1991 के भुगतान संकट के दौरान एन के सिंह भारत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष-विश्व बैंक के बीच बातचीत करने वाले मुख्य व्यक्ति थे। 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन सिंह ने असित रंजन मिश्र के साथ बातचीत में उन परिस्थितियों को याद किया जिनके तहत भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को उदार बनाया था। उन्होंने इस पर […]
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बिज़नेस स्टैंडर्ड के शिक्षा-तकनीक (एडटेक) ऐप बीस्मार्ट का कार्यक्रम ‘ब्रांड कैनवस 2026’ मंगलवार 11 अगस्त को बेंगलूरु में अपने भव्य समापन (ग्रैंड फिनाले) के लिए पूरी तरह तैयार है। क्रिस्तु जयंती यूनिवर्सिटी, एयरपोर्ट रोड परिसर में होने वाले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतिम चरण में देश के युवा और तेज दिमाग वाले छात्र (जो शीर्ष […]
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वर्ष 1991-92 के लिए जारी इस्पात मंत्रालय की रिपोर्ट में बदलते मिजाज की झलक साफ दिख रही थी। इस रिपोर्ट में एक ऐसी बात का जिक्र था जिसने इस्पात क्षेत्र में एक नए युग का शंखनाद कर दिया। इसमें कहा गया था, ‘इस्पात उत्पादन अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहेगा।’ जुलाई 1991 […]
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एस्सेल समूह के चेयरमैन और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के संस्थापक और मानद चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने 40 साल की उम्र में 1991 में पहली बार सीएनएन देखा। उस समय भारत में मीडिया की पहुंच बहुत कम थी। उन्होंने रिचर्ड ली से ट्रांसपोंडर के लिए संपर्क किया, जिन्होंने एशिया में एकमात्र सैटेलाइट प्रसारण करने वाले एशियासैट […]
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भारत के औषधि उद्योग ने उदारीकरण से पैदा हुए अवसरों का उपयोग करते हुए सक्रिय फार्मास्यूटिकल घटकों (एपीआई), फॉर्म्युलेशन्स, जेनेरिक्स और बायोसिमिलर्स में पूरी दुनिया से होड़ करना शुरू कर दिया। उद्योग का अगला बड़ा कदम नवाचार की ओर होना चाहिए। यह कहना है डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के चेयरमैन सतीश रेड्डी का। सोहिनी दास के […]
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साल 1991 में उदारीकरण से आर्थिक परिदृश्य में जो बदलाव आए उनमें शायद सबसे बड़ा बदलाव भारत के शेयर बाजार का कायापलट है। भारत के बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स की संरचना भारत के कॉरपोरेट जगत में आए बदलाव की व्यापकता को दर्शाती है, जिसमें सफल कंपनियां नियमित अंतराल पर पिछड़ने वाली कंपनियों की जगह लेती […]
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वर्ष 1991 में जब भारत में आर्थिक उदारीकरण का आगाज हुआ था तो उस वक्त शेयरों में निवेश की राह में कई झमेले थे। शेयर कागजी प्रमाण (पेपर सर्टिफिकेट) के रूप में होते थे और उन्हें खरीदने और बेचने के लिए ‘ओपन-आउटक्राई’ सिस्टम (पुरानी व्यवस्था जिसमें लोग मौखिक या इशारे से बोलियां लगाते थे) का […]
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साल 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद से देश में आए बदलाव को फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र से बेहतर शायद ही कोई उद्योग दर्शाता हो। आज, भारत 200 से अधिक देशों को दवाओं की आपूर्ति करता है, वैश्विक जेनेरिक दवा आपूर्ति में उसका योगदान करीब 20 फीसदी है और वह दुनिया भर में टीकों की कुल मांग का […]
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इस समाचार पत्र ने पिछले शुक्रवार को संपादकीय और कई दिग्गज विश्लेषकों के लेखों एवं विचारों के माध्यम से 24 जुलाई, 1991 को उद्योग शुरू करने के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता (औद्योगिक लाइसेंस) काफी हद तक समाप्त होने के 35 वर्ष पूरे होने और इस दौरान हुए बदलावों का पुनरावलोकन किया। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए […]
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भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल 1991 के सुधारों की सफलता की मिसाल हैं। 1992 में दूरसंचार क्षेत्र में नियमों में ढील मिलने से एयरटेल के बनने का रास्ता साफ हुआ। एयरटेल के भारत और दुनिया भर में करीब 65 करोड़ ग्राहक हैं। यह विदेश में भी परिचालन करती है। विकास धूत […]
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