आजकल युवाओं में वित्तीय दबाव तनाव की सबसे बड़ी वजह बन रहा है, क्योंकि अधिकांश को लग रहा है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों के अवसर घट रहे हैं, इसलिए उन्हें नौकरी मिलने में बड़ी दिक्कत पेश आ सकती है। सोमवार को जारी युवा दृष्टिकोण पर विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की प्रमुख रिपोर्ट ‘यूथ पल्स 2026’ में यह आकलन पेश किया गया है। विश्व स्तर पर 489 स्थानों से लगभग 4,600 युवाओं से बातचीत के आधार पर तैयार डब्ल्यूईएफ की इस रिपोर्ट में पाया गया कि आधे लोग मुद्रास्फीति और अस्थिरता को अपने जीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं।
सर्वेक्षण में शामिल 51 प्रतिशत युवाओं ने मुद्रास्फीति और अस्थिरता को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया, जबकि 41 प्रतिशत ने जलवायु परिवर्तन को जीवन के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा माना।
सर्वेक्षण के अनुसार 60 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि वे अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से एआई का उपयोग कर रहे हैं और 66 प्रतिशत का मानना है कि अगले तीन वर्षों में एआई शुरुआती स्तर की नौकरियों पर कैंची चला देगा। इसस पता चलता है कि करियर के आरंभिक चरण में ऑटोमेशन प्रभाव को लेकर युवाओं में चिंता किस कदर हावी है। सर्वेक्षण के दौरान ऐसे युवा बहुत कम मिले, जिन्होंने अभी एआई का इस्तेमाल नहीं किया। आधे से अधिक उत्तरदाताओं लगभग 57 प्रतिशत ने कहा कि गुणवत्ता वाली नौकरियां और उद्यमशीलता के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
दुनिया भर में व्यापक स्तर पर आयोजित इस सर्वेक्षण की खास बात यह भी है कि इसमें लगभग 10 में से 9 लोगों ने एआई को आने वाले वर्षों की सबसे परिवर्तनकारी तकनीकी शक्ति बताया। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कई लोग एआई में पारंगत होकर अपनी आकांक्षा के अनुरूप आय में विविधता ला रहे हैं, कौशल बढ़ा रहे हैं और रचनात्मक या उद्यमशीलता के रास्ते पर चल निकले हैं। वे फ्रीलांस, साइड से काम कर या छोटे उद्यम विशेष तौर पर डिजिटल एवं सेवा क्षेत्रों में कदम बढ़ाकर पैसा कमा रहे हैं।’