ़ने के बावजूद चार्जिंग को लेकर डर क्यों है?

अप्रैल 2026 में भारत का EV बाजार काफी तेजी से बढ़ा है। ‘फाडा’ (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इलेक्ट्रिक पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री 75.1% बढ़कर 23,506 यूनिट हो गई। वहीं, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री 60.7% बढ़कर लगभग 1,49,000 यूनिट तक पहुंच गई। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर में भी 3.3% की बढ़त देखी गई।

बिक्री में आई इस तेजी ने अब सारा ध्यान गाड़ियों की डिमांड से हटाकर चार्जिंग नेटवर्क की मजबूती पर टिका दिया है। EV चार्जिंग सॉल्यूशन फर्म Zenergize के CEO नवनीत डागा का कहना है कि असली चुनौती सिर्फ चार्जर लगाने की नहीं है, बल्कि उन्हें हर समय चालू रखने, सही परफॉर्मेंस देने और भारत की गर्मी, बिजली के उतार-चढ़ाव व ज्यादा इस्तेमाल जैसे हालातों में टिकाए रखने की है।

उन्होंने आगे कहा कि EV को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए चार्जिंग स्टेशनों को पेट्रोल पंपों जितना भरोसेमंद बनाना होगा।

संस्थान ‘IEEFA’ की एक रिपोर्ट में भी पुरानी टेक्नोलॉजी, मेंटेनेंस की कमी और पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों के खराब कामकाज को EV की राह में बड़ा रोड़ा बताया गया है।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर रजत महाजन ने बताया कि 2026 के एक सर्वे के अनुसार, 43% भारतीयों को पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की चिंता है, जबकि 41% लोग चार्जिंग में लगने वाले समय और 31% लोग घर पर चार्जिंग की सुविधा न होने से परेशान हैं।

महाजन के मुताबिक, भारत में फिलहाल प्रति 235 गाड़ियों पर सिर्फ 1 चार्जर है, जबकि वैश्विक पैमाना 1:6 से 1:20 का है। उन्होंने कहा, “नीति आयोग के 30% EV लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमें करीब 13.2 लाख चार्जर चाहिए, जबकि अभी हमारे पास सिर्फ 30,000 चार्जर हैं।”

क्या भारत का चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है?

एक्सीकॉम की ‘इंडिया डीसी फास्ट चार्जिंग रिलायबिलिटी रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, भारत में पब्लिक चार्जिंग स्टेशन 2022 में 5,000 थे, जो 2025 तक बढ़कर 29,000 से ज्यादा हो गए। लेकिन सिर्फ संख्या बढ़ने से समस्या हल नहीं हुई है।

रिपोर्ट में पाया गया कि फरवरी 2024 में लगभग आधे पब्लिक चार्जर (25,000 में से 12,100) किसी न किसी समय खराब थे। करीब 25% चार्जर तकनीकी खराबी, ग्रिड की समस्या या मेंटेनेंस में देरी के कारण बार-बार बंद होते रहे।

चार्जिंग की स्पीड भी एक बड़ी समस्या है। भारत में गाड़ी चार्ज होने में औसत 1.5 से 2 घंटे लगते हैं, जबकि दुनिया भर में फास्ट चार्जिंग का मानक 30 मिनट से 1 घंटा है।

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ग्राहकों के लिए एक और सिरदर्द यह है कि उन्हें चालू चार्जर खोजने के लिए 17 से 20 अलग-अलग मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल करना पड़ता है और पेमेंट सिस्टम भी बहुत उलझा हुआ है। करीब 73% लोग जो अभी EV इस्तेमाल नहीं कर रहे, उनका मानना है कि भारत में अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग की भारी कमी है।

EV बैटरी बनाने वाली कंपनी ‘जीयॉन’ (Geon) के आनंद काबरा कहते हैं कि असल मुद्दा भरोसे का है। उन्होंने कहा, “जब 70% EV यूजर खराब चार्जर की समस्या झेल रहे हों, तो यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं बल्कि भरोसे की कमी है।”

पहुंच की कमी से ‘चार्जिंग चिंता’ क्यों बढ़ रही है?

कई बार नजदीकी चार्जर लिस्ट में तो दिखता है लेकिन उसे इस्तेमाल करना मुमकिन नहीं होता। पब्लिक चार्जर अक्सर मॉल, ऑफिस पार्क या ऐसी सोसायटियों में होते हैं जहां आने-जाने का समय तय होता है। इससे रात के समय, हाईवे पर या इमरजेंसी में सफर करने वालों को दिक्कत होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, 88% EV मालिकों ने माना कि एक चालू और सुरक्षित चार्जिंग स्टेशन ढूंढना उनके लिए तनाव का बड़ा कारण है।

अपार्टमेंट में रहने वालों के सामने सबसे बड़ी बाधा क्या है?

पूरी दुनिया में लोग घर पर ही EV चार्ज करना पसंद करते हैं, लेकिन भारत के शहरों में हाउसिंग सोसायटियों की चिंताओं और नियमों की वजह से यह मुश्किल हो रहा है।

थिंक टैंक ‘नेशन फर्स्ट’ की शगुन विश्वनाथ का कहना है कि अगर संभव हो, तो 70-80% चार्जिंग घरों में ही होनी चाहिए, जो अपार्टमेंट्स को इस बदलाव का केंद्र बनाती है।

लेकिन कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) सुरक्षा कारणों से हिचकिचाते हैं। बेसमेंट में वेंटिलेशन, ट्रांसफार्मर की क्षमता, बिना सर्टिफाइड चार्जर और आग लगने जैसी चिंताओं ने अनिश्चितता पैदा कर दी है। अब यह मुद्दा सिर्फ ट्रांसपोर्ट का नहीं, बल्कि बिल्डिंग रेगुलेशन का बन गया है।

क्या शहरी प्लानिंग से हल निकलेगा?

कुछ राज्य अब इन समस्याओं को सुलझाने के लिए बिल्डिंग नियमों में बदलाव कर रहे हैं। हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, ताकि रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के बेसमेंट और पार्किंग एरिया में चार्जिंग स्टेशन लगाए जा सकें।

एवरटा (Everta) के CEO मानसवी शर्मा का कहना है कि हरियाणा का यह कदम एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, जो EV चार्जिंग को शहरी प्लानिंग का हिस्सा बनाता है।

EV के भविष्य के लिए चार्जिंग क्यों जरूरी है?

दिलीप यादव जैसे खरीदारों के लिए सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि गाड़ी कितनी दूर चलेगी, बल्कि यह है कि जरूरत पड़ने पर चार्जिंग मिलेगी या नहीं। भारत में गाड़ियां तो बिक रही हैं, लेकिन जब तक चार्जिंग सुविधा पेट्रोल पंपों जितनी आसान और भरोसेमंद नहीं होती, तब तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सपना एक बड़ी रुकावट का सामना करता रहेगा।

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