US-Iran War: दुनिया की आधुनिक अर्थव्यवस्था आज ऊर्जा और संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर है। वैश्विक स्तर पर हर दिन अरबों पाउंड तेल और गैस जमीन से निकाले जाते हैं ताकि उद्योग, परिवहन और घरों की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें। भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है. इस पूरी व्यवस्था में पश्चिम एशिया का एक छोटा सा समुद्री रास्ता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बेहद अहम भूमिका निभाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल एक समुद्री मार्ग नहीं है बल्कि यह भारत के ऊर्जा और व्यापार तंत्र की जीवनरेखा माना जाता है। यदि इस क्षेत्र में युद्ध, सैन्य तनाव या किसी कारण से जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो भारत में केवल पेट्रोल और डीजल ही नहीं बल्कि गैस, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल और निर्माण सामग्री जैसी कई जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसमें से करीब 40 से 60 प्रतिशत कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत तक पहुंचता है। इराक, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी समुद्री मार्ग के जरिए एशियाई देशों को तेल भेजते हैं।
अगर किसी कारण से यह रास्ता बंद हो जाता है या यहां जहाजों की आवाजाही कम हो जाती है तो भारत के सामने सबसे बड़ा संकट तेल आपूर्ति का होगा। देश के पास मौजूद रणनीतिक तेल भंडार कुछ समय तक ही जरूरतें पूरी कर सकते हैं. इसके बाद पेट्रोल और डीजल की कमी होने लगेगी। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा और महंगाई में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत में घरेलू रसोई तक पहुंचने वाली एलपीजी गैस की बड़ी मात्रा विदेशों से आयात की जाती है। देश की कुल एलपीजी खपत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है और गैस से भरे जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा भारत अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी का भी करीब 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। एलएनजी का उपयोग बिजली उत्पादन, उद्योगों और उर्वरक संयंत्रों में बड़े पैमाने पर होता है. ऐसे में गैस की आपूर्ति बाधित होने पर बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। किसानों के लिए समय पर उर्वरक उपलब्ध होना बेहद जरूरी होता है. भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उर्वरक या उनके कच्चे पदार्थ पश्चिम एशियाई देशों से आयात किए जाते हैं। अनुमान के मुताबिक भारत को मिलने वाले कुल उर्वरकों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है।
अगर इस मार्ग में रुकावट आती है तो उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे बुवाई के समय किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा और आगे चलकर खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
पश्चिम एशिया से भारत केवल तेल और गैस ही नहीं बल्कि पेट्रोकेमिकल उत्पादों और औद्योगिक कच्चे माल का भी आयात करता है। इनसे प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, पेंट, केमिकल और कई अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं।
यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट गहराता है तो इन कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन लागत बढ़ेगी और कई उद्योगों में उत्पादन धीमा पड़ सकता है। इसका असर रोजगार और आर्थिक विकास दर पर भी पड़ सकता है।
निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले कुछ महत्वपूर्ण कच्चे पदार्थ जैसे चूना पत्थर भी पश्चिम एशिया से भारत लाए जाते हैं। सीमेंट और निर्माण उद्योग के लिए इनकी लगातार आपूर्ति जरूरी होती है। अगर आपूर्ति बाधित होती है तो निर्माण परियोजनाओं की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा भारत का हीरा उद्योग भी इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल जैसे देशों से आने वाले रफ डायमंड्स इसी रास्ते से भारत पहुंचते हैं। इन पत्थरों की कटिंग और पॉलिशिंग का बड़ा केंद्र गुजरात का सूरत शहर है। यदि आपूर्ति रुकती है तो हजारों कारीगरों और कामगारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत को अफ्रीका, अमेरिका या अन्य दूरस्थ देशों से तेल और गैस मंगाने के विकल्प तलाशने होंगे। हालांकि इन रास्तों से सामान लाने में ज्यादा समय और अधिक परिवहन लागत लगेगी।
भारत सरकार रणनीतिक तेल भंडार बनाने और आयात स्रोतों को विविध बनाने पर काम कर रही है। फिर भी फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूरी तरह विकल्प उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो एक महीने के भीतर ही बाजार में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी देखने को मिल सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि Iran ने Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें या समुद्री खदानें बिछाई हैं, तो उन्हें तुरंत हटा लिया जाए. उन्होंने साफ कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो अमेरिका की ओर से कड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रंप ने यह संदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि यदि ईरान ने किसी भी वजह से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में खदानें लगाई हैं और उन्हें हटाने में देरी करता है, तो इसका जवाब अमेरिकी सेना बेहद सख्त तरीके से देगी। उनके मुताबिक खदानों को हटाना तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ऐसी तकनीक और मिसाइल क्षमताओं का उपयोग कर रहा है, जिनका इस्तेमाल पहले मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के अभियानों में किया जाता था. इन क्षमताओं के जरिए अमेरिकी बल किसी भी ऐसे जहाज या नौका को तुरंत निशाना बना सकते हैं, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खदानें बिछाने की कोशिश करेगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के किसी भी प्रयास को गंभीर खतरे के रूप में लिया जाएगा और उसे तेज और निर्णायक कार्रवाई के जरिए रोका जाएगा।
इस बीच United States Central Command ने भी हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी किया. इसमें बताया गया कि अमेरिकी बल क्षेत्र में ईरान की समुद्री गतिविधियों को सीमित करने के लिए अभियान चला रहे हैं।
कमांड के अनुसार अमेरिकी सेना ईरानी शासन की समुद्र में शक्ति प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को बाधित करने की क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि लंबे समय से ईरानी बल ऐसे जलमार्गों में नौसैनिक स्वतंत्रता के लिए चुनौती पैदा करते रहे हैं, जो अमेरिका और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।