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लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रिस्क-रिवॉर्ड हुआ अनुकूल: टाटा एएमसी सीईओ राहुल सिंह

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अगले वर्ष के लिए रणनीति उन क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है जिनमें वृद्धि की संभावना ज्यादा है, जैसे बैंकिंग, उपभोक्ता, रिसोर्सेस और विनिर्माण

Last Updated- March 11, 2026 | 10:23 PM IST
Rahul Singh
टाटा ऐसेट मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटीज) राहुल सिंह

घरेलू और वैश्विक घटनाक्रम के बीच टाटा ऐसेट मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटीज) राहुल सिंह ने पुनीत वाधवा को ईमेल के जरिये दिए साक्षात्कार में कहा कि भारतीय शेयर बाजार, उभरते बाजारों में आने वाले निवेश का उचित हिस्सा आकर्षित कर सकते हैं। इसके लिए विदेशी निवेशकों को चीन जैसे अन्य बाजारों में निवेश करने के लिए भारत से बिकवाली की आवश्यकता नहीं होगी, खासकर अगर वे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की थीम से बचाव करना चाहते हैं। संपादित अंश:

क्या बाजारों में निवेश करने का यह सही समय है?

हालांकि अभी तक बाज़ार इतना नीचे नहीं पहुंचा है कि अधिकतम इक्विटी आवंटन जायज हो, लेकिन कई क्षेत्रों में प्रचलित थीमेटिक संबंधी तेजी कम हो गई है। अन्य उभरते बाज़ारों की तुलना में भारत का मूल्यांकन प्रीमियम भी काफी कम हो गया है, जो 90 फीसदी के उच्च स्तर से गिरकर अब करीब 50 फीसदी रह गया है। इस स्तर पर बाज़ार उभरते बाज़ारों में आने वाले निवेश की उचित मात्रा आकर्षित कर सकता है और इसके लिए विदेशी निवेशकों को भारत में अपने शेयर बेचकर चीन जैसे अन्य बाजारों में निवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी, खासकर अगर वे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी थीम के जोखिम से बचाव करना चाहते हैं।

क्या मौजूदा स्तरों पर निवेश के कोई मौके हैं?

कुछ मिड-कैप शेयरों की कीमतें हालांकि अभी भी ज्यादा हैं, लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए समग्र जोखिम-प्रतिफल अनुपात ज्यादा अनुकूल हो गया है क्योंकि कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में कीमत और फंडामेंटल के बीच का अंतर कम होने लगा है।

साल 2025 से आपने क्या सीखा?

2025 से एक प्रमुख सीख हार्डवेयर आधारित एआई सुपर-साइकल का वैश्विक वर्चस्व था। भारत ने जीपीयू और चिप निर्माण चरण में भाग नहीं लिया, जिसके कारण विशेषीकृत वैश्विक तकनीकी केंद्रों की ओर महत्वपूर्ण पूंजी का पलायन हुआ। आईटी क्षेत्र की आय की स्थिरता पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ा। हालांकि प्रमुख वृद्धि नहीं हुई, लेकिन कीमतों में क्षरण बंद होने से आईटी क्षेत्र का कुल कॉरपोरेट लाभप्रदता पर बोझ बनना बंद हो गया।

सबसे बड़ी चूक उम्मीद से धीमी आर्थिक वृद्धि रही। निफ्टी 50 की प्रति शेयर आय (ईपीएस) वृद्धि दर साल भर करीब 3 फीसदी के आसपास बनी रही, जिसके बाद हाल ही में यह 8 फीसदी के करीब पहुंची। इस धीमी वृद्धि ने मजबूत सरकारी पूंजीगत व्यय और साल भर स्थिर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद घरेलू मांग में सुधार की धीमी गति को उजागर किया। अगले साल आय के लिए बेहतर संभावनाएं हैं, जिसका मुख्य कारण बीएफएसआई, उपभोग और कमोडिटीज़ हैं।

क्या आपकी रणनीति में किसी बदलाव की योजना है?

अगले वर्ष के लिए रणनीति उन क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है जिनमें वृद्धि की संभावना ज्यादा है, जैसे बैंकिंग, उपभोक्ता, रिसोर्सेस और विनिर्माण। पारंपरिक आईटी सेवाओं में निवेश कम रखें क्योंकि उनमें सुधार तीव्र गति से नहीं बल्कि धीरे-धीरे होने की उम्मीद है। डिजिटल-आधारित पोर्टफोलियो के लिए हम पुरानी आईटी सेवाओं से हटकर विविधीकरण कर रहे हैं। आंतरिक उपभोग और ऋण वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने से वैश्विक व्यापार की बदलती परिस्थितियों से बचाव हो सकता है।

क्या आप अब ज्यादा पैसिव निवेश की रणनीति का सुझाव देंगे?

वर्तमान परिदृश्य से पता चलता है कि विशुद्ध रूप से पैसिव दृष्टिकोण की तुलना में ऐक्टिव स्टॉक विशिष्ट प्रबंधन कहीं ज्यादा सही है। उदाहरण के लिए, रक्षा क्षेत्र एक व्यापक थीमेटिक रणनीति के बजाय एक स्टॉक विशिष्ट बाजार के रूप में विकसित हो चुका है, जहां हर कंपनी एक साथ आगे बढ़ती है। आईटी क्षेत्र में पुराने मॉडलों से एआई-संचालित सेवा-आधारित खर्च की ओर जाना एक जटिल और कठिन प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उन विशिष्ट प्रदाताओं की पहचान करने की सक्रिय क्षमता आवश्यक है, जो जटिल पुराने सिस्टमों का सफलतापूर्वक आधुनिकीकरण करके प्रतिस्पर्धी लाभ प्राप्त कर सकें। दूसरी ओर, पैसिव रणनीतियां अनजाने में उन पिछड़ने वालों को भी शामिल कर सकती हैं, जो इस तकनीकी बदलाव से जूझ रहे हैं।

क्या कंपनियों की आय उस स्तर पर पहुंच गई है, जिस पर अब विदेशी निवेशक ध्यान देने लगे हैं?

कंपनियों की आय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच रही है। निफ्टी 50 की प्रति शेयर आय (ईपीएस) वृद्धि पिछले वर्ष के 3 फीसदी से बढ़कर इस वर्ष करीब 8 फीसदी होने का अनुमान है और वित्त वर्ष 2027 तक इसमें 15 फीसदी तक की और वृद्धि की उम्मीद है। यह सुधार भारत के मूल्यांकन प्रीमियम में कमी के साथ मिलकर बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बना रहा है, जो पहले उच्च प्रवेश लागतों के कारण निवेश करने से हिचकते थे।

भले ही भारत को उभरते बाजारों से तुरंत उतना ज्यादा निवेश न मिले, लेकिन बिकवाली की तीव्रता में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है। घरेलू मांग में सुधार और स्थिर मुद्रा का संयोजन एशियाई समकक्षों के मुकाबले उच्च प्रतिस्पर्धात्मक प्रदर्शन का संकेत देता है। भारत संरचनात्मक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना हुआ है और आय का रुझान अंततः इन दीर्घकालिक अपेक्षाओं के अनुरूप हो रहा है।

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First Published - March 11, 2026 | 10:18 PM IST

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