कमोडिटी

ब्रेंट 104 डॉलर के नीचे, आज क्यों गिर रहा कच्चा तेल?

ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया, जबकि डब्ल्यूटीआई भी करीब 1 फीसदी टूटा

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- September 18, 2026 | 8:33 AM IST

कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहने के बावजूद बाजार को उम्मीद है कि तेल की सप्लाई में आई रुकावट उतनी बड़ी नहीं होगी, जितनी पहले आशंका जताई जा रही थी। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बना अतिरिक्त दबाव कम हो रहा है।

शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी गिरकर 103.77 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 100.88 डॉलर प्रति बैरल पर था। आपके दिए ताजा आंकड़ों में ब्रेंट 0.87 फीसदी गिरकर 103.91 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 0.76 फीसदी नीचे 101.14 डॉलर के आसपास दिख रहा है।

आज क्यों गिर रहा है कच्चा तेल?

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब से तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम होना है। पिछले सप्ताह ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद डर था कि लाल सागर की तरफ से होने वाली तेल सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है। लेकिन अब सऊदी अरब इस पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता कुछ दिनों में दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में तेल की कमी का खतरा कुछ कम होगा।

दूसरी बड़ी वजह तेल भेजने के दूसरे रास्ते तलाशना है। सऊदी अरब एशियाई खरीदारों को ओमान के सोहर बंदरगाह के पास जहाज से जहाज में तेल पहुंचाने के जरिए अतिरिक्त कार्गो देने की कोशिश कर रहा है। इससे बाजार को संकेत मिला है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में दिक्कत रहने के बावजूद कुछ तेल दूसरे रास्तों से खरीदारों तक पहुंच सकता है। इसी उम्मीद ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

युद्ध जारी, फिर भी तेल क्यों नहीं चढ़ रहा?

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच हमले जारी हैं। इसके बावजूद फिलहाल बाजार का ध्यान केवल तनाव पर नहीं, बल्कि इस बात पर ज्यादा है कि वास्तव में कितनी तेल सप्लाई रुक रही है।

यानी बाजार की सोच अभी यह है कि तनाव जरूर बढ़ा है, लेकिन अगर सऊदी अरब दूसरे रास्तों से तेल बाजार तक पहुंचाता रहा और पाइपलाइन जल्द शुरू हो गई तो वास्तविक सप्लाई नुकसान सीमित रह सकता है। इसी वजह से युद्ध से जुड़ा वह अतिरिक्त डर कीमतों से कुछ कम हो रहा है, जिसने पहले तेल को तेजी से ऊपर पहुंचाया था।

मुनाफावसूली भी बनी गिरावट की वजह

कच्चे तेल में इससे पहले लगातार दो सप्ताह तेजी देखने को मिली थी। पश्चिम एशिया में सप्लाई रुकने की आशंका से कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। अब सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम होने के बाद ऊंचे भाव पर कारोबारियों की मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

क्या अब तेल और सस्ता होगा?

फिलहाल इसे बड़ी गिरावट की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। ब्रेंट अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है और पश्चिम एशिया में सप्लाई का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन को नुकसान पहुंचने की खबर है और बाजार में इस बात को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं कि पूरी सप्लाई कब सामान्य होगी। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से तेल की आवाजाही पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।

ऐसे में अभी कच्चे तेल में गिरावट का सीधा मतलब यह नहीं है कि पश्चिम एशिया का जोखिम खत्म हो गया है। आज की गिरावट मुख्य रूप से इस उम्मीद का नतीजा है कि सऊदी अरब की सप्लाई में रुकावट पहले की आशंका से कम रह सकती है। अगर पाइपलाइन जल्दी शुरू होती है और दूसरे रास्तों से अतिरिक्त तेल बाजार तक पहुंचता है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। लेकिन सप्लाई पर कोई नया बड़ा हमला या होर्मुज में आवाजाही और प्रभावित हुई तो कीमतें फिर तेजी से पलट सकती हैं।

First Published : September 18, 2026 | 8:15 AM IST