facebookmetapixel
Advertisement
Stock Market Today: वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत, गिफ्ट निफ्टी में गिरावट; आज चढ़ेगा या गिरेगा बाजार?Stocks to Watch Today: IREDA से लेकर RIL और Infosys तक, शुक्रवार को इन 10 स्टॉक्स में रखें नजरअगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार

US-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट! सिर्फ तेल नहीं, भारत में इन जरूरी चीजों की सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा

Advertisement

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध या तनाव बढ़ने पर भारत में तेल, गैस, उर्वरक और कई जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

Last Updated- March 11, 2026 | 12:13 PM IST
Strait of Hormuz crisis
Representative Image

US-Iran War: दुनिया की आधुनिक अर्थव्यवस्था आज ऊर्जा और संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर है। वैश्विक स्तर पर हर दिन अरबों पाउंड तेल और गैस जमीन से निकाले जाते हैं ताकि उद्योग, परिवहन और घरों की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें। भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है. इस पूरी व्यवस्था में पश्चिम एशिया का एक छोटा सा समुद्री रास्ता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बेहद अहम भूमिका निभाता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल एक समुद्री मार्ग नहीं है बल्कि यह भारत के ऊर्जा और व्यापार तंत्र की जीवनरेखा माना जाता है। यदि इस क्षेत्र में युद्ध, सैन्य तनाव या किसी कारण से जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो भारत में केवल पेट्रोल और डीजल ही नहीं बल्कि गैस, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल और निर्माण सामग्री जैसी कई जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

कच्चे तेल की आपूर्ति पर सबसे बड़ा असर

भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसमें से करीब 40 से 60 प्रतिशत कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत तक पहुंचता है। इराक, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी समुद्री मार्ग के जरिए एशियाई देशों को तेल भेजते हैं।

अगर किसी कारण से यह रास्ता बंद हो जाता है या यहां जहाजों की आवाजाही कम हो जाती है तो भारत के सामने सबसे बड़ा संकट तेल आपूर्ति का होगा। देश के पास मौजूद रणनीतिक तेल भंडार कुछ समय तक ही जरूरतें पूरी कर सकते हैं. इसके बाद पेट्रोल और डीजल की कमी होने लगेगी। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा और महंगाई में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

रसोई गैस और एलपीजी की उपलब्धता पर संकट

भारत में घरेलू रसोई तक पहुंचने वाली एलपीजी गैस की बड़ी मात्रा विदेशों से आयात की जाती है। देश की कुल एलपीजी खपत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है और गैस से भरे जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा भारत अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी का भी करीब 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। एलएनजी का उपयोग बिजली उत्पादन, उद्योगों और उर्वरक संयंत्रों में बड़े पैमाने पर होता है. ऐसे में गैस की आपूर्ति बाधित होने पर बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

खेती और उर्वरक आपूर्ति पर प्रभाव

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। किसानों के लिए समय पर उर्वरक उपलब्ध होना बेहद जरूरी होता है. भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उर्वरक या उनके कच्चे पदार्थ पश्चिम एशियाई देशों से आयात किए जाते हैं। अनुमान के मुताबिक भारत को मिलने वाले कुल उर्वरकों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है।

अगर इस मार्ग में रुकावट आती है तो उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे बुवाई के समय किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा और आगे चलकर खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

औद्योगिक कच्चे माल और पेट्रोकेमिकल्स पर असर

पश्चिम एशिया से भारत केवल तेल और गैस ही नहीं बल्कि पेट्रोकेमिकल उत्पादों और औद्योगिक कच्चे माल का भी आयात करता है। इनसे प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, पेंट, केमिकल और कई अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं।

यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट गहराता है तो इन कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन लागत बढ़ेगी और कई उद्योगों में उत्पादन धीमा पड़ सकता है। इसका असर रोजगार और आर्थिक विकास दर पर भी पड़ सकता है।

निर्माण क्षेत्र और हीरा उद्योग पर भी असर

निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले कुछ महत्वपूर्ण कच्चे पदार्थ जैसे चूना पत्थर भी पश्चिम एशिया से भारत लाए जाते हैं। सीमेंट और निर्माण उद्योग के लिए इनकी लगातार आपूर्ति जरूरी होती है। अगर आपूर्ति बाधित होती है तो निर्माण परियोजनाओं की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं।

इसके अलावा भारत का हीरा उद्योग भी इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल जैसे देशों से आने वाले रफ डायमंड्स इसी रास्ते से भारत पहुंचते हैं। इन पत्थरों की कटिंग और पॉलिशिंग का बड़ा केंद्र गुजरात का सूरत शहर है। यदि आपूर्ति रुकती है तो हजारों कारीगरों और कामगारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

भारत के पास क्या विकल्प हैं

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत को अफ्रीका, अमेरिका या अन्य दूरस्थ देशों से तेल और गैस मंगाने के विकल्प तलाशने होंगे। हालांकि इन रास्तों से सामान लाने में ज्यादा समय और अधिक परिवहन लागत लगेगी।

भारत सरकार रणनीतिक तेल भंडार बनाने और आयात स्रोतों को विविध बनाने पर काम कर रही है। फिर भी फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूरी तरह विकल्प उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो एक महीने के भीतर ही बाजार में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी देखने को मिल सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगों को लेकर ट्रंप की कड़ी चेतावनी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि Iran ने Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें या समुद्री खदानें बिछाई हैं, तो उन्हें तुरंत हटा लिया जाए. उन्होंने साफ कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो अमेरिका की ओर से कड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रंप ने यह संदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि यदि ईरान ने किसी भी वजह से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में खदानें लगाई हैं और उन्हें हटाने में देरी करता है, तो इसका जवाब अमेरिकी सेना बेहद सख्त तरीके से देगी। उनके मुताबिक खदानों को हटाना तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम होगा।

समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका सतर्क

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ऐसी तकनीक और मिसाइल क्षमताओं का उपयोग कर रहा है, जिनका इस्तेमाल पहले मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के अभियानों में किया जाता था. इन क्षमताओं के जरिए अमेरिकी बल किसी भी ऐसे जहाज या नौका को तुरंत निशाना बना सकते हैं, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खदानें बिछाने की कोशिश करेगा।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के किसी भी प्रयास को गंभीर खतरे के रूप में लिया जाएगा और उसे तेज और निर्णायक कार्रवाई के जरिए रोका जाएगा।

अमेरिकी सेना का बयान

इस बीच United States Central Command ने भी हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी किया. इसमें बताया गया कि अमेरिकी बल क्षेत्र में ईरान की समुद्री गतिविधियों को सीमित करने के लिए अभियान चला रहे हैं।

कमांड के अनुसार अमेरिकी सेना ईरानी शासन की समुद्र में शक्ति प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को बाधित करने की क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि लंबे समय से ईरानी बल ऐसे जलमार्गों में नौसैनिक स्वतंत्रता के लिए चुनौती पैदा करते रहे हैं, जो अमेरिका और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

Advertisement
First Published - March 11, 2026 | 12:11 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement