facebookmetapixel
Advertisement
पहली बार लोन लेने से पहले जरूर जान लें ये बातें, एक गलती पड़ सकती है भारीकमजोर रिटर्न से AMC कंपनियों की बढ़ी मुश्किल, ब्रोकरेज ने बताए अपने टॉप पिकन्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से दिया टैक्स, पर ओल्ड रिजीम से भरा ITR तो क्या होगा? दिल्ली ITAT ने किया साफचीनी मिलों पर सरकार सख्त, पेराई सीजन शुरू होने से पहले करना होगा किसानों का बकाया भुगतानNPS वात्सल्य से जुड़े 4.9 लाख बच्चे! कैसे इस स्कीम से जुड़कर आप अपने संतान का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं?नेस्ले पर FSSAI का शिकंजा! NAN और Lactogen के दावों पर उठे सवाल, बायोटिन टेस्ट में भी मिली गड़बड़ीNSE IPO दूसरे दिन दोगुना भरा, QIB और NII से भारी डिमांड, लेकिन ग्रे मार्केट से सुस्त संकेतअदाणी ग्रुप के शेयरों में 15% तक उछाल, जेफरीज ने इन 4 शेयरों पर दी BUY रेटिंग, 43% तक अपसाइड के टारगेटभारत में iPhone 18 का क्रेज: Apple स्टोर्स पर खरीदारों की लगीं लाइनेंDefence PSU: दुगराजपट्टनम में नया शिपयार्ड बनाएगी मझगांव डॉक, ₹15,000 करोड़ का करेगी निवेश, शेयर उछला

ब्रेंट 104 डॉलर के नीचे, आज क्यों गिर रहा कच्चा तेल?

Advertisement

ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया, जबकि डब्ल्यूटीआई भी करीब 1 फीसदी टूटा

Last Updated- September 18, 2026 | 8:33 AM IST
Crude Oil

कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहने के बावजूद बाजार को उम्मीद है कि तेल की सप्लाई में आई रुकावट उतनी बड़ी नहीं होगी, जितनी पहले आशंका जताई जा रही थी। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बना अतिरिक्त दबाव कम हो रहा है।

शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी गिरकर 103.77 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 100.88 डॉलर प्रति बैरल पर था। आपके दिए ताजा आंकड़ों में ब्रेंट 0.87 फीसदी गिरकर 103.91 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 0.76 फीसदी नीचे 101.14 डॉलर के आसपास दिख रहा है।

आज क्यों गिर रहा है कच्चा तेल?

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब से तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम होना है। पिछले सप्ताह ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद डर था कि लाल सागर की तरफ से होने वाली तेल सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है। लेकिन अब सऊदी अरब इस पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता कुछ दिनों में दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में तेल की कमी का खतरा कुछ कम होगा।

दूसरी बड़ी वजह तेल भेजने के दूसरे रास्ते तलाशना है। सऊदी अरब एशियाई खरीदारों को ओमान के सोहर बंदरगाह के पास जहाज से जहाज में तेल पहुंचाने के जरिए अतिरिक्त कार्गो देने की कोशिश कर रहा है। इससे बाजार को संकेत मिला है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में दिक्कत रहने के बावजूद कुछ तेल दूसरे रास्तों से खरीदारों तक पहुंच सकता है। इसी उम्मीद ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

युद्ध जारी, फिर भी तेल क्यों नहीं चढ़ रहा?

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच हमले जारी हैं। इसके बावजूद फिलहाल बाजार का ध्यान केवल तनाव पर नहीं, बल्कि इस बात पर ज्यादा है कि वास्तव में कितनी तेल सप्लाई रुक रही है।

यानी बाजार की सोच अभी यह है कि तनाव जरूर बढ़ा है, लेकिन अगर सऊदी अरब दूसरे रास्तों से तेल बाजार तक पहुंचाता रहा और पाइपलाइन जल्द शुरू हो गई तो वास्तविक सप्लाई नुकसान सीमित रह सकता है। इसी वजह से युद्ध से जुड़ा वह अतिरिक्त डर कीमतों से कुछ कम हो रहा है, जिसने पहले तेल को तेजी से ऊपर पहुंचाया था।

मुनाफावसूली भी बनी गिरावट की वजह

कच्चे तेल में इससे पहले लगातार दो सप्ताह तेजी देखने को मिली थी। पश्चिम एशिया में सप्लाई रुकने की आशंका से कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। अब सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम होने के बाद ऊंचे भाव पर कारोबारियों की मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

क्या अब तेल और सस्ता होगा?

फिलहाल इसे बड़ी गिरावट की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। ब्रेंट अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है और पश्चिम एशिया में सप्लाई का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन को नुकसान पहुंचने की खबर है और बाजार में इस बात को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं कि पूरी सप्लाई कब सामान्य होगी। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से तेल की आवाजाही पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।

ऐसे में अभी कच्चे तेल में गिरावट का सीधा मतलब यह नहीं है कि पश्चिम एशिया का जोखिम खत्म हो गया है। आज की गिरावट मुख्य रूप से इस उम्मीद का नतीजा है कि सऊदी अरब की सप्लाई में रुकावट पहले की आशंका से कम रह सकती है। अगर पाइपलाइन जल्दी शुरू होती है और दूसरे रास्तों से अतिरिक्त तेल बाजार तक पहुंचता है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। लेकिन सप्लाई पर कोई नया बड़ा हमला या होर्मुज में आवाजाही और प्रभावित हुई तो कीमतें फिर तेजी से पलट सकती हैं।

Advertisement
First Published - September 18, 2026 | 8:15 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement