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Advance Tax: एडवांस टैक्स की डेडलाइन करीब, एक्सपर्ट ने बताए नियम और पेनाल्टी

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Advance Tax: 15 मार्च 2026 तक एडवांस टैक्स की अंतिम किश्त जमा करना जरूरी है, वरना करदाताओं को ब्याज और पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है।

Last Updated- March 11, 2026 | 10:36 AM IST
Advance Tax
Representative Image

Advance Tax: वित्त वर्ष 2025-26 समाप्त होने में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में करदाताओं के लिए एडवांस टैक्स की चौथी और अंतिम किश्त जमा करने की समयसीमा भी नजदीक आ गई है। आयकर नियमों के मुताबिक टैक्सपेयर्स को 15 मार्च 2026 तक एडवांस टैक्स का भुगतान करना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय तक भुगतान नहीं किया जाता है तो करदाता को ब्याज और पेनाल्टी देनी पड़ सकती है।

क्या होता है एडवांस टैक्स

एडवांस टैक्स वह कर होता है जिसे करदाता अपनी अनुमानित सालाना आय के आधार पर पहले से किस्तों में जमा करते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि वित्त वर्ष के अंत में करदाताओं को एक साथ बड़ी राशि के रूप में टैक्स न चुकाना पड़े। इसी कारण आयकर विभाग पूरे साल के दौरान अलग अलग किस्तों में एडवांस टैक्स जमा करने की व्यवस्था देता है।

आम तौर पर एडवांस टैक्स चार किस्तों में जमा किया जाता है। पहली किश्त जून में, दूसरी सितंबर में, तीसरी दिसंबर में और चौथी व अंतिम किश्त 15 मार्च तक जमा करनी होती है। आखिरी किश्त तक करदाता को अपनी अनुमानित टैक्स देनदारी का लगभग पूरा भुगतान कर देना होता है।

किन लोगों को देना होता है एडवांस टैक्स?

फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म मनीफ्रंट के सीईओ मोहित गांग के अनुसार आयकर अधिनियम 1961 की धारा 208 के तहत ऐसे सभी करदाताओं को एडवांस टैक्स देना जरूरी है जिनकी अनुमानित टैक्स देनदारी टीडीएस कटने के बाद भी 10,000 रुपये या उससे अधिक होती है। ऐसे करदाताओं को 15 मार्च तक अपनी अनुमानित टैक्स देनदारी का 100 प्रतिशत एडवांस टैक्स जमा करना होता है।

उन्होंने बताया कि यह नियम केवल व्यवसायियों या प्रोफेशनल्स पर ही लागू नहीं होता, बल्कि वेतनभोगी कर्मचारियों पर भी लागू हो सकता है यदि उनकी आय के अन्य स्रोत मौजूद हों।

इन आय स्रोतों पर भी लागू होता है नियम

मोहित गांग के मुताबिक जिन लोगों की सैलरी के अलावा अन्य स्रोतों से आय होती है, उन्हें भी एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है। इसमें किराये से होने वाली आय, रियल एस्टेट या शेयर बाजार से होने वाला कैपिटल गेन, किसी बिजनेस से कमाई या फ्रीलांस काम से मिलने वाली आय शामिल है।

प्रोफेशनल्स को भी भरना होता है टैक्स

एक्सपर्ट गांग का कहना है कि डॉक्टर, वकील, कंसल्टेंट और अन्य स्वतंत्र पेशेवरों के लिए भी एडवांस टैक्स देना अनिवार्य होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन पेशों में आम तौर पर कोई नियोक्ता नहीं होता जो पहले से टैक्स काटकर सरकार के पास जमा करे। इसलिए उन्हें अपनी अनुमानित आय के आधार पर एडवांस टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिकों को मिलती है छूट

हालांकि आयकर नियमों में कुछ मामलों में राहत भी दी गई है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निवासी वरिष्ठ नागरिकों को एडवांस टैक्स से छूट मिलती है, बशर्ते उनकी आय किसी व्यवसाय या पेशे से न हो। यानी यदि वरिष्ठ नागरिक की आय केवल पेंशन, ब्याज या निवेश से है तो उन्हें एडवांस टैक्स भरने की जरूरत नहीं होती।

समय पर भुगतान करना क्यों जरूरी

विशेषज्ञ के अनुसार एडवांस टैक्स का समय पर भुगतान करना बेहद जरूरी है। यदि करदाता तय समयसीमा तक भुगतान नहीं करते हैं तो आयकर विभाग की ओर से उन पर ब्याज और पेनाल्टी लगाई जा सकती है। इसलिए बेहतर यही है कि करदाता अपनी अनुमानित आय का सही आकलन करके 15 मार्च से पहले एडवांस टैक्स जमा कर दें, ताकि बाद में किसी तरह की वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े।

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First Published - March 11, 2026 | 10:36 AM IST

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