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सोना-चांदी में मुनाफावसूली का समय? जानिए अब निवेशकों को क्या करना चाहिए

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सोना और चांदी में आई तेज तेजी के बाद क्या अब निवेशकों को मुनाफावसूली कर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना चाहिए?

Last Updated- May 14, 2026 | 3:10 PM IST
Gold and silver rate today

पिछले एक साल में सोना और चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से कई लोगों के पोर्टफोलियो में इन कीमती धातुओं का हिस्सा काफी बढ़ गया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से अगले एक साल तक सोने के गहने खरीदने से बचने की अपील की है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या निवेशकों को भी सोना-चांदी में कुछ मुनाफावसूली कर लेनी चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई निवेशक तय एसेट एलोकेशन के हिसाब से निवेश करता है, तो उसके लिए अपने पोर्टफोलियो की दोबारा समीक्षा करना जरूरी हो सकता है। क्योंकि पिछले एक साल में सोना और चांदी ने इक्विटी और डेट जैसे दूसरे एसेट क्लास से बेहतर प्रदर्शन किया है।

शेयर बाजार में अब कमाई बढ़ना जरूरी

भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 2024 में बाजार की वैल्यूएशन काफी ज्यादा हो गई थी और कंपनियों की कमाई की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी थी। यही वजह है कि पिछले दो साल में निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिला।

टाटा एसेट मैनेजमेंट के फंड मैनेजर चंद्रप्रकाश पडियार का कहना है कि बड़ी कंपनियों वाले फंड यानी लार्जकैप फंड ने पिछले 12 महीनों में कमजोर प्रदर्शन किया। इसकी एक वजह कम महंगाई भी रही, क्योंकि कम महंगाई के चलते कंपनियों की कमाई मुख्य रूप से बिक्री की मात्रा बढ़ने पर निर्भर रही।

अब बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक हालात और विदेशी निवेशकों के निवेश पर निर्भर करेगी। एक्सिस म्युचुअल फंड के श्रेयस देवलकर का कहना है कि कई सेक्टर की कंपनियां अभी भी आगे के आउटलुक को लेकर सतर्क हैं। कंपनियां लागत और भू-राजनीतिक हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

हालांकि कुछ राहत की बातें भी हैं। हाल की गिरावट के बाद कई लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले बेहतर नजर आने लगी है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में अभी भी मौके

मिडकैप और स्मॉलकैप फंड ने पिछले एक साल में लार्जकैप फंड के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है। इसकी वजह यह भी है कि इन शेयरों में पहले काफी ज्यादा गिरावट आई थी, जिसके बाद इनमें रिकवरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ चुनिंदा कंपनियां आगे भी अच्छी कमाई दिखा सकती हैं। लेकिन बाजार के इस हिस्से में वैल्यूएशन हर जगह बढ़िया नहीं है। कुछ शेयर अब भी महंगे बने हुए हैं।

डेट फंड में क्या करें?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें, कमजोर रुपया और कमजोर मानसून की आशंका ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर डेट फंड पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि वाले डेट फंड पर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव का ज्यादा असर पड़ता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि अब डेट फंड में मिलने वाला ब्याज यानी accrual पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है।

फाइनेंशियल मार्केट एक्सपर्ट जॉयदीप सेन का कहना है कि लंबी अवधि वाले डेट फंड पर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव का असर ज्यादा पड़ता है। इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर इन फंड्स की कीमतों में भी ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है।

विशेषज्ञ दो से चार साल की अवधि वाले डेट फंड को फिलहाल बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

सोना-चांदी में कितना निवेश सही?

क्वांटम AMC के चिराग मेहता का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी की वजह से सोने को काफी फायदा मिला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर दुनिया में आर्थिक सुस्ती और महंगाई साथ-साथ बनी रहती है, तो ऐसे माहौल में सोना अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सोना-चांदी में जरूरत से ज्यादा निवेश न करें। विशेषज्ञों के मुताबिक, पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 10 से 15 फीसदी तक और चांदी की हिस्सेदारी करीब 5 फीसदी तक रखना सही माना जा सकता है।

पोर्टफोलियो को दोबारा संतुलित करना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना जरूरी होता है। पिछले एक साल में सोना और चांदी तेजी से बढ़े हैं, जिसकी वजह से कई निवेशकों के पोर्टफोलियो में इनका हिस्सा जरूरत से ज्यादा हो गया है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के विशाल धवन का कहना है कि निवेशकों को अब सोना-चांदी में थोड़ा मुनाफावसूली करके पैसा इक्विटी और डेट जैसे दूसरे एसेट क्लास में लगाने पर विचार करना चाहिए।

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First Published - May 14, 2026 | 3:02 PM IST

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