फंड प्रबंधकों का कहना है कि गिफ्ट सिटी में फंड प्रबंधन इकाइयों (एफएमई) को नो योर कस्टमर (केवाईसी) प्रक्रिया की ऊंची लागत और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण विदेशी निवेशकों को जोड़ने में दिक्कतें आ रही हैं। इससे उनकी पेशकश अक्सर ऑफशोर फैमिली ऑफिस और संस्थागत निवेशकों तक ही सीमित रह जाती हैं।
कई फंड मैनेजरों ने कहा कि दस्तावेजों के फिजिकल अटेस्टेशन की जरूरत से समय और खर्च बढ़ता है, जिससे अलग-अलग ग्राहकों को जोड़ना मुश्किल हो जाता है। सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) ने एक समिति बनाई है और चुनौतियों को हल करने के लिए एफएमई से सुझाव लिए हैं।
फंड मैनेजरों ने क्षेत्रीय वितरकों द्वारा पहले किए गए केवाईसी को मान्यता देने, केवाईसी पंजीकरण एजेंसियों (केआरए) की मौजूदगी बढ़ाने और केवाईसी फ्रेमवर्क में ज्यादा स्वायत्तता लाने जैसी नियामकीय छूट मांगी है, जिसकी जिम्मेदारी अभी एफएमई पर है।
एक एफएमई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘केवाईसी की जिम्मेदारी एफएमई पर है। ज्यादा व्यावहारिक तरीका यह होगा कि मजबूत नियामकीय नियंत्रण वाले क्षेत्राधिकार को मान्यता दी जाए और सिर्फ उन क्षेत्राधिकारों के निवेशकों पर अतिरिक्त सख्ती लगाई जाए जहां ऐसे सुरक्षा मानक कमजोर हैं।’
केवाईसी सत्यापन की जरूरतें निवेशकों के क्षेत्राधिकार के आधार पर अलग-अलग होती हैं। अभी, गिफ्ट-आईएफएससी में एक ही केआरए है।
डीएसपी म्युचुअल फंड में मुख्य निवेश रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय प्रमुख जय कोठारी ने कहा, ‘अनिवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ मूल आवदेन जरूरी है। उन्हें (विदेशी निवेशक/एनआरआई) फिजिकल आवेदन कोरियर करना पड़ता है, जिससे निवेशक का खर्च बहुत बढ़ जाता है। दूसरा, निवेशक की श्रेणी के आधार पर, संबंधित अधिकार क्षेत्र के अधिकारियों से अटेस्टेशन करवाना पड़ता है, जिससे परिचालन की चुनौतियां और बढ़ जाती हैं।’
कोठारी ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर या हॉन्गकॉन्ग में रहने वाले एनआरआई के मामलों में भी जुटाया गया पैसा वहां के किसी पंजीकृत वितरक के जरिये ही भेजना होगा, जब तक कि निवेशक ने सीधे एफएमई से संपर्क न किया हो।
उन्होंने कहा, ‘यह स्पष्टता हर क्षेत्राधिकार में नहीं है, जिससे एफएमई को इसे लेकर ज्यादा सतर्कता बरती पड़ती है कि वे किस तरह से अप्रोच करते हैं।’ गिफ्ट-आईएफएससी में डीएसपी सबसे बड़े सीएटी-3 एआईएफ प्रबंधकों में से एक है, जिसके पास विदेशी संस्थानों से जुटाई गईं लगभग 1 अरब डॉलर की परिसंपत्तियां हैं।