भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब देश की सीमाओं से बाहर निकलने की तैयारी में है, लेकिन विदेशी दुकानदारों को इसे अपनाने के लिए मजबूत वजहें चाहिए। ग्लोबल पेमेंट्स गेटवे कंपनी Pay10 के फाउंडर और CEO प्रभप्रीत सिंह गिल का कहना है कि सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को ऐसे प्रैक्टिकल यूज केस तैयार करने चाहिए, जो विदेशी मर्चेंट्स को आसानी से UPI स्वीकार करने के लिए प्रेरित करें।
गिल बताते हैं कि भारत में UPI की सफलता की बड़ी वजह है इसका फटाफट सेटलमेंट, यानी पैसे तुरंत खाते में आ जाते हैं। लेकिन जब कोई टूरिस्ट विदेश में UPI से पेमेंट करता है, तो वहां छोटे-मोटे दुकानदार या रिटेल स्टोर वाले ही ज्यादातर डील करते हैं। इन मर्चेंट्स के लिए सेटलमेंट में देरी बर्दाश्त नहीं होती। इसलिए, NPCI को छोटे व्यापारियों के लिए फेयर और तेज सेटलमेंट टाइमलाइन सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे UPI की ग्लोबल अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी।
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UPI जैसे सिस्टम ने दुनिया भर के व्यापारियों में यह जागरूकता पैदा की है कि पेमेंट्स का सेटलमेंट तुरंत होना मुमकिन है। गिल का मानना है कि अगर NPCI विदेशी देशों में छोटे मर्चेंट्स को ध्यान में रखते हुए सेटलमेंट प्रोसेस को सुधारता है, तो UPI की लोकप्रियता और बढ़ जाएगी। उनकी कंपनी Pay10 फिलहाल 16 देशों के रेगुलेटर्स के साथ काम कर रही है और 2026 से इन जगहों पर लॉन्च करने की योजना बना रही है। गिल कहते हैं कि ग्लोबल पेमेंट रेगुलेटर्स और सेंट्रल बैंकों के नियमों में सिर्फ 10 पर्सेंट से कम अंतर है।
एक भारतीय कंपनी होने के नाते, Pay10 को फिनटेक की ग्लोबल रेगुलेटरी जरूरतों के लिए अच्छी तैयारी है। यहां के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जैसे रेगुलेटर्स ऑडिट, पेमेंट सेटलमेंट और KYC जैसे मानकों पर सख्त हैं, जो कंपनी को मजबूत बनाते हैं। गिल बताते हैं कि असली ग्लोबल इंटरऑपरेबल पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर बनने के लिए Pay10 को हर देश के लोकल नियमों का पालन करना होगा और वहां लाइसेंस लेना पड़ेगा।
वे कहते हैं कि अगर RBI कोई नियम लागू करता है, तो हम उसे अपनी सभी यूनिट्स में डिफॉल्ट बना देते हैं, भले वे भारत के बाहर हों। इससे हर नियम हमारा बेसलाइन बन जाता है और हम उस पर आगे बढ़ते हैं। कम्प्लायंस से लागत तो बढ़ती है, लेकिन Pay10 फ्रॉड कम करने के लिए बिजनेस पर थोड़ा असर सहने को तैयार है। गिल का नजरिया है कि कम्प्लायंस को बाधा नहीं, बल्कि मौका मानकर आगे बढ़ना चाहिए। यही वजह है कि कंपनी दुनिया भर के रेगुलेटर्स के साथ काम कर पा रही है।
Pay10 की रणनीति से साफ है कि भारतीय फिनटेक कंपनियां ग्लोबल मार्केट में मजबूत पकड़ बना सकती हैं, बशर्ते वे लोकल नियमों को सम्मान दें और तेज सेटलमेंट जैसे फीचर्स पर फोकस करें। UPI की इंटरनेशनल जर्नी में ऐसे इनोवेशन्स की भूमिका अहम होगी।