अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सरकारों को पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न मूल्य वृद्धि के झटकों से आम नागरिकों को बचाने के लिए व्यापक आधार वाली सब्सिडी देने प्रति आगाह किया है। ऐसे उपाय अपनाने की स्थिति में आर्थिक तंगी से जूझ रही सरकारों के सार्वजनिक वित्त पर दबाव पड़ सकता हैं। लिहाजा, आईएमएफ ने चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक आधार वाली सब्सिडी की जगह ‘अस्थायी, लक्षित, समय पर और अनुरूप राजकोषीय उपायों’ को लागू करने का सुझाव दिया है। सरकारों को सामान्य सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण जैसे उपायों को सही मायनों में असाधारण स्थितियों के लिए बचा कर रखना चाहिए।
बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान ने ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘सोच-समझकर नहीं किए गए उपाय वित्तीय रूप से महंगे और उन्हें खत्म करना मुश्किल हो सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘बिना सोचे समझे किए गए उपाय महंगाई को और बढ़ावा भी दे सकते हैं, राजकोषीय कमजोरियों को बढ़ा सकते हैं या वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि कर सकते हैं।’ये सुझाव भारत की केंद्र सरकार के लिए अहम हैं, जो संभवतः राजस्व की कमी व व्यय में बढ़ोतरी के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में तंग राजकोषीय स्थिति का सामना कर रही है। आईएमएफ ने बुधवार को कहा, ‘घरेलू ऊर्जा कीमतों पर वैश्विक लागत का प्रभाव पड़ने दें।’
इस बीच भारतीय सरकार ने मार्च के अंत में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर तेल विपणन कंपनियों को उच्च कच्चे तेल की कीमतों के मुकाबले कुछ राहत प्रदान की थी और खुदरा कीमतों में वृद्धि किए बिना यह राहत दी गई थी। अंततः बढ़ते घाटे के कारण ओएमसी को इस महीने पम्प की कीमतों में लगभग 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी पड़ी। ब्रेंट क्रूड की कीमत 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है और अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से ज्यादातर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है।
दरअसल सरकार ने पेट्रोल और डीजल के उत्पाद शुल्क में कटौती की थी। इससे वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रत्यक्ष कर संग्रह पर दबाव पड़ने की उम्मीद है, जिसमें संभावित धीमी वृद्धि प्रत्यक्ष कर की तेजी को बाधित कर सकती है। इसके अलावा सरकार वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य पहले ही चूक गई है और बजट के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में प्रत्यक्ष कर प्राप्तियों में 15 प्रतिशत की महत्त्वाकांक्षी वृद्धि की आवश्यकता है। व्यय की बात करें तो सरकार पहले से ही उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है। उच्च कच्चे पेट्रोलियम की कीमतें वित्त वर्ष 2027 में तेल सब्सिडी बिल को बढ़ा सकती हैं।
आईएमएफ के अनुसार सरकारें मौजूदा सामाजिक सहायता प्रणालियों के माध्यम से लोगों को लक्षित नकद हस्तांतरण अपना सकती हैं। यह मूल्य संकेतों को बनाए रखते हुए राजकोषीय लागतों को सीमित कर सकता है। आईएमएफ ने कहा, ‘यदि कवरेज अपर्याप्त है तो सरकारें अस्थायी रूप से भुगतान बढ़ा सकती हैं या पात्रता का विस्तार कर सकती हैं, इसमें निम्न- और मध्यम-आय वाले परिवार भी शामिल हैं जो गरीबी में फंसने के जोखिम में हैं।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह नीदरलैंड में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध को शीघ्रता से नहीं रोका गया तो गरीबी के खिलाफ दशकों की कड़ी मेहनत से हासिल की गई प्रगति के पलट जाने का खतरा है।