Rice production: चालू खरीफ सीजन में कम बारिश और धान के रकबे में कमी के साथ तापमान में अचानक बदलाव से चावल उत्पादन के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। चावल उत्पादन में 20 साल की रिकॉर्ड गिरावट हो सकती है। जिसके कारण खुले बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिल सकता है। हालांकि सरकार के पास मजबूत बफर स्टॉक मजबूत होने के कारण देश में चावल की कमी नहीं होगी।
चावल कारोबारियों का कहना है कि फसल पकने के समय सामान्य से कम बारिश ने धान पैदावार को नुकसान पहुंचाया है। राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि कम बारिश की वजह से धान की उपज गिरेगी, जिससे चावल उत्पादन में लगभग एक करोड़ टन की कमी आ सकती है। यह पिछले साल के रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन उत्पादन के मुकाबले करीब 6.5 प्रतिशत कम है। साल 2009-10 में अल नीनो की वजह से आई गिरावट के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट साबित हो सकती है।
अमेरिकी कृषि विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में भारत में चावल उत्पादन में गिरावट का अनुमान लगाया है। अगस्त की रिपोर्ट में 2026-27 सीजन के दौरान भारत में 15 करोड़ टन चावल के उत्पादन का अनुमान लगाया था जिसे सितंबर की रिपोर्ट में 30 लाख टन घटाकर 14.70 करोड़ टन कर दिया है। हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम फसल अनुमान के मुताबिक 2025-26 के सीजन में चावल का घरेलू उत्पादन 15.40 करोड़ टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
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आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं, धान उगाने वाले कुछ राज्यों में यह कमी 42 प्रतिशत तक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 11 सितंबर तक गर्मियों की धान (खरीफ) की बुवाई का रकबा 426.8 लाख हेक्टेयर था, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 4 प्रतिशत कम है। भारत में लगभग 80-85 प्रतिशत धान-चावल का उत्पादन खरीफ सीजन में होता है। सर्दियों में बोए जाने वाले धान का रकबा भी कम होने की आशंका है क्योंकि बांधों में पानी का स्तर सामान्य से कम है।
खरीफ धान की पैदावार से जुड़ी चिंताओं ने बासमती और गैस बासमती चावल की कीमतों में तेजी लाने का काम किया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बासमती चावल का दाम पिछले साल के 85 रुपये से बढ़कर लगभग 100 रुपये प्रति किलो पर आया। बीते साल सोना मसूरी 51 से 52 रुपये प्रति किलो पर बिक रहा था, जो अब बढ़कर 63 से 64 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।
उत्पादन कम होने की आशंका से स्थानीय बाजार में चावल की कीमतें बढ़ने लगी हैं। इसकी वजह से निर्यात की कीमतें भी एक साल से ज्यादा के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इस खरीफ प्रीमियम धान की किस्में उगाने वाले किसानों को खुले बाजार में अच्छा दाम मिलेगा। इस वजह से सरकारी धान खरीद में कमी आएगी। घरेलू बाजार के साथ वैश्विक चावल बाजार में भी कीमतें बढ़ रही हैं। जिसका फायदा चावल निर्यातकों को भी मिलेगा।
उत्पादन में गिरावट आने पर निर्यात बिना किसी रोक-टोक के जारी रहने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास चावल का भारी स्टॉक मौजूद है, जिससे निर्यात पर कोई पाबंदी लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक सरकार के पास 5.96 करोड़ टन चावल का रिकॉर्ड स्टॉक था, जो 1 अक्टूबर तक के लिए तय किए गए 1.03 करोड़ टन के सरकारी लक्ष्य से बहुत अधिक है।
अमेरिकी कृषि विभाग ने भारत में चावल का आरम्भिक स्टॉक 5.85 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है जो अगस्त रिपोर्ट के अनुमान 5.40 करोड़ टन से 45 लाख टन ज्यादा है इसलिए उत्पादन में गिरावट आने के बावजूद इसकी कुल उपलब्धता में कमी नहीं आएगी। लेकिन खपत में बढ़ोतरी होने के कारण मार्केटिंग सीजन के अंत में चावल का बकाया अधिशेष स्टॉक कुछ घटकर 5.55 करोड़ टन पर आ सकता है। यह स्टॉक अगस्त के अनुमान 5.10 करोड़ टन से 45 लाख टन ज्यादा है। बेहतर उपलब्धता एवं मजबूत वैश्विक मांग के कारण भारत से चावल के शानदार निर्यात का सिलसिला 2026-27 सीजन के दौरान भी जारी रहेगा और घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति की स्थिति सामान्य बनी रहेगी।