लंदन की हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म क्यूब रिसर्च ऐंड टेक्नॉलजीज (क्यूआरटी) भारत के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) गिफ्ट सिटी में अपना कार्यालय खोल रही है। यह कदम देश के उस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को बढ़ावा देगा जिसके तहत गिफ्ट सिटी को वैश्विक ट्रेडिंग फर्मों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
ब्रिटेन के इस फंड को बाजार में अक्सर ‘गुप्त हेज फंड’ कहा जाता है क्योंकि इसकी सार्वजनिक उपस्थिति काफी कम है और यह अपनी खुद की ट्रेडिंग गतिविधियां चलाता है। आईएफएससी प्राधिकरण (आईएफएससीए) से इसे फंड प्रबंधन इकाई के तौर पर पंजीकृत होने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही क्यूआरटी इस विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में अपना परिचालन शुरू करने वाला पहला वैश्विक हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म बन जाएगा।
क्यूआरटी ने कहा, ‘मुंबई कार्यालय के अलावा हम इस समय गिफ्ट सिटी में एक दफ्तर खोलने की प्रक्रिया में हैं।’ हालांकि उसने इसके बारे में और कोई विवरण नहीं दिया। इस बारे में जानकारी के लिए हमने आईएफएससीए को ईमेल किया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
उम्मीद है कि क्यूआरटी गिफ्ट सिटी में कैटेगरी-3 फंड शुरू करेगा जो जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों को अपनाने की अनुमति देता है। उद्योग के भागीदारों ने बताया कि गिफ्ट-आईएफएससी के अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में पंजीकरण करके क्यूअरटी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से होने वाली आय पर कर छूट और प्रतिभूति लेनदेन कर पर रियायत का लाभ ले सकेगा।
हालांकि कई अन्य हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्मों के भी गिफ्ट सिटी में कार्यालय हैं मगर उनका केंद्र घरेलू शुल्क क्षेत्र में स्थित हैं और उन्हें शेयर ब्रोकिंग लेनदेन पर भुगतान किए गए स्टाम्प शुल्क के रिफंड का लाभ मिल रहा है।
सूत्रों ने बताया कि घरेलू शुल्क क्षेत्र में ऐसी फर्में शेयर ब्रोकर के रूप में पंजीकृत होती हैं और अपनी प्रोप्राइटरी बुक के माध्यम से शेयर ब्रोकर के रूप में निवेश करती हैं।
डेलॉयट इंडिया में पार्टनर राजेश गांधी ने कहा, ‘कुछ अन्य हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर ने घरेलू क्षेत्र में इकाई स्थापित की है और उन्हें स्टाम्प शुल्क के रिफंड का लाभ मिलता है जो उनकी लागत का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि गिफ्ट सिटी में वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के रूप में स्थापित हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडरों को डेरिवेटिव लाभ पर पूर्ण कर छूट का फायदा मिलेगा।’
गिफ्ट सिटी में बढ़ते हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर परिवेश पर गिफ्ट सिटी के प्रबंध निदेशक और समूह सीईओ संजय कौल ने कहा, ‘आईएफएससी हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर और प्रॉपराइटरी ट्रेडिंग गतिविधि के केंद्र के रूप में उभरा है। जंप ट्रेडिंग, टावर रिसर्च कैपिटल, ग्रेविटन रिसर्च कैपिटल, एनके सिक्योरिटीज, मैथिसिस, क्वाडआई और प्लसवेल्थ जैसी फर्में घरेलू शुल्क क्षेत्र से संचालित होती हैं और अन्य फर्में दूरस्थ ट्रेडिंग के माध्यम से आईएफएससी परिवेश में हिस्सा लेती हैं।’
विशेषज्ञों ने बताया कि मॉरीशस, सिंगापुर और आयरलैंड से निवेश करने वाले हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर भी डेरिवेटिव लाभ पर कर छूट का फायदा उठा सकते हैं लेकिन भारत के कर चोरी रोधी और ओईसीडी नियमों के तहत इस आय पर कर लगाने के तरीके को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
गांधी ने कहा, ‘गिफ्ट सिटी में सेटअप बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। हालांकि इसके लिए गिफ्ट सिटी में पर्याप्त काम और प्रमुख प्रबंधन अधिकारियों की आवश्यकता होती है। ऐसे सेटअप के लिए वैकल्पिक निवेश कोष पर लागू होने वाले सामान्य नियम लागू होंगे। इसके तहत कुछ प्रमुख अधिकारियों को गिफ्ट-आईएफएससी में रहना आवश्यक होगा।’
सिंघानिया ऐंड कंपनी में मैनेजिंग पार्टनर रोहित जैन ने कहा, ‘गिफ्ट-आईएफएससी हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडरों के लिए मजबूत आधार पेश करता है क्योंकि यहां विदेश की तरह कराधान का प्रावधान है। यह कैटेगरी-3 वैकल्पिक निवेश फंड के परिचालन को लचीलेपन के साथ डेरिवेटिव आधारित रणनीतियां अपनाने में सक्षम बनाता है।’
हाल के वर्षों में उच्च तरलता और ट्रेडिंग के अवसरों के कारण भारत में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग ने गति पकड़ी है। हालांकि कुछ ट्रेडिंग रणनीतियों के माध्यम से हेरफेर के आरोपों के कारण नियामक जांच के दायरे में भी आए हैं।
ताराक्ष लॉयर्स ऐंड कंसल्टेंट्स में मैनेजिंग पार्टनर कुणाल शर्मा ने कहा, ‘टाइगर ग्लोबल कर विवाद ने विदेशी फंडों के बीच स्थायी प्रतिष्ठान के जोखिम, स्रोत आधारित कराधान जैसे मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ा दी है।’