आज के दौर में ऑफिस का कामकाज बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे काम करने के तरीकों में शामिल हो चुका है। हालांकि, एक नई रिपोर्ट चौंकाने वाले संकेत दे रही है। ‘जीनियस एचआरटेक और डिजीपोल’ के ताजा सर्वे के मुताबिक, कर्मचारी जिस रफ्तार से खुद को AI के साथ ढाल रहे हैं, कंपनियां उस गति से उन्हें ट्रेनिंग देने में नाकाम साबित हो रही हैं।
नवंबर 2025 में 1,704 प्रोफेशनल्स के बीच किए गए इस सर्वे से पता चलता है कि वर्कप्लेस पर AI को अपनाने की होड़ तो मची है, लेकिन इसके लिए जरूरी कॉर्पोरेट ट्रेनिंग प्रोग्राम काफी पीछे हैं। आंकड़ों की मानें तो करीब 71 प्रतिशत कर्मचारियों को पक्का यकीन है कि अगले 2-3 सालों में नई तकनीक और टूल्स की वजह से उनके काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।
रिपोर्ट में सबसे बड़ी कमी ट्रेनिंग के मोर्चे पर दिखाई दी है। सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उनकी कंपनी ने AI के सही इस्तेमाल को लेकर उन्हें कोई ठोस गाइडेंस या ट्रेनिंग नहीं दी है। केवल 37 प्रतिशत कर्मचारी ही ऐसे हैं जिन्हें कंपनी की तरफ से उचित ट्रेनिंग मिली है। ट्रेनिंग के इस अभाव के कारण कर्मचारियों में अनिश्चितता का माहौल है।
Also Read: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में नौकरी सबसे बड़ी चिंता, शुरुआती जॉब्स पर खतरे से युवाओं में तनाव
यही वजह है कि 55 प्रतिशत प्रोफेशनल्स का मानना है कि ऑफिस में AI का आना एक जरूरत है, जबकि 37 प्रतिशत इसे केवल एक ‘ट्रेंड’ की तरह देखते हैं। हैरानी की बात यह है कि ट्रेनिंग की कमी के बावजूद 67 प्रतिशत कर्मचारी अपनी मर्जी से दैनिक कामों को आसान बनाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं।
AI के इस्तेमाल से जहां 69 प्रतिशत लोगों को अपना काम पहले से सरल लग रहा है, वहीं 25 प्रतिशत ऐसे भी हैं जिनके लिए इसने नई उलझनें और पेचीदगी पैदा कर दी है। इसका मतलब है कि AI केवल काम का बोझ कम नहीं कर रहा, बल्कि नए तरह के चैलेंज भी सामने ला रहा है।
भरोसे के मामले में भी अभी लंबी राह तय करनी बाकी है। सर्वे कहता है कि केवल 49 प्रतिशत प्रोफेशनल्स ही AI से मिलने वाली जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। बाकी 36 प्रतिशत कर्मचारी AI के नतीजों को खुद चेक करना जरूरी समझते हैं, जबकि 15 प्रतिशत का मानना है कि भरोसा इस बात पर निर्भर करता है कि काम किस तरह का है।
जीनियस एचआरटेक के सीएमडी आरपी यादव का कहना है कि भविष्य में ऑफिस तभी बेहतर चल पाएंगे जब इंसान और एआई एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करेंगे। इसके लिए कंपनियों को अपने कर्मचारियों को सही स्किल और स्पष्टता देने की सख्त जरूरत है।
(PTI के इनपुट के साथ)