नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने अपने आईपीओ के लिए वैल्यूएशन पहले के मुकाबले करीब 15 फीसदी कम रखा है। इसके बावजूद दुनिया के बड़े शेयर बाजार एक्सचेंजों से तुलना करें तो NSE का वैल्यूएशन काफी ज्यादा है। NSE के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर है। ऊपरी भाव 1,785 रुपये पर कंपनी का शेयर वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई के करीब 42.9 गुना पीई पर मिल रहा है। यह दुनिया के प्रमुख शेयर बाजार एक्सचेंजों के मुकाबले ज्यादा है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक कॉइनबेस ग्लोबल करीब 40.35 गुना पीई पर कारोबार कर रहा है। सिंगापुर एक्सचेंज का पीई करीब 34.56 गुना है। वहीं लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप करीब 29.35 गुना और नैस्डैक करीब 25.95 गुना पीई पर कारोबार कर रहे हैं। इसके अलावा CME Group, Intercontinental Exchange, HKEX, Deutsche Börse, Cboe Global Markets और Japan Exchange Group का पीई करीब 23 से 25 गुना के बीच है। इस लिहाज से NSE का 42.9 गुना पीई ज्यादातर बड़े विदेशी एक्सचेंजों से काफी ज्यादा है।
बाजार जानकारों का कहना है कि NSE की मजबूत बाजार हिस्सेदारी और भारत में शेयर बाजार के तेजी से बढ़ते दायरे के कारण कंपनी को विदेशी एक्सचेंजों के मुकाबले ज्यादा वैल्यूएशन मिल रहा है। AUM Capital Market के रिसर्च हेड राजेश अग्रवाल के मुताबिक NSE का आईपीओ प्रीमियम वैल्यूएशन पर है। हालांकि बाजार में कंपनी की मजबूत पकड़, आगे ग्रोथ के मौके और मजबूत कारोबार इस वैल्यूएशन को सहारा देते हैं।
उनका कहना है कि भारत का पूंजी बाजार विकसित देशों के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है। देश में परिवारों की बचत का वित्तीय निवेश की तरफ बढ़ना और शेयर बाजार में अभी भी कम भागीदारी NSE के लिए लंबी अवधि में ग्रोथ के मौके पैदा करती है।
विदेशी एक्सचेंजों से NSE महंगा जरूर है, लेकिन घरेलू बाजार में तस्वीर अलग है। BSE का शेयर करीब 54.33 गुना पीई पर कारोबार कर रहा है। वहीं MCX का पीई करीब 60.77 गुना है। इसकी तुलना में NSE का 42.9 गुना पीई कम है। राजेश अग्रवाल के मुताबिक BSE छोटी कारोबारी जमीन से तेजी से बढ़ रहा है और इसकी तेज मौजूदा ग्रोथ उसके ज्यादा वैल्यूएशन की एक वजह है।
वेंचुरा के मुताबिक NSE वित्त वर्ष 2000-01 से 2025-26 तक कैश इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल कारोबार के लिहाज से देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE की कैश मार्केट टर्नओवर में हिस्सेदारी 92.99 फीसदी थी। इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.79 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में 74.71 फीसदी रही।
इसी वित्त वर्ष में ट्रेड की संख्या के आधार पर NSE दुनिया का सबसे बड़ा मल्टी-एसेट एक्सचेंज भी रहा। कैश इक्विटी ट्रेड में इसकी वैश्विक हिस्सेदारी 11.38 फीसदी और इक्विटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में 51.18 फीसदी रही।
NSE की कमाई और मुनाफे के आंकड़े भी मजबूत रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन 62.1 फीसदी और रिटर्न ऑन इक्विटी यानी RoE 32.1 फीसदी रहा।
वेंचुरा के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के मुताबिक NSE की बाजार हिस्सेदारी और कारोबार का स्तर इसे विदेशी एक्सचेंजों के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन दिलाने में मदद करता है। उनका कहना है कि प्रमुख वैश्विक एक्सचेंज समूहों की तुलना में NSE का एडजस्टेड ऑपरेटिंग एबिटा मार्जिन भी सबसे ज्यादा है।
इस तरह NSE का आईपीओ ज्यादातर बड़े विदेशी एक्सचेंजों के मुकाबले ऊंचे वैल्यूएशन पर आया है। वहीं घरेलू स्तर पर BSE और MCX के मुकाबले इसका पीई कम है। ऐसे में NSE की वैल्यूएशन को समझने के लिए उसकी बाजार हिस्सेदारी, कमाई की रफ्तार और आगे के ग्रोथ के मौकों को भी देखना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिजनेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता। निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने और जरूरत पड़ने पर निवेश सलाहकार की मदद लेने की सलाह दी जाती है।)